वैदिक सूत्रम चेयरमैन एस्ट्रोलॉजर पंडित प्रमोद गौतम ने शरद पूर्णिमा के सन्दर्भ में बताते हुए कहा कि वर्ष 2022 में शरद पूर्णिमा 09 अक्टूबर दिन रविवार को है, शरद पूर्णिमा वह धार्मिक पर्व की रात्रि है जिसमें राकापति (चन्द्रमा) के पूर्ण स्वरूप का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन चन्द्र देव पूर्ण 16 कलाओं के साथ उदित होते हैं। भारतीय वैदिक हिन्दू ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक कला मनुष्य की एक विशेषता का प्रतिनिधित्व करती है तथा सभी 16 कलाओं से सम्पूर्ण व्यक्तित्व बनता है। पौराणिक मान्यता है कि श्री कृष्ण सभी सोलह कलाओं से युक्त थे।
पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि प्रत्येक वर्ष शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा से उत्पन्न होने वाली रश्मियाँ (किरणें) अद्भुत स्वास्थ्प्रद तथा पुष्टिवर्धक गुणों से भरपूर होती है। साथ ही यह मान्यता भी है कि इस दिन चंद्रमा के प्रकाश से अमृत की वर्षा होती है। श्रद्धालु इस दिन खीर बना कर इसे चन्द्रमा की इस दिव्य रात्रि को उसके अमृततुल्य सकारात्मक एवं दिव्य गुणों के लिए खीर के बर्तन को चन्द्रमा के प्रकाश में सीधे संपर्क में रखते हैं और इस खीर को प्रसाद के रूप में दूसरे दिन सुबह ग्रहण करते हैं।
वैदिक पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी अपनी सवारी उल्लू पर सवार होकर धरती पर भ्रमण करती हैं, और अपने भक्तों की समस्याओं को दूर करने के लिए वरदान देती हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी दिन मां लक्ष्मी का जन्म भी हुआ था। इसलिए धन प्राप्ति के लिए भी ये तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है।
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