पेंशनर्स शिक्षकों के लिए राहत की खबर, नोशनल वेतन वृद्धि के लिए नहीं देना होगा शपथ पत्र

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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.

आगरा। शिक्षकों और पेंशनर्स के लिए राहत की खबर। अब नोशनल वेतनवृद्धि स्वीकृति हेतु नोटरी शपथ-पत्र की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। यह निर्णय शिक्षकों के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

वार्ता से निकला सकारात्मक निर्णय

मण्डलीय उप शिक्षा निदेशक आगरा श्री मनोज कुमार गिरि से हुई सार्थक वार्ता के बाद यह निर्णय सामने आया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि संगठन की ओर से पेंशनर्स की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी।

पेंशनर्स की सुविधा को मिला सम्मान

नोटरी शपथ-पत्र की बाध्यता पर आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद सरकार ने पेंशनर्स के व्यापक हित में यह नियम हटाने का फैसला किया। इससे हजारों सेवानिवृत्त शिक्षकों को राहत मिलेगी। वे अब सरल प्रक्रिया के माध्यम से वेतनवृद्धि स्वीकृति का लाभ ले सकेंगे।

आवेदन प्रक्रिया हुई सरल

डॉ. नरवार ने आगे बताया कि 1 जनवरी 2006 से 1 जनवरी 2016 के बीच सेवानिवृत्त हुए अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य, प्रवक्ता, प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक अब निर्धारित प्रपत्र के साथ आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए पेंशन स्वीकृति आदेश तथा सातवें वेतन आयोग के तहत पुनरीक्षित पेंशन निर्धारण आदेश की प्रतियाँ संलग्न करनी होंगी। विद्यालय के प्रबंधक या प्रधानाचार्य से आवेदन दो प्रतियों में आगे बढ़वाकर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा कराया जाएगा। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने पर नोशनल वेतनवृद्धि स्वीकृति का आदेश जारी होगा।

शिक्षकों में प्रसन्नता की लहर

इस निर्णय से शिक्षा जगत में प्रसन्नता का माहौल है। लंबी प्रक्रिया और नोटरी खर्च से मुक्त होकर अब शिक्षक वर्ग को राहत की अनुभूति हो रही है। पेंशनर्स संगठन ने इसे ऐतिहासिक पहल करार दिया है।

संपादकीय

यह निर्णय न केवल प्रशासन की संवेदनशीलता का परिचायक है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही दिशा में संवाद सदैव फलदायी होता है। इस उपलब्धि में डॉ. देवी सिंह नरवार की भूमिका सराहनीय है। उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं को अधिकारिक मंच तक पहुँचाकर उनके जीवन में सहजता लाने का कार्य किया। उनका यह प्रयास उन सभी शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सेवा के बाद भी अपने हक के लिए संघर्षरत हैं। डॉ. नरवार का समर्पण शिक्षाविदों की आवाज़ बनकर उभरा है।

डॉ भानु प्रताप सिंह 

Dr. Bhanu Pratap Singh