आगरा। मंडलायुक्त सभागार में बुधवार को आगरा एवं अलीगढ़ मंडल की चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की मंडलीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता डॉ. पिंकी जोवल, आईएएस (मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) ने की। बैठक में अमित कुमार घोष, आईएएस (अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन) तथा रितु माहेश्वरी (सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) वर्चुअल माध्यम से शामिल रहीं। सीएमओ डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने सभी अधिकारियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
बैठक में दोनों मंडलों में संचालित स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार राज्य स्तर के अधिकारी मंडल स्तर पर पहुंचकर योजनाओं की भौतिक जांच, मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। इससे पहले लखनऊ, अयोध्या और कानपुर मंडल में भी इसी तरह की समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं।
खसरा व टीकाकरण पर सख्ती, फिरोजाबाद पर विशेष चिंता
डॉ. पिंकी जोवल ने खसरा और टीकाकरण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए बताया कि आगरा और अलीगढ़ मंडल में कुल 1174 खसरा केस रजिस्टर्ड किए गए हैं। वर्ष की अंतिम तिमाही में दोनों मंडलों के अधिकांश जनपदों में सुधार संतोषजनक रहा, लेकिन जनपद फिरोजाबाद में अभी भी अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। समीक्षा में यह भी सामने आया कि 60 से 70 प्रतिशत मामलों में बच्चों को खसरे की वैक्सीन नहीं लगी थी। इस पर मिशन निदेशक ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि टीकाकरण को प्रभावी बनाया जाए, एएनएम स्तर तक व्यक्तिगत मॉनिटरिंग हो और खसरे के सभी मामलों की समय रहते पहचान कर इलाज सुनिश्चित कराया जाए।
10 दिन में टीकाकरण प्रगति, 1 माह में सुधार के निर्देश
अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने समीक्षा के लिए विकसित विशेष चेकलिस्ट और डैशबोर्ड के आधार पर अधिकारियों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि टीकाकरण अभियान में अपेक्षित प्रगति 10 दिन में और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार 01 माह में सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निर्देश दिए कि इस मंडलीय समीक्षा बैठक की अनुपालन बैठक शीघ्र आयोजित की जाए।
अस्पतालों में सिटीजन चार्टर, सुझाव पेटिका और मूलभूत सुविधाओं पर फोकस
डॉ. पिंकी जोवल ने चेकलिस्ट के आधार पर सभी जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य केंद्रों पर सिटीजन चार्टर, शिकायत/सुझाव पेटिका, पेशेंट वेटिंग एरिया, सिक्योरिटी गार्ड, स्वच्छ पेयजल, महिला-पुरुष के अलग टॉयलेट, हेल्थ एटीएम, एक्सरे मशीन, आईसीयू, पीडियाट्रिक ओपीडी और क्रिटिकल/इमरजेंसी वार्ड में उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अस्पतालों में विभागों को दर्शाने वाले साइन बोर्ड, जियो टैगिंग और अग्निशमन सुरक्षा मानकों की भी समीक्षा की गई।
जनपद एटा, मैनपुरी, मथुरा और हाथरस में सिटीजन चार्टर और सुझाव बॉक्स की स्थिति संतोषजनक न मिलने पर 24 घंटे में व्यवस्था पूरी कर फोटो भेजने के निर्देश दिए गए। अनुपालन न होने पर प्रतिकूल प्रविष्टि और वेतन आहरण रोकने जैसी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
मानव संसाधन का “रेशनलाइजेशन”, 15 दिन में एसओपी बनाने के निर्देश
बैठक में स्थायी डॉक्टर, फार्मासिस्ट, एएनएम सहित संविदा/आउटसोर्स कर्मियों के मानव व तकनीकी संसाधनों का रेशनलाइजेशन करने के निर्देश दिए गए। डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि स्टेट टीम के निरीक्षण में कई इकाइयों में जरूरत से अधिक स्टाफ तैनात मिला, जबकि कुछ अस्पतालों में आवश्यक स्टाफ की कमी पाई गई। इस स्थिति को सुधारने के लिए 15 दिन में एसओपी तैयार कर कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए।
साफ-सफाई, यूनिफॉर्म, बायोमेडिकल वेस्ट और जांच सुविधाओं पर निर्देश
बैठक में स्वास्थ्य केंद्रों पर ड्यूटी के दौरान निर्धारित यूनिफॉर्म में रहने, बायोमेडिकल वेस्ट के समुचित निस्तारण, ऑक्सीजन सिलेंडर, एक्सरे सहित जांचों की उपलब्धता, दवाओं और उपकरणों की आपूर्ति, तथा अस्पतालों में उच्च स्तरीय साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने सभी चिकित्सा इकाइयों के सीएमएस, फार्मासिस्ट, एएनएम और सफाई कर्मियों को समर्पित भाव से सेवा करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही सभी सीएमओ को निर्देश दिए गए कि वे प्रत्येक माह कम से कम दो स्थलीय भ्रमण कर आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भौतिक सत्यापन करें।
निरीक्षण रिपोर्ट की समीक्षा, फीडबैक में अधिकांश लाभार्थी संतुष्ट
बैठक में राज्य स्तर से गठित दलों द्वारा दोनों मंडलों के जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेज, सीएचसी, पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर/उपकेंद्रों के निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट की भी समीक्षा की गई। रिपोर्ट में दवाओं की उपलब्धता, पेयजल, सेवा गुणवत्ता, मानव संसाधन, तीमारदारों की सुविधाएं और साफ-सफाई सहित लाभार्थियों से प्राप्त फीडबैक शामिल था। फीडबैक में अधिकांश लाभार्थियों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर संतुष्टि जताई।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिन जनपदों में शिकायतें और कमियां मिली हैं, वहां के मुख्य चिकित्साधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तय समय-सीमा में सुधार सुनिश्चित करें। साथ ही चेतावनी दी गई कि पुनः निरीक्षण में कमियां मिलने या अनुपालन न होने पर संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।
बैठक में विशेष सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य धीरेंद्र सिंह सचान, महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. रतन पाल सिंह सुमन, महानिदेशक परिवार कल्याण डॉ. पवन कुमार अरुण, महानिदेशक प्रशिक्षण डॉ. एचडी अग्रवाल, निदेशक राष्ट्रीय कार्यक्रम डॉ. शोभा मिश्रा, महाप्रबंधक एम एंड ई अनामिका मिश्रा सहित राज्य और मंडल स्तर के अधिकारी भौतिक एवं वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।
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