भारत और मालदीव का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. सोशल मीडिया पर भारत के कई नामी लोग अब लक्षद्वीप के समर्थन में उतर आए हैं. अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या मालदीव भारत की नाराजगी झेल सकेगा. ये सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि मालदीव भारत से कई हजार करोड़ रुपए का सामान इंपोर्ट करता है.
भारत से नजदीक होने के कारण मालदीव के लिए भारत से सामान लेना सस्ता भी है और सुगम भी. जबकि भारत मालदीव को कुछ करोड़ का ही सामान इंपोर्ट करता है. दोनों देशों के बीच के ट्रेड को देखा जाए तो यह आंकड़ा 500 मिलियन डॉलर है, जो भारतीय रुपए में करीब 4200 करोड़ है.
अगर भारत मालदीव को सामान एक्सपोर्ट करना बंद कर दें. तो मालदीव का क्या होगा? अगर भारत के लोग भारत जाना छोड़ दे तो इस छोटे से देश की इकोनॉमी पर क्या असर पड़ेगा? इस समय ये काफी अहम सवाल खड़े हो गए हैं?
आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर मालदीव के लिए भारत क्यों जरूरी बन गया है.
मालदीव की इकोनॉमी के लिए भारत क्यों जरूरी है?
इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि मालदीव जितने रुपए का इंपोर्ट भारत से करता है अगर वो चीन या किसी दूसरे देश से करें तो उसका बिल आसमान में पहुंच जाएगा. मालदीव टूरिज्म में भारत की हिस्सेदारी 15 से 20 फीसदी है.
भारत और मालदीव का ट्रेड
भारत 2022 में मालदीव के दूसरे सबसे बड़े ट्रेड पार्टपर के रूप उभरा था. मालदीव से भारतीय इंपोर्ट में मुख्य रूप से स्क्रैप मेटल्स शामिल हैं, जबकि मालदीव को भारतीय एक्सपोर्ट में कई प्रकार के इंजीनियरिंग और इंडस्ट्रीयल प्रोडक्ट्स जैसे ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल्स, रडार कंपोनेंट, रॉक बोल्डर, सीमेंट और कृषि उत्पाद जैसे चावल, मसाले, फल, सब्जियां और पोल्ट्री उत्पाद आदि शामिल हैं। खास बात तो ये है कि दोनों देशों के बीच 2013 से 2022 तक यानी दस साल में ट्रेड करीब 3 गुना तक बढ़ा है. मालदीव कस्टम सर्विस की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2013 में मालदीव और भारत के बीच ट्रेड 156.30 मिलियन डॉलर का था जो साल 2022 में बढ़कर 501.82 मिलियन डॉलर का हो गया. सितंबर 2023 तक यही ट्रेड दोनों देशों के बीच 416.06 मिलियन डॉलर का हो चुका है.
मालदीव में एसबीआई की भूमिका
भारत के सबसे बड़े बैंक मालदीव की आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा रही है. भारतीय स्टेट बैंक फरवरी 1974 से द्वीप रिसॉर्ट्स, मरीन प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट और बिजनेस इंटरप्राइजेज को बढ़ावा देने के लिए लोन देकर मालदीव के इकोनॉमिक ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. नवंबर 2022 में मालदीव के सामने आने वाली आर्थिक चुनौतियों के बीच मालदीव सरकार के अनुरोध पर भारत ने 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता की थी. यह वित्तीय सहायता एसबीआई, माले द्वारा मालदीव के सरकारी घरेलू टी-बॉन्ड में सदस्यता के माध्यम से हुई थी. भारत ने इस मदद के लिए एसबीआई को सॉवरेन गारंटी दी थी.
दिसंबर 2022 में आरबीआई ने सार्क करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क के तहत मालदीव मॉनेटरी अथॉरिटी (एमएमए) के साथ एक करेंसी स्वैप एग्रीमेंट पर साइन किए थे. इस प्रकार, एमएमए को आरबीआई से अधिकतम 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक कई किश्तों में विड्रॉल करने में सक्षम बनाया.
भारत की मालदीव टूरिज्म में अहम भूमिका
मालदीव की इकोनॉमी यहां टूरिज्म सेक्टर पर काफी डिपेंड है. जो फॉरेन करेंसी इनकम और सरकारी रेवेन्यू का प्रमुख सोर्स है. टूरिज्म डायरेक्टली मालदीव की जीडीपी का लगभग चौथाई हिस्सा है और इनडायरेक्टली जीडीपी का बहुत बड़ा हिस्सा है. इसी टूरिज्म की वजह से मालदीव में काफी रोजगार पैदा होता है. मालदीव के लोगों के लिए रोजगार के अवसरों में पर्यटन का योगदान एक तिहाई से अधिक है और यदि रिलेटिड सेक्टर को शामिल कर लिया जाए, तो कुल रोजगार (डायरेक्ट और इनडायरेक्ट) में टूरिज्म सेक्टर का योगदान लगभग 70 फीसदी तक बढ़ जाएगा.
2018 में भारतीय पर्यटकों की हिस्सेदारी 6.1 फीसदी थी. उस साल मालदीव में भारत से जाने वाले लोगों की संख्या 90,474 थी. 2019 में भारतीय 2018 की तुलना में लगभग दोगुनी संख्या में पहुंचे और इसके साथ ही मालदीव में भारतीय पर्यटकों की हिस्सेदारी दूसरे पायदान पर पहुंच गई.
महामारी से प्रभावित 2020 में भारत मालदीव के लिए सबसे बड़ा बाजार था, जिसमें लगभग 63,000 भारतीयों ने मालदीव का दौरा किया था. 2021 और 2022 में भारत क्रमशः 2.91 लाख और 2.41 लाख से अधिक भारतीय पर्यटकों के आगमन और 23 फीसदी और 14.4 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ टॉप पर बना रहा. 13 दिसंबर 2023 तक 193,693 भारतीय पर्यटक मालदीव पहुंच चुके हैं.
– एजेंसी
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