Jhulelal Jayanti 2026 Agra: “सिंधियत की सतरंगी शाम” बनेगी देशभर के सिंधी समाज के लिए प्रेरणा का केंद्र

RELIGION/ CULTURE

 

 सिंधियत की सतरंगी शाम: 13 अप्रैल को आगरा में गूंजेगा संस्कृति, भक्ति और एकता का विराट संगम

 बैठक में हुआ भव्य सम्मान समारोह

आगरा। सिंधी सेंट्रल पंचायत द्वारा 30 मार्च सोमवार को होटल लाल्स इन, दरेसी में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में विभिन्न पूज्य मोहल्ला पंचायतों के पदाधिकारी एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की प्रभावशाली उपस्थिति रही। माहौल केवल औपचारिक नहीं, बल्कि भावनाओं और गर्व से भरा हुआ था।
इस अवसर पर झूलेलाल जयंती के अवसर पर आयोजित अभूतपूर्व वाहन रैली एवं शोभा यात्रा को सफल बनाने वाले सभी पदाधिकारियों और समर्पित सहयोगियों को सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर चेहरों पर जो संतोष और आत्मीयता थी, वह इस बात का प्रमाण थी कि समाज सेवा आज भी जिंदा है।

 13 अप्रैल को सजेगी “सिंधियत की सतरंगी शाम”

बैठक में आगामी 13 अप्रैल (सोमवार) को होने वाले भव्य आयोजन को लेकर विस्तृत रणनीति बनाई गई। यह कार्यक्रम सिंधी सेंट्रल पंचायत एवं राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में केंद्रीय हिंदी संस्थान के सहयोग से आयोजित होगा।
यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक महाकुंभ होगा, जो सिंधी भाषा दिवस, झूलेलाल जयंती एवं संत कंवरराम जयंती के पावन अवसर पर ‘सिंधियत की सतरंगी शाम’ के रूप में मनाया जाएगा। हर रंग में संस्कृति, हर स्वर में भक्ति और हर क्षण में एकता की झलक देखने को मिलेगी।

Om Prakash chauthwani

आयोजन की कमान अनुभवी हाथों में

इस भव्य मेले की जिम्मेदारी अनुभवी और समर्पित टीम को सौंपी गई है। मेले के संयोजक राज कोठारी बनाए गए हैं, जबकि उप संयोजक ओमप्रकाश चोथवानी और महामंत्री हरीश टहिल्यानी को महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है।
यह टीम न केवल आयोजन को सफल बनाएगी, बल्कि इसे यादगार बनाने का भी पूरा दम रखती है।

Harish tahalyani

 विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इंदौर से सांसद शंकर लालवानी एवं विधायक भगवान दास सबनानी की उपस्थिति प्रस्तावित है।
बैठक में संत कंवरराम के जीवन और उनके संदेशों पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने प्रेम, सेवा और मानवता का जो दीप जलाया, वह आज भी समाज के मार्गदर्शन का प्रकाश स्तंभ बना हुआ है। उनके भजन आज भी लोगों के हृदय में आध्यात्मिक चेतना जगाते हैं।

Raj Kothari

 भाषा, संस्कृति और परंपरा का संरक्षण

अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश सोनी ने बताया कि यह आयोजन सिंधी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से किया जा रहा है, जो भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल है।
कार्यक्रम में पारंपरिक सिंधी वेशभूषा, रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण जैसे विविध आयाम शामिल होंगे। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा।

 एकता, सेवा और सद्भावना का प्रतीक आयोजन

कुल मिलाकर यह आयोजन सिंधी समाज की एकता, सेवा, संस्कृति और सद्भावना का जीवंत प्रतीक बनेगा। यहां श्रद्धालु भक्ति संगीत के माध्यम से आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करेंगे और समाज की सामूहिक शक्ति का एहसास करेंगे।

प्रमुख उपस्थिति

चन्द्र प्रकाश सोनी, हेमंत भोजवानी, घनश्याम दास देवनानी, परमानन्द अतवानी, नन्दलाल आयलानी, एस के वीरानी, श्याम भोजवानी, मेघराज दियालानी, राज कोठारी, ओमप्रकाश चोथवानी, हरीश टहिल्यानी, जगदीश डोडानी, दौलत खूबनानी, जेठानन्द पुरसनानी, भोजराज लालवानी, अशोक पारवानी, पुरुषोत्तम लछवानी, भजन लाल, लालचंद मोटवानी, सुंदर चेतवानी, कन्हैया लाल मानवानी, कमल जुमानी, प्रदीप बनवारी, कन्हैया सोनी, पुनीत कालरा, मोहन सोनी, नथू सोनी, दौलत राम मोड़वानी, नरेश लखवानी, शंकर लाल आस्वानी, नीरज सोनी, अशोक चावला, अशोक कोडवानी, उमेश पेरवानी, हरीश कन्हैया सोनी, राजा सुखनानी, हर्ष आस्नानी, भीष्म लालवानी, दीपक आत्वानी, सुरेश चोतवानी, मुकेश साहनी आदि उपस्थित रहे।

 संपादकीय

जब समाज बिखराव के दौर से गुजर रहा हो, तब कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो चुपचाप जोड़ने का काम करते हैं—और यही असली नेतृत्व होता है। सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश सोनी आज उसी नेतृत्व के प्रतीक बनकर उभरे हैं।

उनकी कार्यशैली में केवल आयोजन नहीं, बल्कि दृष्टि दिखाई देती है। वह जानते हैं कि संस्कृति केवल मंचों से नहीं बचती, बल्कि लोगों के दिलों में जिंदा रखनी पड़ती है। जिस तरह से उन्होंने सिंधी समाज को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया है, वह काबिले-तारीफ ही नहीं, बल्कि अनुकरणीय है।

आज के समय में जब युवा अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे आयोजनों के माध्यम से उन्हें अपनी पहचान से जोड़ना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन चन्द्र प्रकाश सोनी ने इसे एक मिशन बना लिया है—और यही उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करता है।

सीधे शब्दों में कहें तो, यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन है—और इसके सूत्रधार हैं चन्द्र प्रकाश सोनी। अगर इसी तरह उनकी ऊर्जा और समर्पण बना रहा, तो आने वाले समय में सिंधी समाज की एकता और संस्कृति नई ऊंचाइयों को छुएगी।

डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

 

Dr. Bhanu Pratap Singh