आगरा में घी कारोबारियों पर आयकर विभाग की सर्जिकल स्ट्राइक, 131 घंटे की जांच में विदेशी निवेश और 700 करोड़ की टैक्स चोरी उजागर का दावा

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भोले बाबा–दाऊजी समेत 5 ग्रुप पर शिकंजा, 5 करोड़ नकद और 18 करोड़ के जेवर जब्त, मिलावट की पुष्टि

आगरा। आगरा में घी निर्माण और डेयरी उत्पादों के बड़े कारोबारियों पर आयकर विभाग की पांच दिन चली ऐतिहासिक कार्रवाई मंगलवार को पूरी हो गई। 15 जनवरी से शुरू हुई इस सर्च और सर्वे की कार्रवाई में भोले बाबा, दाऊजी समेत पांच प्रमुख ग्रुप आयकर विभाग के रडार पर रहे।

विभाग का दावा है कि लगातार 131 घंटे चली जांच में 700 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी, बोगस बिलिंग, आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) हेराफेरी, अघोषित नकद लेन-देन और विदेशी निवेश छिपाने से जुड़े ठोस साक्ष्य हाथ लगे हैं।

35 से ज्यादा ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी

आयकर विभाग ने 200 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम के साथ आगरा समेत कई राज्यों में एक साथ कार्रवाई की। छापेमारी दिल्ली, आगरा, धौलपुर, कानपुर देहात, अलीगढ़, सिरसागंज, दौसा, बीकानेर और जोधपुर सहित विभिन्न शहरों में 35 से अधिक परिसरों पर की गई।

अब सर्च ऑपरेशन पूरा होने के बाद विभाग हर ग्रुप के अलग-अलग टैक्स आकलन और दस्तावेजों की जांच में जुट गया है। माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर भारी टैक्स, ब्याज और पेनल्टी तय की जाएगी।

5 करोड़ नकद, 18 करोड़ के जेवर जब्त, 16 लॉकर सील

जांच के दौरान आयकर विभाग को बड़ी मात्रा में नकदी और संपत्ति के सबूत मिले हैं। 5 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए, जिसका खातों में कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिला। 18 करोड़ रुपये से अधिक के जेवरात पाए गए, तय सीमा से अधिक होने पर इन्हें जब्त किया गया। 16 बैंक लॉकर सील किए गए हैं। हुंडी, नकद भुगतान और संदिग्ध लेन-देन से जुड़ी पर्चियां और दस्तावेज भी कब्जे में लिए गए हैं, जिनका रिकॉर्ड से मिलान कराया जा रहा है।

बोगस बिलिंग और आईटीसी हेराफेरी के संकेत

आयकर विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घी कारोबार से जुड़ी कुछ फर्मों ने बिना रिकॉर्ड के खरीद-बिक्री की। कागजों में माल की खरीद दिखाकर वास्तविक स्टॉक और परिवहन में अंतर पाया गया।

जांच में फर्जी बिलिंग के जरिए टैक्स बचाने, साथ ही आईटीसी में बड़े स्तर पर हेराफेरी के संकेत मिले हैं।

दाऊजी ग्रुप के घी में मिलावट की पुष्टि, FSSAI रिपोर्ट में खुलासा

कार्रवाई का सबसे गंभीर पहलू घी में मिलावट से जुड़ा बताया जा रहा है। दाऊजी ग्रुप के घी के सैंपल हैदराबाद स्थित केंद्रीय लैब भेजे गए थे। FSSAI लैब रिपोर्ट में घी में मिलावट की स्पष्ट पुष्टि होने की बात सामने आई है।

बताया गया है कि दौसा और सिरसागंज स्थित प्लांट में भी मिलावटी घी से जुड़े सबूत मिले हैं। आयकर विभाग ने इस संबंध में रिपोर्ट FSSAI और खाद्य विभाग को सौंप दी है, जिससे आगे अलग स्तर पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, लागत कम करने के लिए मिलावटी घी तैयार किया गया और कागजों में शुद्ध घी की ऊंची कीमत दिखाकर मुनाफा बढ़ाया गया। इससे एक तरफ टैक्स चोरी, दूसरी तरफ उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी का मामला भी बनता है।

जमीन सौदों और अघोषित विदेशी निवेश की भी जांच

जांच के दौरान 2019 से 2025 के बीच जमीनों में बड़े निवेश से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। बैनामों में नकद भुगतान और रियल एस्टेट लेन-देन की परतें खंगाली जा रही हैं।

इसके अलावा यूगांडा में अघोषित निवेश से जुड़े सबूत मिलने का भी दावा किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए CBDT स्तर पर अंतर-एजेंसी समन्वय शुरू होने की बात कही जा रही है।

आगे क्या कार्रवाई होगी?

आयकर विभाग के अनुसार, सर्च के बाद अब दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की गहन जांच होगी। इसके आधार पर टैक्स निर्धारण, भारी पेनल्टी और ब्याज, टैक्स चोरी के मामलों में कानूनी कार्रवाई, मिलावट के मामलों में FSSAI और खाद्य विभाग की अलग कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

आयकर विभाग की इस कार्रवाई को आगरा के घी और डेयरी कारोबार में अब तक की सबसे बड़ी जांच में से एक माना जा रहा है।

Dr. Bhanu Pratap Singh