आगरा मतांतरण गिरोह के पीछे ‘हिज्ब-उल-तहरीर’ का हाथ? अयान जावेद से पूछताछ में खुलेंगे विदेशी फंडिंग के राज

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आगरा। ताजनगरी के थाना सदर क्षेत्र की दो सगी बहनों के मतांतरण मामले ने अब एक बेहद गंभीर और अंतरराष्ट्रीय मोड़ ले लिया है। इस मामले की जांच की आंच अब प्रतिबंधित आतंकी संगठनों तक पहुँच गई है। पुलिस ने झारखंड की रांची सेंट्रल जेल में बंद आतंकी संदिग्ध अयान जावेद को बी-वारंट पर आगरा लाकर एक दिन की कस्टडी रिमांड पर लिया है। अयान से पूछताछ में इस गिरोह के देश-विदेश में फैले नेटवर्क और टेरर फंडिंग की परतें खुलने की उम्मीद है।

​कौन है अयान जावेद और क्या है उसका ‘लिंक’?

अयान जावेद को अप्रैल 2025 में झारखंड एटीएस (ATS) ने धनबाद से गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि अयान का संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘हिज्ब-उल-तहरीर’ और ‘अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS) से है। वह सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों के लिए उकसाने का आरोपी है। आगरा पुलिस को विवेचना के दौरान साक्ष्य मिले हैं कि मतांतरण गिरोह के तार अयान से जुड़े हुए थे।

​कोलकाता से शुरू हुई थी जांच की कड़ी

​बता दें कि जून 2025 में आगरा के सदर क्षेत्र की दो सगी बहनों को पुलिस ने कोलकाता के तपसिया इलाके से बरामद किया था। इस मामले में पुलिस अब तक दिल्ली के अब्दुल रहमान, गोवा की आयशा और आगरा के रहमान कुरैशी को जेल भेज चुकी है। जांच में पता चला है कि यह गिरोह न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि उत्तराखंड, हरियाणा और पश्चिम बंगाल समेत छह राज्यों में सक्रिय था।

​200 से अधिक कॉल और विदेशी फंडिंग का शक

​पुलिस की रडार पर देहरादून की एक युवती भी है, जिससे अयान जावेद की 200 से अधिक बार बातचीत हुई थी। डीसीपी सिटी आदित्य के अनुसार, अयान से पूछताछ का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या मतांतरण गिरोह को आतंकी संगठनों से सीधे निर्देश या फंडिंग मिल रही थी।

पुलिस को अंदेशा है कि इस नेटवर्क को विदेशों से भारी मात्रा में धन मुहैया कराया जा रहा था ताकि बड़े स्तर पर मतांतरण के जरिए कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया जा सके।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अयान जावेद के आगरा आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट पर हैं। पूछताछ के दौरान गिरोह के उन ‘स्लीपर सेल’ या गुप्त संपर्कों के नाम सामने आ सकते हैं जो अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। आगरा पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए अन्य राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है।

Dr. Bhanu Pratap Singh