हिंदी केवल भाषा नहीं, राष्ट्र की आत्मा है: विश्व हिंदी दिवस पर आगरा में गूंजा संस्कारों का स्वर

साहित्य

 

 

विश्व हिंदी दिवस: भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीयता और जीवन मूल्यों की प्रतीक है हिंदी

हिंदी बोलना भी देशभक्ति है: आगरा में विश्व हिंदी दिवस पर साहित्यिक मंथन

देवनागरी की बिंदी भी बोलती है: विश्व हिंदी दिवस पर हिंदी की वैश्विक शक्ति पर संगोष्ठी

अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारती ने संगोष्ठी का किया आयोजन

साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन

लाइव स्टोरी टाइम
आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत। वायु विहार पर स्थित राज राजेश्वरी रिसोर्ट में शनिवार को विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारती द्वारा एक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार और विशिष्ट अतिथि ब्रज प्रांत अध्यक्ष डॉ. अनूप शर्मा ने किया। दोनों अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित और माल्यार्पण कर कार्यक्रम की विधिपूर्वक शुरुआत की।

हिंदी भारतीय संस्कृति की प्रतीक

समारोह के मुख्य अतिथि हिन्दी साहित्य भारती के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डॉ0 देवी सिंह नरवार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिन्दी भारतीय संस्कृति, संस्कार, राष्ट्रीयता और जीवन मूल्यों की प्रतीक है। हिन्दी विश्व की सबसे समृद्ध, सशक्त भाषा है। विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिन्दी तीसरे स्थान पर है हिन्दी भाषा की देवनागरी लिपि की यह विशेषता है कि जो लिखते हैं, वही पढ़ते हैं और वही बोलते हैं हिन्दी में अपार शब्द भण्डार है। इस भाषा में एक शब्द के अनेक पर्यायवाची शब्द है और एक ही शब्द के अनेक अनेकार्थवाची भी हैं। हिन्दी का प्रचुर साहित्य भण्डार है। हिन्दी में मनोभावों की अभिव्यक्ति की सशक्त, अद्धभुत तथा सुदृढ़ क्षमता है कितने आश्चर्य की बात है कि अंग्रेजी में तमाम अक्षर साइलेन्ट हैं और हिन्दी की बिन्दी भी बोलती है हिन्दी विश्व की सबसे मधुर भाषा है इसलिये हमंे दैनिक जीवन में अधिक से अधिक हिन्दी का प्रयोग करना चाहिए यह भी देश-भक्ति का एक प्रकार है।

मंचासीन अतिथि।

हिंदी व्याकरण पर गहरी चिंता

डॉ0 नरवार ने गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए बताया कि आज छात्रों को हिन्दी भाषा के व्याकरण का ठीक से ज्ञान नहीं कराया जाता है। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए डॉ0 नरवार ने 11 वर्ष से 14 वर्ष आयु के छात्रों को संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण, कर्ता, कर्म मुहावरे, लोकोक्तियाँ, पर्यायवाची शब्द, विलोमशब्द, विराम, अर्द्धविराम, वर्तनी आदि का ज्ञान कराने के लिए संस्था को कार्यशाला का आयोजित करना चाहिए।

हिंदी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी

डॉ. अनूप शर्मा ने कहा कि हिंदी सिर्फ हमारी मातृभाषा नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और सभ्यता की पहचान भी है। इसके प्रभाव को बढ़ाने के लिए समाज के हर वर्ग को इसे अपनाना आवश्यक है। अध्यक्षता जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चाहर और संचालन संरक्षक राजवीर सिंह चाहर द्वारा किया गया। इस मौके पर सुरेश चाहर, एड. रवि चौधरी, नीरज ठैनुआ, नरेश शर्मा, सत्यवीर सिंह, दीपक सिंह, अनिल शर्मा, राहुल भूषण शर्मा, आकाश चौधरी, नरेंद्र चौधरी, सुधीर कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।

मंचासीन अतिथिगण। 

संपादकीय

विश्व हिंदी दिवस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्मबोध का अवसर है। हिंदी हमारी पहचान, हमारी चेतना और हमारी आत्मा है। जब भाषा कमजोर होती है, तो संस्कृति भी कमजोर पड़ती है।

आज चिंता का विषय यह है कि नई पीढ़ी हिंदी को बोल तो रही है, पर समझ और व्याकरण से दूर होती जा रही है। डॉ. देवी सिंह नरवार की चिंता पूरे समाज की चिंता है। यदि विद्यालय, साहित्यिक संस्थाएं और अभिभावक मिलकर प्रयास करें, तो हिंदी का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।

डॉ. अनूप शर्मा का कथन हमें याद दिलाता है कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। हिंदी को अपनाना, उसका सम्मान करना और उसे अगली पीढ़ी तक पहुँचाना ही सच्ची राष्ट्रसेवा है।

आज आवश्यकता है कि हम हिंदी दिवस मनाने तक सीमित न रहें, बल्कि हिंदी को अपने जीवन व्यवहार, लेखन, सोच और संकल्प का हिस्सा बनाएं। यही हिंदी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

 

Dr. Bhanu Pratap Singh