Agra, Uttar Pradesh, India. अनेक विश्व रिकॉर्ड धारक और प्रसिद्ध होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. पार्थ सारथी शर्मा ने सभी चिकित्सकों की वेदना को चिकित्सकों के समक्ष प्रस्तुत किया तो सब हैरान रह गए। आगरा विकास प्राधिकरण के सभागार में डाबर कंपनी द्वारा तनाव पर आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा- तनाव सिर्फ मरीजों को ही नहीं होता है, सबको होता है। डॉक्टर्स को भी होता है। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी भरे लहजे में कहा- सरकारी विभाग डॉक्टरों को सॉफ्ट टारगेट न बनाएं। इन्हें दुधारु गाय समझेंगे तो मुश्किल हो जाएगी। डॉक्टर्स की सेवाओं का सम्मान कीजिए।
उन्होंने कहा- कल मुझसे एक रेडियोलॉजिस्ट ने संपर्क किया और कहा कि बहुत परेशान हूँ। आवास विकास परिषद से नोटिस आ गया है कि आप आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां कर रहे हैं, जबकि मेरा नर्सिंग होम नहीं है। इसके बाद मैंने आवास विकास परिषद के अधिकारी से बात करके मामले को निपटाया। ये ममला निपटा ही था कि फिर फोन आ गया कि मानसिक वेदना का शिकार हूँ। मैंने पूछा कि अब क्या हो गया तो बताया कि अब अग्निशमन विभाग से नोटिस आ गया है। आवास विकास परिषद के नोटिस की प्रति फायर विभाग को भी दी गई है। फायर विभाग ने एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) दिखाने को कहा है। फिर मेरे कहने पर डॉक्टर से ऑनलाइन आवेदन का स्क्रीन शॉट लिया तो पता चला कि फायर सिलेंडर की रसीद दिखानी होती है, न कि एनओसी लेनी होती है। मैंने फायर विभाग के इंस्पेक्टर को फोन किया और पूछा कि एनओसी क्यों मांग रहे हो। तब उसने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है, किसी ने शिकायत की थी। मैंने कहा कि परेशान मत करो डॉक्टरों को।
डॉ. पार्थसारथी शर्मा ने कहा– कोविड काल में डॉक्टर विषमय परिस्थिति में सेवाएं दे रहे हैं। यहां विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बैठे हुए हैं। उन्हें अवगत कराना है कि चिकित्सक देवतुल्य होते हैं। कोरोनावायरस के कारण जब सब घर में दुबके बैठे थे, तब सिर्फ डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे थे। मैंने जो केस निपटाया है, उस आवास विकास परिषद के अधीन तो सिर्फ पांच फीसदी क्षेत्र भी नहीं है। एडीए के अधीन तो पूरा आगरा है। एडीए पूरे आगरा का मालिक है। वीसी एडीए अपनी अधीनस्थों से कहें कि डॉक्टरों को एक साल तक कोई नोटिस न जारी करें। नोटिस से डॉक्टर फिर तनाव में आ जाएंगे। दो महीने के लिए जब सेवाएं बंद थीं, तब आगरा के अनेक लोगों ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया था। इसलिए डॉक्टर्स के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर अपनाएं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि कारखाना खोलने पर आयकर, सीजीएसटी, जीएसटी के लिए कोई नहीं पहुंचेगा। शुरुआत में कमियां रहती हैं। आप बार-बार परेशान करेंगे तो कोई कारखाना क्यों खोलेगा और क्यों रोजगार देगा। आप कारखाने को रफ्तार में आने से पहले ही गला घोंट देते हैं। हो सकता है कम वेतन देकर कर्मचारी रख रहा हो लेकिन यह समय की आवश्यकता है। डॉक्टर को क्लीनिक खोलने के लिए नगर निगम, फायर विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाणपत्र, बायो मेडिकल वेस्ट सर्टिफिकेट लेना होता है। अब कोरोना काल में मरीजों का भी रिकॉर्ड रखना पड़ रहा है। इसके लिए अलग से स्टाफ चाहिए। इसलिए आगरा विकास प्राधिकरण चिकित्सकों को तनाव में न डाले। चिकित्सक को तनाव होगा तो मरीज का बेहतर इलाज कैसे करेगा?
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