रेलवे में ‘आरपीएफ बनाम कर्मचारी’ का महासंग्राम: डीएसएस से मारपीट के विरोध में 30 शहरों में सड़क पर उतरे रेलकर्मी, सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय समाचार

आगरा। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट (डीएसएस) नरेंद्र चाहर के साथ हुई कथित मारपीट और उन्हें प्लेटफॉर्म पर घसीटने का मामला अब एक राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। इस घटना से उपजा आक्रोश रेलवे के भीतर इस कदर फैल चुका है कि मंगलवार को आगरा, मथुरा, कोटा, झांसी और दिल्ली समेत देशभर के करीब 30 प्रमुख स्टेशनों पर रेलवे कर्मचारियों ने आरपीएफ की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। रेलकर्मियों ने एक सुर में दोषी आरपीएफ जवानों की तत्काल गिरफ्तारी और उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

सुबह लगभग 10:30 बजे आगरा स्थित डीआरएम कार्यालय के बाहर सैकड़ों की तादाद में रेल कर्मचारी, स्टेशन मास्टर्स और संगठन के पदाधिकारी एकजुट हुए। प्रदर्शन में महिला कर्मचारियों की भागीदारी ने इस आंदोलन को और अधिक मजबूती दी। कार्यालय के बाहर का माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने “आरपीएफ मुर्दाबाद” और “गुंडागर्दी बंद करो” के गगनभेदी नारे लगाने शुरू किए। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात आरपीएफ जवानों और प्रदर्शनकारी कर्मचारियों के बीच कई बार तीखी बहस हुई, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप और समझाइश के कारण स्थिति नियंत्रण में रही।

​कर्मचारियों का आरोप: बेलगाम हुई आरपीएफ

प्रदर्शनकारी रेलकर्मियों का कहना है कि यह मात्र एक घटना नहीं है, बल्कि आरपीएफ के कुछ जवानों के अभद्र और अहंकारी व्यवहार का परिणाम है। कर्मचारियों का आरोप है कि आरपीएफ के जवान आए दिन यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के साथ अमर्यादित व्यवहार करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस बार दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो रेलवे परिसर में अराजकता बढ़ जाएगी।​

क्या है विवाद की जड़?

उल्लेखनीय है कि रविवार को आगरा कैंट स्टेशन पर एक यात्री के घायल होने के बाद ट्रेन को रोकने के निर्णय को लेकर डीएसएस नरेंद्र चाहर और आरपीएफ जवानों के बीच विवाद शुरू हुआ था। आरोप है कि विवाद इतना बढ़ा कि जवानों ने श्री चाहर के साथ मारपीट की और उन्हें प्लेटफॉर्म पर घसीटा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देशभर के रेलवे कर्मचारी संगठनों में भारी नाराजगी है। जो कर्मचारी आगरा नहीं पहुंच सके, उन्होंने अपने-अपने कार्यक्षेत्रों पर प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया है।

रेलवे प्रशासन की प्राथमिक कार्रवाई

घटना की गंभीरता को भांपते हुए रेलवे प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए आरपीएफ के एएसआई मेघराज मीणा, बालकिशन और कॉन्स्टेबल बदन सिंह व जितेंद्र को निलंबित कर दिया है। फिलहाल, उच्चाधिकारियों की निगरानी में मामले की गहन जांच जारी है। राहत की बात यह है कि इन विरोध-प्रदर्शनों का रेल यातायात पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ा है और ट्रेनों का संचालन पूरी तरह सामान्य रूप से जारी है। प्रशासन अब मामले को शांत करने और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर विचार करने के लिए प्रयासरत है।

Dr. Bhanu Pratap Singh