आगरा: ‘हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना चाहिए, यह मेरी या फिर मेरे परिवार की नही बल्कि भारतवासियों की इच्छा और मांग है लेकिन सरकार ने आज तक इस मांग को अनसुना किया हुआ है।’ यह कहना था मेजर ध्यानचंद के सुपुत्र अर्जुन अवार्ड से सम्मानित अशोक ध्यानचंद का।
सांसद खेल स्पर्धा में पहुँचे थे अशोक ध्यानचंद
शुक्रवार शाम को अर्जुन अवार्डी अशोक ध्यानचंद एक्लव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में चल रही सांसद खेल स्पर्धा में पहुँचे थे। उनका स्वागत सत्कार केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने किया। इस दौरान अशोक ध्यानचंद ने सांसद खेल स्पर्धा के अंतर्गत चल रही हॉकी प्रतियोगिता में पहुंचकर हॉकी खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनकी हौसला अफजाई की। उन्होंने सांसद खेल स्पर्धा के आयोजन को खेल भावनाओं को बढ़ाने का एक वृहद आयोजन बताया। उनका कहना था कि इसके माध्यम से भी खिलाड़ियों को अपनी खेल प्रतिभा दिखाने और खेलों को बढ़ावा मिलेगा।
मेजर ध्यानचंद को क्यों नहीं दिया भारत रत्न
अर्जुन अवार्डी अशोक ध्यानचंद ने कहा कि पिताजी मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न मिले, यह मांग वर्षों से चल रही है लेकिन पूरी अब तक नहीं हुई। यह सरकार बताए कि इतने महान खिलाड़ी को यह सम्मान क्यों नहीं दे पा रही। क्या उनका प्रदर्शन खराब था? क्या वो देश के लिए नहीं खेले? क्या उन्होंने हॉकी को विश्व में पहचान नहीं दिलाई? क्या देश का मान नहीं बढ़ाया? ये सवाल आने वाली पीढिय़ां भी सरकारों से पूछती रहेंगी।
बदल रही है हॉकी
अशोक ध्यान चंद ने देश में हॉकी की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि हॉकी का पैटर्न लगातार बदल रहा है। पहले हॉकी आत्मा की तरह थी। घास के मैदान पर खेली जाने वाली हॉकी को तब देश के सम्मान से जोड़कर देख जाता था। मगर, अब यह महज शरीर बनकर रह गई है। इसमें गरीबों और संसाधन विहीन खिलाडिय़ों के लिए जगह बहुत कम है। अब हॉकी एस्ट्रोटर्फ पर खेली जाती है। जो हर हॉकी खिलाड़ी के पहुँच से दूर है। जिसे खेलने के लिए हजारों रुपये के जूते और बेहतर स्टीक चाहिए, जो तमाम खिलाड़ी नहीं जुटा सकते। बस सरकार इस ओर ध्यान दे जिससे हर हॉकी खिलाड़ी को हॉकी खेलने को मिले और वह बेहतर खेल प्रदर्शन कर सके। अगर वे खेलेंगे तो ही बेहतर खिलाड़ी भारत को मिलेंगे।
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