मुंगेर में ‘एजुकेट गर्ल्स’ ने मनाया 18वाँ स्थापना दिवस; नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की बेटियों ने बाधाएं तोड़ हासिल की डिग्री, DM ने दी थपकी

PRESS RELEASE

मुंगेर (बिहार): शिक्षा की अलख जगाने वाली संस्था ‘एजुकेट गर्ल्स’ ने बिहार के मुंगेर में अपने 18वें स्थापना दिवस को बेहद खास अंदाज में मनाया। इस अवसर पर 200 से अधिक प्रगति शिक्षार्थियों (प्रेरकों) के लिए भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उन बेटियों के संघर्ष और सफलता को सम्मानित किया गया, जिन्होंने नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को मात देकर शिक्षा की मुख्यधारा में वापसी की है।

भीमबांध जैसे दुर्गम क्षेत्रों की बेटियों ने लहराया परचम

​समारोह में विशेष रूप से भीमबांध जैसे नक्सल प्रभावित और वंचित क्षेत्रों से आईं किशोरियों और युवा महिलाओं को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि एवं जिला मजिस्ट्रेट (DM) निखिल धनराज निप्पाणिकार (IAS) ने इन बेटियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस दौरान संस्था की सीईओ गायत्री नायर लोबो और संचालन निदेशक विक्रम सिंह सोलंकी भी मौजूद रहे।

​”प्रशासन और नागरिक समाज का सहयोग जरूरी”: डीएम निखिल धनराज

​सभा को संबोधित करते हुए डीएम निखिल धनराज निप्पाणिकार ने कहा, “एजुकेट गर्ल्स जैसी संस्थाएं दूरस्थ क्षेत्रों में नामांकन और सीखने के स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हर लड़की को शिक्षा मिले, इसके लिए प्रशासन, जीविका, शिक्षा विभाग और नागरिक समाज के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है।” उन्होंने कठिन क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने के लिए संस्था के प्रयासों की सराहना की।

बिहार में 2 लाख लड़कियों की हुई ‘घर वापसी’

​एजुकेट गर्ल्स की सीईओ गायत्री नायर लोबो ने संस्था के विजन को साझा करते हुए बताया कि ​2022 से अब तक बिहार में लगभग 2 लाख लड़कियों को फिर से शिक्षा से जोड़ा गया है। जिनमे लगभग 9,000 किशोरियों को माध्यमिक शिक्षा (10वीं) पूरी करने में सहयोग दिया गया।भविष्य के लिए में संस्था 2035 तक 1 करोड़ शिक्षार्थियों तक पहुँचने के लक्ष्य पर काम कर रही है।

संघर्ष से सफलता की प्रेरक कहानियाँ

​दीक्षांत समारोह में सफलता की कई जीवंत मिसालें देखने को मिलीं:

​साब्या परवीन (18 वर्ष): विवाह और मां बनने की जिम्मेदारी के बावजूद हार नहीं मानी और अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी कर समाज के लिए मिसाल बनीं।

उर्मिला: व्यक्तिगत क्षति और दुखों के बावजूद पढ़ाई जारी रखी और आज एक पैरामेडिकल पेशेवर के रूप में अपनी सेवा दे रही हैं।

रीना कुमारी (कम्युनिटी मेंटर): एक ऐसी नेत्री बनकर उभरीं जिन्होंने अब तक 33 स्कूल से बाहर रही लड़कियों का नामांकन कराकर उन्हें शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कार्यक्रम में सशक्तिकरण और समावेशन पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समां बांध दिया। इंटरैक्टिव सत्र के दौरान शिक्षार्थियों ने अपनी भविष्य की आकांक्षाएं साझा कीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि शिक्षा ने न केवल उनके हाथ में डिग्री दी है, बल्कि उन्हें एक नया आत्मविश्वास भी प्रदान किया है।

Dr. Bhanu Pratap Singh