वरिष्ठ पत्रकार डॉ. भानु प्रताप सिंह ने 1986-87 में कविता लेखन किया। उनकी कविताओ का मुख्य उद्देश्य देश और समाज हुआ करता था। 22 जनवरी,1987 को उन्होंने गणतंत्र दिवस को ध्यान में रखते हुए शानदार कविता लिखी। आइए आज गणतंत्र दिवस 2022 पर हम गुनगुनाते हैं यह कविता-
आओ हम करते ही जाएं देशभक्त के अनुपम काम।
आज नहीं तो कल गूंजेगा अपने हिंदुस्तान का नाम।।
देश भक्ति की पावन गंगा में ही हमने स्नान करें
देशभक्त के पावन मंदिर में ही नितप्रति ध्यान धरें
देशभक्ति ही बने रसोई देशभक्ति भोजन जलपान।
आज नहीं तो कल गुजरा अपने हिंदुस्तान का नाम..
मानवता मृतप्राय हो चुकी इसको पुनः जिलाना है
दानवता अट्टहास कर रही इसको मृतप्राय बनाना है
परशुधर की शक्ति लेकर सें फिर से शर संधान
आओ हम करते ही जाएं देशभक्त के अनुपम काम…
शिबि, कर्ण दानी से सीखें सेवा- अतिथि का सत्कार
नहीं पराया जग में कोई सबको दें हम समुचित प्यार
‘वसुधैवकुटुंबकम्’ की वाणी को फिर अपनावे ग्राम ग्राम
आज नहीं तो कल गूंजेगा अपने हिंदुस्तान का नाम..
‘भानु’ से आलोकित होकर जग को शतपथ दिखलाएं
शशि सम शीतल बन करके शीतलता जग को पहुंचाएं
निःस्वार्थ भाव से सेवा करके नहीं चाहिए हमें इनाम
आओ हम करते ही जाएं देशभक्त के अनुपम काम।
आज नहीं तो कल गूंजेगा अपने हिंदुस्तान का नाम।।
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