पुस्तक मेला में विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट ने विजया तिवारी और मेरठ के अनुभव शर्मा को भी किया सम्मानित
प्रज्ञा हिंदी सेवार्थ संस्थान ट्रस्ट के कृष्ण कुमार कनक ने एमएम शर्मा को साहित्य संरक्षक सम्मान से नवाजा
लाइव स्टोरी टाइम
आगरा, उत्तर प्रदेश, इंडिया, भारत। साहित्य की सुगंध से सराबोर विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट के तत्त्वावधान में सिकंदरा, आगरा स्थित भावना मल्टीप्लेक्स में आयोजित पुस्तक मेला साहित्य प्रेमियों के लिए एक सांस्कृतिक उत्सव बन गया है। इस मेला में प्रतिदिन साहित्य साधकों का सम्मान किया जा रहा है, जो हिंदी साहित्य के प्रति उनके अनन्य समर्पण का साक्ष्य है। इस क्रम में डॉ. भानु प्रताप सिंह, डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, विजया तिवारी, अनुभव शर्मा (मेरठ) को हिंदी गौरव सम्मान से अलंकृत किया गया, जबकि विख्यात इतिहासकार राजकिशोर शर्मा ‘राजे’ को इतिहास शिरोमणि सम्मान से नवाजा गया। ट्रस्ट के अध्यक्ष मोहन मुरारी शर्मा ने साफा, शॉल और ट्रॉफी भेंटकर सम्मानित विद्वानों का अभिनंदन किया।

डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा: चिकित्सा और साहित्य का अनुपम संगम
डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, जिनकी आत्मकथा NM@2AM ने पाठकों के मध्य अपार लोकप्रियता अर्जित की है, एक साहित्यिक चिकित्सक हैं। उनकी आत्मकथा के अनेक संस्करण प्रकाशित हो चुके। इसकी रचना वरिष्ठ पत्रकार डॉ. भानु प्रताप सिंह ने की है। डॉ. मल्होत्रा ने चिकित्सा क्षेत्र में 69 पुस्तकें लिखी हैं, जो चिकित्सा जगत में अत्यंत प्रचलित हैं। वर्ष 2008 में फोग्सी के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दिया, जो आज सामाजिक जागरूकता का प्रतीक बन चुका है। उनकी नवीनतम पहल बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटा समझाओ ने समाज में नए विमर्श को जन्म दिया है। उनकी आत्मकथा का अंग्रेजी संस्करण शीघ्र ही पाठकों के समक्ष होगा।
डॉ. मल्होत्रा ने सम्मान ग्रहण करते हुए कहा, “मैं इस सम्मान से गौरवान्वित हूँ। भले ही मेरी चिकित्सा शिक्षा अंग्रेजी में हुई, पर मेरी मातृभाषा हिंदी है। इसलिए मैंने अपनी आत्मकथा हिंदी में लिखी, ताकि मेरे अनुभव मेरे देशवासियों तक उनकी भाषा में पहुँचें।”

डॉ. भानु प्रताप सिंह: साहित्य और प्रबंधन का समन्वय
वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और लेखक डॉ. भानु प्रताप सिंह ने साहित्य जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उनकी 20 से अधिक पुस्तकें, जो अमेजन जैसे मंचों पर उपलब्ध हैं, पाठकों द्वारा सराही गई हैं। उनकी कृतियाँ जैसे हिंदू धर्म रक्षक वीर गोकुला जाट, अयोध्या, और मेरे हसबैंड मुझको प्यार नहीं करते ने व्यापक लोकप्रियता हासिल की है। डॉ. सिंह को हिंदी गौरव सम्मान न केवल उनके साहित्यिक योगदान के लिए, बल्कि प्रबंधन विषय में हिंदी माध्यम से देश की प्रथम विद्या वाचस्पति (पीएचडी) उपाधि अर्जित करने के लिए भी प्रदान किया गया।
उन्होंने निखिल प्रकाशन और इसके संचालक एमएम शर्मा की सराहना करते हुए कहा, “निखिल प्रकाशन ने साहित्य सृजनकर्ताओं को प्रोत्साहित कर लेखन यात्रा को आगे बढ़ाया है। साथ ही लिखते रहने को प्रेरित किया है। प्रसिद्ध लघु फिल्म निर्माता और शिक्षक शैलेंद्र नरवार ने डॉ. भानु प्रताप सिंह का परिचय देते हुए उनके संबंध में कई संस्मरण सुनाए।

राजकिशोर शर्मा ‘राजे’: इतिहास का पुनर्लेखन
इतिहास शिरोमणि सम्मान से सम्मानित राजकिशोर शर्मा ‘राजे’ ने आगरा और मुगल इतिहास पर गहन शोध किया है। उन्होंने अकबर के संबंध में उन तथ्यों को उजागर किया, जो परंपरागत इतिहास लेखन में दबा दिए गए थे। उन्होंने तर्कसंगत ढंग से सिद्ध किया कि अकबर, औरंगजेब की भाँति, हिंदुओं के प्रति क्रूर था और मंदिरों का विनाशक था। साथ ही, उन्होंने यह भी स्थापित किया कि अंग्रेजों ने हिंदुओं की रक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्य ने इतिहासकारों की भ्रांतियों को चुनौती दी है।

विजया तिवारी और अनुभव शर्मा: साहित्य के उभरते सितारे
विजया तिवारी ने साहित्यिक पुस्तकों के प्रकाशन के लिए विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट का आभार व्यक्त किया। मेरठ के युवा कवि अनुभव शर्मा ने पहलगाम घटना पर आधारित अपनी मार्मिक कविता प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

एमएम शर्मा: हिंदी साहित्य के संरक्षक
प्रज्ञा हिंदी सेवार्थ संस्थान ट्रस्ट, फिरोजाबाद के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध करने वाले और कनन काव्य कुसुम पत्रिका के संपादक कृष्ण कुमार ‘कनक’ ने विश्व साहित्य सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष मोहन मुरारी शर्मा को सम्मानित किया। उन्होंने श्री शर्मा के हिंदी साहित्य के प्रति योगदान को अतुलनीय बताया और डॉ. मल्होत्रा व राजे से भेंट को अपनी उपलब्धि माना।

पुस्तक मेला: साहित्य का उत्सव
पुस्तक मेला 27 अप्रैल को सायं 5 बजे से एक वृहद आयोजन की मेजबानी करेगा। मेले में सभी बेस्टसेलर पुस्तकें उपलब्ध हैं, और पाठक पुस्तकें पढ़ने, देखने व क्रय करने का आनंद ले सकते हैं।

संपादकीय टिप्पणी
आगरा का यह पुस्तक मेला केवल साहित्य का मंच नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा के गौरव का उत्सव है। डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, डॉ. भानु प्रताप सिंह, राजकिशोर शर्मा ‘राजे’ जैसे विद्वानों का सम्मान हिंदी साहित्य के प्रति उनके अमर योगदान का स्मरण कराता है। यह आयोजन न केवल साहित्यकारों को प्रेरित करता है, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व करने का संदेश देता है। हिंदी, जो हमारी आत्मा की भाषा है, ऐसे आयोजनों से न केवल जीवित रहती है, बल्कि नवीन ऊँचाइयों को स्पर्श करती है। यह मेला साहित्य के उस अमर दीपक की भाँति है, जो अंधकार को चीरकर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है।
- Festival Event Glowing Crown Slot Road Gathering in UK - September 3, 2026
- Where Luck Meets Real Rewards for UK at Winplace Casino - September 1, 2026
- Få varje snurr att betyda på Flax Casino - September 1, 2026