
कोरोना वायरस यानि कोविड -19 के संक्रमण का पूरी दुनिया पर कहर टूट पड़ा है। यह महामारी चीन के वुहान शहर से निकलकर पूरी दुनिया में फैल गई। वायरस से हजारों लोंगो की जिंदगी खत्म हो गई तो वहीं, बाकि लोगों की जिंदगी मानों थम सी गई है। कोरोना के कारण सभी देशों में लॉकडाउन है और इसके कारण देशों पर आर्थिक संकट भी मंडरा रहा है। लेकिन इन सब दुनिया भर के चिकित्सक भगवान बनकर लाखों लोगों की जिंदगी बचाने में लगे हैं। जबकि इस वायरस से संक्रमित मरीज के इलाज के दौरान चिकित्सकों के भी संक्रमित होने की बात सामने आई है।
इस बीमारी से भारत भी अछूता नहीं रहा है। शुरुआत में भारत में इसके चुनिंदा मरीज ही थे। जोकि विदेश से आए थे, लेकिन कुछ लोगों की गैर जिम्मेदाराना हरकतों की वजह से अब भारत में संक्रमण तेजी फैल गया है। देश में हजारों की संख्या में कोरोना संक्रमित है। जिनको स्वस्थ बनाने की जिम्मेदारी इस संकट में भगवान कहलाने वाले चिकित्सकों पर है। चिकित्सकों को कोरोना के मरीज का इलाज करते समय बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसके लिए उन्हें पीपीई किट भी प्रदान की गई हैं।
क्या है पीपीई किट
कोरोना के खिलाफ लड़ाई में संक्रमितों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के लिए पीपीई किट सुरक्षा कवच साबित हो रही है। पीपीई किट यानी पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट्स। इसके नाम से ही समझ में आता है कि ऐसे सामान जिससे संक्रमण से खुद को बचाने में मदद मिले। क्योंकि कोविड-19 संक्रामक बीमारी है, इसलिए इससे बचने के लिए मास्क पहनना, बार-बार हाथ धोना, एक-दूसरे से डिस्टेंसिंग बनाकर रखना है। आम लोग मास्क और दास्ताने का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर, नर्स, कंपाउंडर और मेडिकल स्टाफ को सिर से पांव तक वायरस संक्रमण से बचाव के लिए कई तरह की चीजें पहननी होती हैं और ये सारी चीजें पीपीई किट्स हैं। अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग तरह के पीपीई किट्स हो सकते हैं लेकिन आम तौर पर मास्क, ग्लव्स, गाउन, एप्रन, फेस प्रोटेक्टर, फेस शील्ड, स्पेशल हेलमेट, रेस्पिरेटर्स, आई प्रोटेक्टर, गोगल्स, हेड कवर, शू कवर, रबर बूट्स इसमें गिने जा सकते हैं।
अलग-अलग सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार डोरबेल, कूड़ादान, लिफ्ट के बटन, कार के दरवाजे, बगीचे के फूल, जूते-चप्पल, दरवाजे के हैंडल और नोट व सिक्के जब भी छुएं तो हाथ फौरन धोएं। बच्चों व बुजुर्गों के लिए तो यह वायरस है ही नुकसानदेह, जवानों को भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
डायबिटीज और ब्लड प्रेशर वाले रखें खास ख्याल
कानपुर राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य रहे डॉ. आनंद स्वरूप के मुताबिक जिन लोगों को डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की शिकायत रहती है वह दवाएं खाते रहें और अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें। उन्होंने कहा कि खांसी आए या छींक, हाथ फौरन साबुन से धोएं। डॉ. आनंद स्वरूप के मुताबिक कोरोना वायरस से बचने के लिए सावधानी बरतना ही सबसे कारगर उपाय है। उन्होंने कहा कि खांसी या बुखार के लक्षण होने या सांस लेने में तकलीफ होने पर फौरन सरकारी अस्पताल में दिखाएं।
नशे की लत छुड़ाने का सही समय
लखनऊ स्थित किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष व केजीएमयू कोरोना टास्क फ़ोर्स के सदस्य डॉ. सूर्यकान्त का कहना है कि कोरोना के इस दौर में हम नशे से छुटकारा पा सकते हैं। नशे से पूरी तरह से छुटकारा दिलाने में प्राणायाम और ध्यान भी बहुत ही सहायक साबित हो सकता है। धूम्रपान अगर कुछ समय तक किसी भी कारण से छूट जाता है तो लोग अपने में संयम लाकर इससे हमेशा के लिए मुक्ति पा सकते हैं। इससे जहाँ जीवन में खुशहाली आ सकती है। वहीं, शरीर भी निरोगी बन सकता है। धूम्रपान के साथ ही लोग करीब 40 तरह के कैंसर को न्योता दे देते हैं, इसलिए इससे छुटकारा पाने में ही खुद के साथ ही समाज की भी भलाई है। स्मोकिंग के बाद करीब 70 फीसद जो धुआं बाहर छोड़ते हैं वह उन सभी को प्रभावित करता है, जो उसके संपर्क में आते हैं। इस समय देश में करीब 12 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं और उनमें से कुछ फीसद भी नशे को छोड़ देते हैं तब भी समाज का बहुत भला होगा क्योंकि धूम्रपान करने वाले से ज्यादा नुकसान उसके धुंएँ की चपेट में आने वालों का होता है। इस बीच बीड़ी-सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक लगी है, इसके चलते आसानी से इसकी उपलब्धता भी ख़त्म हो गयी है। इसके अलावा खुले में थूकने पर भी मनाही है, इस भय से भी लोग अब नशे से तौबा करने में ही अपनी भलाई समझेंगे।
कोरोना काल में क्या है जरूरी
परिवार का सहयोग भी है जरूरी, दृढ़ इच्छा शक्ति, योगा और ध्यान, प्राणायाम, अनुलोम -विलोम, कपालभाति
भेदभाव को रोकने के लिए क्या करें
- आवश्यक सेवाएं प्रदान करने वालों की सराहना और सहयोग करें
- सरकारी स्रोतों, स्वास्थ्य मंत्रालय या डब्ल्यूएचओ की प्रामाणिक जानकारी ही साझा करें
- किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से क्रास चेक कर लें
- कोरोना वायरस को मात देने वालों की सकारात्मक कहानियां साझा करें
भेदभाव को रोकने के लिए ऐसा न करें
- संक्रमित व क्वेरेंटाइन में रहने वालों के नाम/पहचान को सोशल मीडिया पर साझा न करें
- दहशत फैलाने से बचें, किसी समुदाय या क्षेत्र को कोविड के प्रसार का कारण न बताएं
- हेल्थ केयर, सफाईकर्मी या पुलिस को निशाना न बनाएं, वह आपकी मदद के लिए ही हैं
- मरीज को कोविड पीड़ित कहने के बजाय कोरोना के विजेता के रूप में संबोधित करें
अपने जीवन की परवाह नहीं कर रहे चिकित्सक
इस पृथ्वी पर भगवान का दर्जा चिकित्सकों को दिया जाता है। कोरोना काल में चिकित्सकों द्वारा दिन-रात मरीजों का किया जा रहा इलाज से यह साबित करता है कि चिकित्सक अपने जीवन की परवाह न कर आगे बढ़कर इलाज करने में जुटे हुए हैं। ऐसे समय में इन कोरोना योद्धाओं का साथ देकर सभी को अपना कर्तव्य निभाने की आवश्यकता है ताकि जिंदगी फिर रफ्तार पकड़ सके।
मनीषा उपाधयाय
(वरिष्ठ पत्रकार तथा विभागाध्यक्ष पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग मंगलायतन विश्वविद्यालय)
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