संभल (उत्तर प्रदेश)। संभल पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो पश्चिम बंगाल की मुस्लिम लड़कियों को हिंदू नाम और फर्जी पहचान के सहारे उत्तर प्रदेश में शादियों के लिए ‘सप्लाई’ करता था। इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य शादी के नाम पर मोटी रकम वसूलना और कुछ ही दिनों बाद घर के जेवर व नकदी लेकर दुल्हन को फरार कराना था।
फर्जी आधार कार्ड बना ‘साजिश’ का हथियार
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह बदायूं के एक नेटवर्क के जरिए असली आधार कार्ड में नाम और धर्म बदलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कराता था। उदाहरण के तौर पर नूरजहां खातून को ‘काजल’ और आयशा को ‘पूजा’ बनाकर पेश किया गया। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के सहारे समाज और परिवारों का भरोसा जीता जाता था।
मजबूर युवकों को बनाते थे निशाना
यह गिरोह खास तौर पर उन युवकों को टारगेट करता था जिनकी उम्र अधिक हो चुकी है या किसी कारणवश शादी नहीं हो पा रही है। मैरिज ब्रोकर के जरिए कम खर्च में शादी का लालच देकर परिवारों से 50 हजार से 1 लाख रुपये तक वसूले जाते थे।
डेढ़ महीने में 4 वारदातें: सीसीटीवी से खुला राज
पिछले डेढ़ महीने में संभल के पतरौआ गांव और आसपास के इलाकों में चार ऐसी शादियां हुईं, जिनमें दुल्हनें कुछ ही दिनों में फरार हो गईं। एक मामले में दुल्हन को रात के अंधेरे में बाइक पर भागते हुए सीसीटीवी फुटेज में देखा गया, जो पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हुआ। 20 जनवरी को जब एक महिला (पूजा उर्फ आयशा) घर से सामान समेट रही थी, तब ग्रामीणों के शक पर पुलिस ने उसे हिरासत में लिया, जिसके बाद पूरी परतें खुलती चली गईं।
एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई का बयान
संभल के एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि यह गैंग पूरी प्लानिंग के साथ धर्म और पहचान छिपाकर शादियां करवाता था। अब तक चार मामलों की पुष्टि हो चुकी है। पुलिस ने मास्टरमाइंड काजल (असली नाम नूरजहां), उसके पति राजीव और अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से फर्जी आधार कार्ड, गहने और नकदी बरामद हुई है। फिलहाल तीन अन्य ‘लुटेरी दुल्हनों’ और फर्जी दस्तावेज बनाने वाले नेटवर्क की तलाश जारी है।
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