चुनावों में डिजिटल अभियान, झूठे-सच्चे वादों का ऐलान

प्रियंका सौरभ आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म अक्सर बड़े बजट वाले दलों के विज्ञापनों को अधिक दृश्यता देकर उनका पक्ष लेते हैं, अभियान को अमीर राजनीतिक संस्थाओं के पक्ष में झुकाते हैं, जिससे चुनावी निष्पक्षता कम हो जाती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विभाजनकारी कंटेंट को बढ़ा सकते हैं, जिससे राजनीतिक विचारों का ध्रुवीकरण हो सकता है एवं […]

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राजनीतिक फायदों के लिए बढ़ती नाजायज़ हिरासतें

प्रियंका सौरभ राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में निचली अदालतों द्वारा स्वचालित रूप से जमानत से इनकार करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, भले ही कानूनी आधार इस तरह के इनकार को उचित ठहराते हों। राजनीतिक रूप से आरोपित मामलों में, न्यायपालिका को अक्सर कार्यपालिका के सूक्ष्म या प्रकट दबाव का सामना करना पड़ता है। […]

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हिंदी बोलते समय इतनी शर्म क्यों ?

प्रियंका सौरभ भारत ने स्थानीय भाषाओं में निवेश नहीं किया है, चाहे वह उच्च गुणवत्ता वाली स्कूली शिक्षा हो या कला और साहित्य में निवेश हो। यदि हम आज यह निवेश करते हैं, तो हमारी सभी भाषाएँ फल-फूलेंगी, साथ ही उन पर हमारा गर्व भी होगा। जब तक हम यह निवेश नहीं करेंगे, शिक्षित पीढ़ी […]

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जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा शांति व स्थिरता की राहें खोलेगा

प्रियंका सौरभ जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा एवं स्वायत्तता प्रदान करना अवसर तथा चुनौतियाँ दोनों प्रदान करता है। सुरक्षा, शासन एवं आर्थिक विकास पर जोर देने वाले चरणबद्ध, समावेशी दृष्टिकोण को सुनिश्चित करके, भारत इस क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति तथा स्थिरता को बढ़ावा दे सकता है। यह संतुलित रणनीति स्थानीय समुदायों को सशक्त बना सकती […]

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‘अपराजिता’ बनने के लिए पहले घरों और कार्यस्थलों को सुरक्षित बनाना होगा

प्रियंका सौरभ इस बात के बहुत कम सबूत हैं कि मौत की सजा देने से यौन अपराध थम जाते हैं, लेकिन ऐसे अपराधों के बाद ज्यादा कठोर कानूनों की मांग पर अक्सर एक आधिकारिक प्रतिक्रिया होती है। यह कहकर कि “बलात्कार मानवता के लिए अभिशाप है और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सामाजिक सुधारों […]

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बंगाल में बीजेपी का निर्भया प्रयोग !

बंगाल में बीजेपी निर्भया प्रयोग दोहरा रही है। जैसे दिल्ली में निर्भया बलात्कार में आरोपी गिरफ्तार होने के बाद भी बीजेपी और उसके उस समय के मुखौटे अन्ना हजारे आन्दोलन चलाते रहे और पहले दिल्ली की राज्य सरकार और फिर केन्द्र सरकार को जाना पड़ा वैसे ही वह अब एक और बलात्कार के जरिए पश्चिम […]

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राजनीति को नया आयाम देने के लिए जरुरी है युवाओं की भागीदारी

युवाओं के हाथ में राजनीति के नए युग की शुरुआत….. राजनीति—यह शब्द सुनते ही अक्सर हमारे मन में नकारात्मक विचारों की बाढ़ आ जाती है। भ्रष्टाचार, सत्ता की भूख, और धोखाधड़ी जैसे शब्द हमारे दिमाग में घूमने लगते हैं। समाज में राजनीति और राजनेता दोनों को ही नकारात्मक दृष्टि से देखा जाता है। आज के […]

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लगातार आती मार्केटिंग फोन कॉल्स कर रही परेशान…कंपनियां नही मान रही कोर्ट के भी आदेश

डॉ सत्यवान सौरभ फोन में आने वाली अनचाही या अनजानी कॉल। जो वक्त बेवक्त कभी भी आकर आपको परेशान कर सकती हैं और आप चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। आप फोन उठाने से पहले इतना भी नहीं जान पाते कि आपको ये फोन कॉल कौन कर रहा है। वक्त-बेवक्त मोबाइल फोन पर आने वाले […]

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धीमा न्याय कर रहा निर्भयाओं को कमजोर

प्रियंका सौरभ महिलाओं के विरुद्ध यौन हिंसा में संस्थागत कारकों में अपर्याप्त संसाधन वाले पुलिस बल और अप्रभावी कानून प्रवर्तन सहित संस्थागत विफलताएं ,महिलाओं के खिलाफ हिंसा के जारी रहने में योगदान करती हैं। अक्सर, मामले या तो दर्ज नहीं किए जाते हैं या पूरी तरह से जांच नहीं की जाती है , जिससे सजा […]

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कोलकाता कांड विशेष: लुटती जाए द्रौपदी, जगह-जगह पर आज, सत्ताधीश बने बैठे धृतराष्ट्र

अगर यह बलात्कार संस्कृति नहीं है, जिसे समाज के समझदार पुरुषों और महिलाओं, संस्थानों और सरकारी अंगों द्वारा समर्थित और बरकरार रखा जाता है, तो यह क्या है? आप सभी कानून, सभी तेज़ अदालतें, यहाँ तक कि मौत की सज़ा भी ला सकते हैं, लेकिन कुछ भी नहीं बदल सकता जब तक कि एक समान […]

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