प्रचंड गर्मी में ठंडक देता ‘मिट्टी का घड़ा’: इम्‍युन सिस्‍टम भी होता है मजबूत

प्रियंका सौरभ गर्मियों के मौसम में आज भी कई घरों में मिट्टी का बना घड़ा या मटका नजर आ जाता है। भारत में मटके में पानी रखने की परंपरा बहुत पुरानी है। कई तरह के वॉटर प्‍यूरीफायर और कंटेनर्स आने के बाद भी आज तक लोग मिट्टी का घड़ा अपने घरों में रखते हैं। मिट्टी […]

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chaudhary charan singh

चौ. चरण सिंहः उत्तर प्रदेश और शेष भारत में कृषि क्रांति के अग्रदूत

29 मई को चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि है। उन्हें उत्तर प्रदेश और भारत के अन्य कई राज्यों में कृषि सुधारों के अग्रदूत के रूप में जाना जाता है। उन्होंने सबसे प्रशंसित और क्रांतिकारी कृषि सुधार – उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1952 की कल्पना की और उसे तैयार किया। आज बहुत […]

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Mahant avaidyanath Yogi adityanath

योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ, बनारस में डोमराजा के घर भोजन करके रच दिया था इतिहास

भारत में उत्तराखंड के पौढ़ी गढ़वाल में एक गांव है कांदी, इस गांव में 28 मई 1921 को जन्म हुआ कृपाशंकर का। अब आप सोच रहे होंगे कि ये कौन है? ये नाम है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ का। वही अवैद्यनाथ जो पहली बार गोरखपुर की मनिराम विधानसभा से […]

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क्यों संदिग्ध है अकादमी पुरस्कारों की वार्षिक गतिविधियां ?

आखिर क्यों सही से काम नहीं कर पा रही साहित्य अकादमियां? पिछले दशकों में पुरस्कारों की बंदर बांट कथित साहित्यकारों, कलाकारों और अपने लोगों को प्रस्तुत करने के लिए विशेष साहित्यकार, पुरोधा कलाकार, साहित्य ऋषि जैसी कई श्रेणियां बनी है। जिसके तहत विभिन्न अकादमियां एक दूसरे के अध्यक्षों को पुरस्कृत कर रही है और निर्णायकों […]

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वोटर लिस्ट में बढ़ती महिलाएं संसद में कब बढ़ेगी, वोट 48%, फिर सीटें 14% ही क्‍यों?

प्रियंका सौरभ महिलाओं का वोट 48%, फिर सीटें 14% ही क्‍यों? भारत की महिला मतदाता; एक ताकत है जिसे गिना जाना चाहिए। राजनीतिक दल कल्याणकारी योजनाओं और रियायतों के वादों के साथ महिलाओं के वोट हासिल करने की होड़ में हैं, लेकिन सच्चा सशक्तिकरण अभी भी मायावी है। जब तक राजनीतिक पार्टियां अधिक से अधिक […]

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राजनीतिक हस्तक्षेप से त्रस्त शिक्षा संस्थान: विश्वविद्यालय शैक्षणिक सुधारों के बजाय बनते जा रहे राजनीतिक हितों के पोषण का केंद्र

प्रियंका सौरभ विश्वविद्यालय शैक्षणिक सुधारों के बजाय राजनीतिक हितों के पोषण का केंद्र न बनने पाएं। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति केंद्र सरकार और राज्यों के विश्वविद्यालयों में राज्य सरकारें करती हैं। जिस राज्य में जिस पार्टी की सरकार होती है, वह अपने चहेतों को कुलपति नियुक्त करती है। हर राज्य में इस तरह […]

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जहां त्याग नहीं वहां कैसी सफलता ?

प्रियंका सौरभ त्याग न केवल मनुष्य की उच्च नैतिक स्थिति को पार करता है, लालच, क्रोध, सुखवाद आदि जैसी नकारात्मक भावनाओं और नकारात्मक दृष्टिकोण को कम करता है बल्कि दूसरों को उनके अधिकारों का एहसास कराने में भी मदद करता है। “बलिदान के बिना कोई प्रगति नहीं हो सकती, कोई उपलब्धि नहीं हो सकती और […]

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आखिर क्यों आदर्श आचार संहिता की कोई नज़ीर पेश नहीं होती?

प्रियंका सौरभ बीते कुछ सालों में देश में जितने भी चुनाव हुए हैं, चाहे वो लोकसभा के हों या विधानसभा के, सब में आचार संहिता उल्लंघन के मामले सामने आते रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां आमतौर इसे बहुत गंभीरता से नहीं लेतीं। उल्लंघन करने पर कार्रवाई तो होती है, पर वो ऐसी नहीं होती की कोई […]

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परिवार दिवस विशेष: फूट-कलह ने खींच दी, हर आँगन दीवार

डॉ सत्यवान सौरभ भौतिकवादी युग में एक-दूसरे की सुख-सुविधाओं की प्रतिस्पर्धा ने मन के रिश्तों को झुलसा दिया है. कच्चे से पक्के होते घरों की ऊँची दीवारों ने आपसी वार्तालाप को लुप्त कर दिया है. पत्थर होते हर आंगन में फ़ूट-कलह का नंगा नाच हो रहा है. आपसी मतभेदों ने गहरे मन भेद कर दिए […]

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लापता लेडीज और मेरी नानी की कहानी: बहुत मज़े से लेकिन बहुत गहरी बातें कह गई फिल्म

अभी दो दिन पहले नेटफ्लिक्स पर ” लापता लेडीज” देखी। फिल्म कमाल की है। एक बार देखना शुरू करो तो बस समाप्त होने पर ही उठ पाओ ऐसी। और फिल्म खत्म होने के बाद भी उसके बारे में ही सोचते रहो । बहुत मज़े से लेकिन बहुत गहरी बातें कही गई हैं फिल्म में। कई […]

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