आतंकवाद आधुनिक समय की जटिल चुनौती, विश्वभर की सरकारों और समाज पर गहरा प्रभाव

आतंकवाद आधुनिक समय की सबसे जटिल और गंभीर चुनौतियों में से एक बन चुका है। इसने न केवल विश्वभर की सरकारों की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि समाज और मानवीय संरचना को भी गहराई तक झकझोर दिया है। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि आतंकवादी गतिविधियों में आर्थिक रूप से कमजोर, […]

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उत्तर प्रदेश के काशी का रत्नेश्वर महादेव मंदिर जो इटली के पीसा की मीनार के झुकाव पर भारी लेकिन कोई जानता नहीं

डॉ भानु प्रताप सिंह Live Story Time  उत्तर प्रदेश के काशी के पवित्र हृदय में स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर सिर्फ झुका हुआ नहीं है—यह समय, आस्था और वास्तु का ऐसा दिव्य संगम है जो इटली की पीसा की मीनार को भी फीका कर देता है। जहाँ पीसा की मीनार एक इंजीनियरिंग गलती से मशहूर हुई, […]

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जातिविहीन समाज बनाने के लिए बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर का अचूक मंत्र

डॉ प्रमोद कुमार सदी के महानायक, शोषितों व वांक्षितो के मसीहा, नारी उद्धारक, महान उदार राष्ट्रवादी, महामानवतावादी, आधुनिक भारत के जन्मदाता और भारतीय संविधान के शिल्पकार बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर का “जातियों का विखंडन” भारतीय समाज की जड़ता, असमानता, जन्माधारित ऊँच-नीच और सामाजिक पराधीनता पर एक अत्यंत सूक्ष्म व वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करने वाला […]

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मसूरी में 600 प्रशिक्षु आईएएस और एक सवाल: उंगलियों पर हल होने वाला सवाल और भविष्य के प्रशासकों की तैयारी का सच

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार मसूरी से उठता सवाल: क्या हमारी प्रशासनिक शिक्षा केवल पुस्तकीय हो गई है? मसूरी में 600 प्रशिक्षु और एक सवाल जिसने सबको सोचने पर मजबूर किया। लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी का वास्तविक लक्ष्य: ‘थिंकिंग एडमिनिस्ट्रेटर’ तैयार करना। प्रशिक्षण का अर्थ केवल पाठ नहीं। मसूरी की कक्षाओं […]

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सरकारी तंत्र पर सवाल: टैक्स देने के बाद भी क्यों नहीं मिल रहीं बुनियादी सुविधाएँ?

देश का आम नागरिक हर साल अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में सरकार को देता है, ताकि उसे सुरक्षित जीवन, बेहतर स्वास्थ्य-सेवाएँ, स्वच्छ हवा-पानी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत बुनियादी ढाँचा मिल सके। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है। लोगों के सामने आज भी वही समस्याएँ खड़ी हैं, जिन पर नियंत्रण […]

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विष को कौन पचाएगा? हमारी ज़िद, हमारी राजनीति… और हमारे फेफड़े…

भारत के शहर आज धुएँ की चादर में लिपटे हुए हैं। हर सुबह AQI के आँकड़े देखते ही दिल बैठने लगता है। यह वही देश है, जहाँ हम अपनी-अपनी राजनीतिक विचारधाराओं को सही साबित करने में इतने तल्लीन हो चुके हैं कि साँसें बोझिल होने लगी हैं। हवा जहरीली हो रही है, फेफड़े भर रहे […]

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क्या हम अपने बच्चों को वह दृष्टि दे पा रहे हैं, जिसके आधार पर वे वर्तमान से बेहतर भविष्य बना सकें?

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार समाज परिवर्तन की सबसे कठिन, सबसे लंबी और सबसे महत्त्वपूर्ण यात्रा हमेशा अपने मूल में उन छोटे-छोटे बीजों से शुरू होती है, जिन्हें हम बच्चे कहते हैं। दुनिया की कोई भी क्रांति—विचारों की हो, नैतिकता की हो, तकनीक की हो या इंसानी मूल्यों की—तब तक स्थायी नहीं हो […]

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जयंती विशेष: पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी…एक असाधारण, बहुआयामी और अविस्मरणीय व्यक्तित्व

इंदिरा गांधी — यह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि ऐसा विराट व्यक्तित्व था जिसकी तुलना विश्व के किसी भी नेता से करना कठिन है। 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद के आनंद भवन में पंडित जवाहरलाल नेहरू और श्रीमती कमला नेहरू के यहां जन्मी इंदिरा बचपन से ही असाधारण दृढ़ता, साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रतीक थीं। […]

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संघ की भारत माता के हाथ में भगवा ध्वज… तिरंगा क्यों नहीं?

हाल ही में आरएसएस कार्यकर्ताओं द्वारा घर–घर भारत माता की तस्वीरें और पंपलेट बांटे जा रहे हैं। इन चित्रों में भारत माता के हाथ में भगवा ध्वज दर्शाया गया है, जबकि राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगा होना चाहिए। इसको लेकर कई लोगों में सवाल और नाराजगी पैदा हो रही है। मेरा मानना है कि […]

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लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुचिता का प्रश्न और एसआईआर की अनिवार्यता

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार भारत में चुनाव केवल राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सबसे जीवंत उत्सव है। मतदान जनता को अपनी आवाज़ सुनाने और नीतिगत दिशा तय करने का अवसर प्रदान करता है। इस दौरान प्रशासन निष्पक्षता, सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक व्यवस्थाएँ करता है—मतदान केंद्रों की तैयारी […]

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