गरीबी और अशिक्षा का भंवर: कैसे होगा सशक्त और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण?

विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद भी आज देश में आन्तरिक तौर पर देखा जाए, तो हजारों समस्याएँ देखने को मिल जाएँगी। कहने को तो हम आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुके हैं, लेकिन आज भी देश में करीब 53 करोड़ लोग गरीबी और अभाव का जीवन जी रहे […]

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संसदीय गरिमा पर अविश्वास: राज्यसभा के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नोटिस..

प्रियंका सौरभ राज्यसभा में सभापति के खिलाफ विपक्ष खेमे ने अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया है। भारतीय संसद के इतिहास में यह पहला मौका होगा, जहां राज्यसभा में किसी सभापति के खिलाफ अविश्वास का नोटिस आया हो। दरअसल, यह मौका इसलिए सामने आया, क्योंकि सभापति के सदन में रुख से सभी विपक्षी दल नाखुश […]

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प्रसिद्ध दिव्यांग साहित्यकार सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ को काम आया आत्मविश्वास

डॉ सत्यवान सौरभ कुछ बच्चे प्रारम्भ से ही शारीरिक और मानसिक विकलांगता का शिकार हो जाने के कारण बचपन के अतुलित आनन्द से वंचित रह जाते हैं। उनके लिए बचपन के ये मधुर क्षण, दूर के सुहाने ढोल बनकर रह जाते हैं। कुछ इसी प्रकार की कठोर परिस्थितियों का सामना सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ को भी […]

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महंगी का अर्थ टिकाऊ शादी नहीं? आधुनिक भारतीय शादियों में फिजूलखर्ची और दिखावा..

बृज खंडेलवाल अब एक करोड़ की शादी नॉर्मल मानी जाती है। इस तरह की महंगी शादियों में समाज का बदसूरत और विकृत चेहरा झलकता है। आधुनिक भारतीय शादियों में फिजूलखर्ची और दिखावे से इन शादियों की स्थिरता या मजबूती की कोई गारंटी नहीं है। क्या आपने हाल ही में पांच दिन तक चलने वाली डेस्टिनेशन […]

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क्या ईवीएम के मुद्दे पर विपक्ष के साथ जनता आएगी?

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले मालशिरास विधानसभा का मारकडवाडी गांव दुनिया भर में लोकतंत्र बचाओ और ईवीएम के विरोध का प्रतीक बन गया। रविवार को यहां शरद पवार ने पहुंचकर ग्रामीणों के ईवीएम के बदले मतपत्र से खुद वोटिंग करके सच्चाई सामने लाने के अनोखे अभियान का समर्थन किया। वे उस प्रदर्शन में शामिल हुए जो […]

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मजबूरियों में दम तोड़ता बचपन….

एक सर्द सुबह बस स्टेशन पर बैठा मैं अपनी बस का इंतज़ार कर रहा था। तभी दो छोटे बच्चे मेरे पास आए। उनकी मासूम आँखों में थकान और समस्याओं से जूझते बचपन की कहानी साफ झलक रही थी। उनके नन्हें हाथों में पेन के कुछ पैकेट थे। वे मेरे पास आए और मुझसे पेन खरीदने […]

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अंधेरे में भविष्य की तलाश में: धार्मिक स्थलों पर रार, चुप क्यों है मोदी सरकार

देश से क्या छुपाना चाहते हैं? नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और नई बनी सांसद एवं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को संभल जाने से क्यों रोका जा रहा है? भाईचारे का पैगाम देने, शांति की अपील करने, पुलिस गोली से मारे गए लोगों के परिवारों का सांत्वना देने अगर कोई संभल जाना चाहता है तो इससे […]

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क्या हुआ तेरा वादा: न हाई कोर्ट बेंच मिली न हरित प्रदेश, आगरा के हाथ खाली

बृज खंडेलवाल वर्षों से चले आ रहे वकीलों के आंदोलन और निरंतर की जा रही मांगों के बावजूद, आगरा में उच्च न्यायालय की पीठ स्थापित करने की कोई संभावना नहीं दिख रही है। जसवंत सिंह कमिशन ने ताज के शहर में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की सिफारिश की थी, जिसके लिए बीजेपी नेता खुद सालों […]

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आप ही हैं अपने मददगार: खुद में वो बदलाव लाएं जिसकी अपेक्षा आप दूसरों से कर रहे हैं….

जीवन एक ऐसी अनोखी पाठशाला है, जहाँ हर दिन कुछ नया सीखने का अवसर मिलता है। ये पाठशाला एक आम पाठशाला की तरह ही समय-समय पर परीक्षाएं लेती है। आपकी मेहनत के अनुसार ही आपको अच्छे या बुरे परिणाम देती है। एक सामान्य पाठशाला में अपनी पढ़ाई के सफ़र में आपको कई लोग मिलते है, […]

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वाहनों की पार्किंग के संकट से जूझते शहर

डॉ सत्यवान सौरभ यह ज़रूरी नहीं है कि अच्छा सार्वजनिक परिवहन यातायात की भीड़ को काफ़ी कम कर दे। भीड़भाड़ की स्थिति में सुधार करने के लिए, शहरों को निजी कारों के स्वामित्व और उपयोग के कार्यात्मक, मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक मूल्यों को लक्षित करने वाली गतिविधियों के साथ ही अपनी सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों को बेहतर […]

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