शहरीकरण और सामाजिक संकट: भीड़ में बढ़ता अकेलापन

डॉ सत्यवान सौरभ सबसे बड़ी चुनौती है सामुदायिक बंधनों का क्षरण। गाँवों में जहाँ पड़ोसियों और रिश्तेदारों के बीच गहरे संबंध होते हैं, वहीं शहरों में रहने वाले लोग अक्सर अनजानेपन और दूरी का अनुभव करते हैं। गेटेड सोसाइटी और उच्च-आय वर्गीय कॉलोनियों ने सामाजिक जीवन को खंडित कर दिया है। लोग अपने छोटे-से घेरे […]

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हिमालय के रहस्यमयी खोजी की 200वीं पुण्यतिथि: विलियम मूरक्रॉफ्ट की अनसुलझी धरोहर पर महत्वपूर्ण संगोष्ठी

हिमालय की गहराइयों और इतिहास के रहस्यों से जुड़े ब्रिटिश खोजी विलियम मूरक्रॉफ्ट की 200वीं पुण्यतिथि पर पहाड़ संस्था ने एक विशेष ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित की। कार्यक्रम में इतिहास, संस्कृति और दस्तावेजों से जुड़े अनुत्तरित प्रश्नों पर विद्वानों ने गहन विमर्श किया। पहाड़ संस्था का ऑनलाइन आयोजन नैनीताल स्थित पहाड़ संस्था (People’s Association for Himalayan […]

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भारत की चिप क्रांति: छलावा या हकीकत?

भारत में चिप क्रांति का सपना बड़ा दिखाया जा रहा है, लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह महज भाषणों और दावों तक ही सीमित है? प्रधानमंत्री के घोषणाओं में जो स्वदेशी चिप, ‘विक्रम’ लॉन्च की गई, वह तकनीकी उपलब्धि हो सकती है, लेकिन उससे जुड़े बड़े सवाल और असफलताएं उजागर होती हैं, जिन्हें सरकार […]

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खतरनाक मौसम में भी स्कूल खुले क्यों?

“बच्चों की सुरक्षा बनाम औपचारिकता का सवाल: जर्जर स्कूल भवन, प्रशासन की संवेदनहीनता और बाढ़-गंदगी के बीच पढ़ाई नहीं, जीवन की रक्षा पहली प्राथमिकता – आपदा में भी आदेशों की राजनीति क्यों?” डॉ सत्यवान सौरभ बारिश और बाढ़ की स्थिति में बच्चों और शिक्षकों को स्कूल बुलाना उनकी जान से खिलवाड़ है। जर्जर इमारतें, गंदगी, […]

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शिक्षक दिवस विशेष: किताबों से स्क्रीन तक… बदलते समय में गुरु का असली अर्थ

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार डिजिटल युग में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। किताब से लेकर स्क्रीन तक की यह यात्रा ज्ञान तो दे रही है, लेकिन संस्कार और मानवीय मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं। ऐसे समय में शिक्षक का महत्व और भी बढ़ जाता है। शिक्षक ही वह […]

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गुरुकुल से स्मार्ट क्लास तक: हर युग में शिक्षक रहे प्रासंगिक शिक्षक दिवस पर विशेष

नई दिल्ली, 5 सितंबर। आज जब पूरा देश शिक्षक दिवस मना रहा है, तब यह प्रश्न और भी प्रासंगिक हो जाता है कि क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल उपकरणों के इस दौर में शिक्षक की भूमिका कम हो रही है? तकनीक ने शिक्षा को सरल और सुलभ तो बनाया है, लेकिन क्या यह गुरु-शिष्य […]

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कोलकाता का साहित्य महोत्सव विवाद: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम कट्टरपंथ

एड.संजय पांडे(वकील, मुंबई उच्च न्यायालय) 31 अगस्त से 3 सितम्बर के बीच, कोलकाता के अकादमी दफ़्तर, रफ़ी अहमद किदवई रोड, कला मंदिर में ‘उर्दू का हिंदी सिनेमा में योगदान’ विषय पर कार्यक्रम रखा गया था। इसमे मुशायरा, फ़िल्म स्क्रीनिंग, संगोष्ठियाँ होने थे। मुशायरे के मुख्य अध्यक्ष व अतिथि प्रसिद्ध गीतकार, कवि और पटकथा लेखक जावेद […]

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गुड़गांव बनाम नोएडा, ग्रेटर नोएडा : विकास की जंग

गुड़गांव आर्थिक शहर है। उत्तर भारत का बिजनेस हब हैं। इसमें दुनियां भर की मल्टीनेशनल कंपनियों के ऑफिस हैं। इस शहर में अंतर राज्य वाली दिल्ली मेट्रो है, शहर के अंदर के लिए लोकल मेट्रो है, हाइवे है गगनचुंबी ऑफिस हैं। गुड़गांव हरियाणा में सबसे ज्यादा राजस्व कमाने वाला शहर है। यहां कुछ एरिया में […]

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न्यायालय की फटकार और डॉक्टरों की लिखावट

“जहाँ पर्ची के हर अक्षर स्पष्ट होंगे, वहीं मरीज का जीवन और अधिकार सुरक्षित रहेंगे।” डॉ सत्यवान सौरभ “पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का हालिया आदेश एक मील का पत्थर है। अदालत ने डॉक्टरों को साफ और स्पष्ट पर्ची लिखने का निर्देश देकर सीधे मरीज के जीवन और अनुच्छेद 21 से इसे जोड़ा है। यह आदेश केवल लिखावट […]

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शब्दों का कारोबार: जब माँ पर शुरू हुई राजनीति….

आगरा बीजेपी महिला मोर्चा ने शुरू की राजनीति, कॉग्रेस कार्यालय को घेरने की नकाम कोशिश कहां माफी मांगे राहुल नहीं तो देश में रहने नहीं दिया जाएगा: देश से निकलाना हुआ इतना आसान की अब बीजेपी कार्यकर्ता निकाल देगे देश से बाहर चुनाव का मौसम आते ही देश में हर बात, हर बयान, और हर […]

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