सोशल मीडिया का मायाजाल: डोपामाइन, आत्म-चेतना और FOMO की बढ़ती जकड़न, जानिए क्या करें

  डॉ प्रमोद कुमार 21वीं सदी में मानव जीवन का सबसे बड़ा हिस्सा डिजिटल तकनीक और इंटरनेट से संचालित हो रहा है। आज के दौर में संचार, शिक्षा, व्यापार, मनोरंजन और सामाजिक संबंधों का सबसे प्रमुख माध्यम सोशल मीडिया बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (अब एक्स), टिकटॉक, स्नैपचैट और यूट्यूब जैसी एप्लिकेशन न केवल […]

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तीन: बचपन की गलियों से गुजरती एक किताब

अमित श्रीवास्तव की ‘तीन’ महज़ एक किताब नहीं, बल्कि बीते समय का एक दरवाज़ा है। यह वह दरवाज़ा है, जिसे खोलते ही पाठक कस्बाई जीवन की गलियों में लौट जाते हैं। वह दौर जब मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन दोस्तों के साथ खेलना था, जब घर की रसोई की खुशबू ही सबसे बड़ी दावत होती […]

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पूर्वाग्रह से परे: दिव्यांगजन के अधिकारों पर नई बहस

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार भारत में करोड़ों दिव्यांगजन आज भी शिक्षा, रोज़गार, स्वास्थ्य और सार्वजनिक जीवन में हाशिए पर हैं। संवैधानिक अधिकारों और 2016 के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के बावजूद सामाजिक पूर्वाग्रह, ढांचागत बाधाएँ और मीडिया में विकृत छवि उनकी गरिमा को चोट पहुँचाती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा है कि […]

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संयुक्त परिवार से एकल परिवार तक: क्यों माँ बन रही है प्रसूता की पहली मददगार”

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार  अध्ययन बताते हैं कि प्रसव के बाद महिलाओं की देखभाल करने में सास की तुलना में उनकी अपनी माँ कहीं अधिक सक्रिय और संवेदनशील रहती हैं। लगभग 70 प्रतिशत प्रसूताओं को नानी से बेहतर सहयोग मिला, जबकि मात्र 16 प्रतिशत को सास से सहायता मिली। यह बदलाव संयुक्त […]

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पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण: सांस्कृतिक संरक्षण से राष्ट्रीय पुनर्जागरण तक

डॉ सत्यवान सौरभ भारत की प्राचीन पांडुलिपियाँ केवल कागज़ पर लिखे शब्द नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की आत्मा हैं। इनमें विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन और कला का अनमोल खजाना है। उपेक्षा और उपनिवेशकाल की लूट ने इन्हें खतरे में डाल दिया। प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान कि पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण “बौद्धिक चोरी” को रोकेगा, समयानुकूल है। डिजिटलीकरण […]

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हाथी प्रशंसा दिवस 2025: प्रकृति के सौम्य और अद्भुत जीव के सम्मान का जश्न

हर साल, दुनिया 22 सितंबर को हाथी प्रशंसा दिवस मनाती है। इस वर्ष, वाइल्डलाइफ एसओएस पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में हाथियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, इनके शोषण और दुर्व्यवहार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान करता है। हाथी जंगल के इंजीनियर हैं, जो भूदृश्यों को आकार देते हैं और बीज बिखेरते […]

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डॉ नरेंद्र मल्होत्रा: ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ नारा के प्रवर्तक, अब कहते हैं, ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ बेटा समझाओ’, पढ़िए रोमांचक परिचय

“प्रकाशपुंज डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा: एक जीवन, अनगिनत प्रेरणाएँ” डॉ. भानु प्रताप सिंह (NM@2AM के लेखक) परिचय का सौभाग्य आज मैं जिस महापुरुष का परिचय देने के लिए यहाँ खड़ा हूँ, वह कार्य मेरे लिए केवल सौभाग्य नहीं बल्कि जीवन का गर्व भी है। किसी शायर ने कहा है— “ज़िंदगी जि़स्त नहीं, ज़िम्मेदारी है, जो इसे […]

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साहसिक निर्णय और अद्भुत नेतृत्व – मोदी जी के 75 वर्ष

माना अंधेरा घना है लेकिन दिया जलाना कहाँ मना है…आज हम देश के प्रधानमंत्री, देश ही नहीं विश्व के गौरवशाली नेतृत्व का जन्मदिन मना रहे है। 2012 में बैंक ऑफ इंडिया के जोनल मैनेजर श्री सिंगला मुझसे मिलने आए, बातचीत में मैंने पूछा इससे पहले आप कहाँ थे, उन्होंने बताया अभी लुधियाना से आया हूँ, […]

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जनरेशन-जी से लेकर जनरेशन अल्फा तक: समय के साथ बदलती पीढ़ियाँ और उनका समाज पर असर

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार समय और समाज के बदलते माहौल के साथ हर पीढ़ी की सोच, जीवनशैली और चुनौतियाँ बदलती हैं। ग्रेटेस्ट जनरेशन और साइलेंट जनरेशन ने युद्ध और कठिनाई का सामना किया। बेबी बूमर्स ने औद्योगिकीकरण देखा, जेन-एक्स ने तकनीकी शुरुआत अनुभव की, और मिलेनियल्स ने इंटरनेट और वैश्वीकरण के साथ […]

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शिक्षक सम्मान: सच्चे समर्पण की पहचान और पारदर्शिता की आवश्यकता

प्रियंका सौरभ स्वतंत्र पत्रकार, कवयित्री और व्यंग्यकार सच्चे पुरस्कार का मूल्य उस कार्य में निहित है, जो किसी व्यक्ति ने समाज और समुदाय के लिए किया है। पुरस्कार का असली उद्देश्य किसी की व्यक्तिगत पहचान या नौकरी बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए। इसके बजाय, यह उन लोगों को सम्मानित करना चाहिए, जो समाज में […]

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