आगरा: आगरा जनपद ने टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत पूरे उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल करके एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त की है। टीबी नोटिफिकेशन के मामले में भी आगरा पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर है, जो कि एक बड़ी सफलता है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता के अनुसार, वर्ष 2025 में आगरा में कुल 30518 टीबी मरीज नोटिफाई हुए थे, जिनमें 17085 पुरुष और 13421 महिलाएं हैं। इसके अलावा, जनपद में कुल 47 ग्राम पंचायत टीबी मुक्त हो चुकी हैं।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि विश्व क्षय रोग दिवस (24 मार्च) के अवसर पर जनपद में टीबी उन्मूलन को लेकर व्यापक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इस वर्ष की थीम “हाँ! हम टीबी को खत्म कर सकते हैं” जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में 30356, वर्ष 2024 में 29837 और वर्ष 2023 में 25531 क्षय रोगियों की पहचान की गई। वहीं वर्ष 2026 में अब तक 6481 से अधिक मरीज चिन्हित किए जा चुके हैं। मरीजों की पहचान के लिए जिले में उच्च जोखिम समूहों में स्क्रीनिंग, एक्स-रे जांच, घर-घर संपर्क और जनजागरूकता कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है।
डीटीओ ने बताया कि जनपद में कुल 3068 निक्षय मित्रों के द्वारा टीबी मरीजों का भावात्मक सहयोग किया जा रहा है। माह जनवरी 2026 से अब तक कुल 4381 पोषण पोटली का वितरण किया जा चुका है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। टीबी उन्मूलन की राह में अभी भी जागरूकता की कमी, सामाजिक झिझक और अधूरा उपचार जैसी चुनौतियां मौजूद हैं।
उन्होंने बताया कि जनपद में 215 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 53 डेजिग्नेटेड माइक्रोस्कोपी सेंटर (डीएमसी), 26 टीबी यूनिट, 44 प्राइमरी हेल्थ इंस्टीट्यूट (पीएचआई) और 30 अर्बन पीएचसी पर हर माह की 15 तारीख को निक्षय दिवस मनाया जाता है। निक्षय दिवस में टीबी रोग के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है, टीबी जैसे लक्षणों वाले रोगियों की टीबी स्क्रीनिंग की जाती है, और जिन लोगों में टीबी की पुष्टि होती है, उनका उपचार शुरू किया जाता है। इसके साथ ही उनके परिवार के सदस्यों की भी टीबी स्क्रीनिंग की जाती है, जिससे कि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। सीएमओ ने बताया कि अगर समय पर जांच और पूरा उपचार सुनिश्चित किया जाए, तो टीबी को हराना संभव है।
टीबी मुक्त भारत अभियान: जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
एसएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट विभाग द्वारा विश्व क्षय रोग दिवस के संदर्भ में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें टीबी मरीजों और उनके तीमारदारों सहित 500 लोगों को टीबी के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में टीबी क्या है, टीबी का उपचार और सोशल स्टिग्मा के बारे में जानकारी दी गई, जिससे लोग टीबी के प्रति जागरूक हो सकें और समय पर इलाज करवा सकें।
श्वसन चिकित्सा विभाग, एस. एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा के प्रो. (डॉ.) संतोष कुमार ने बताया कि ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है। यह ट्युबरकुलोसिस बैक्टीरिया से होती है। टीबी दो तरह की होती है। 1. पल्मोनरी टीबी ( फेफड़ों की टीबी ) 2. एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी बाल और नाखून को छोड़कर शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। इसमें केवल फेफड़ों की टीबी संक्रामक होती है। उन्होंने बताया कि टीबी का उपचार पूरी तरह संभव है।
उन्होंने आगरा की जनता से अपील करते हुए कहा है कि टीबी मरीजों से बिल्कुल भेदभाव न करें। टीबी के लक्षण होने पर छुपाएं नहीं, टीबी एक आम बीमारी है जिसका इलाज पूरी तरह संभव है। सभी सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों पर निशुल्क इलाज का प्रावधान है। टीबी मरीज के साथ बैठने, उठने, खाना खाने से टीबी नहीं फैलता है। टीबी मरीज को मास्क लगाना चाहिए, अगर मास्क नहीं उपलब्ध है तो खांसते समय या छींक आने पर रुमाल या गमछा का उपयोग करें। इससे संक्रमण दूसरों में फैलने से रोकने में मदद मिलेगी।
टीबी मुक्त भारत अभियान का हिस्सा बनें, समाज में टीबी मरीजों के प्रति जो सोशल स्टिग्मा है, उसको दूर करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। हम इस कर्तव्य का पालन करेंगे तो टीबी को मात देकर टीबी मुक्त भारत बनाने में कामयाब हो पाएंगे।
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