डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा प्रो. लवकुश मिश्रा को अटल बिहारी वाजपेई राष्ट्रीय सम्मान–2025

Education/job

आगरा विश्वविद्यालय के लिए गौरव का ऐतिहासिक क्षण

Live Story Time, Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat.

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा Agra University Agra के पर्यटन एवं होटल प्रबंधन संस्थान के
प्रोफेसर लवकुश मिश्रा को अटल बिहारी वाजपेई राष्ट्रीय सम्मान–2025
से दिल्ली के होटल हॉलिडे इन में भव्य समारोह के दौरान सम्मानित किया गया।
यह सम्मान शिक्षा एवं संस्कृति संवर्धन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।
यह उपलब्धि न केवल प्रो. मिश्रा की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि
आगरा विश्वविद्यालय की वैश्विक प्रतिष्ठा
को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली है।

तीन दशकों से साहित्य-संस्कृति की सेवा में ‘उद्भव’

साहित्य एवं संस्कृति के संवर्धन को समर्पित संस्था
‘उद्भव’
विगत 30 वर्षों से देशभर की विभिन्न विधाओं की प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित करती आ रही है।
इसी क्रम में इस वर्ष अटल बिहारी वाजपेई राष्ट्रीय सम्मान
की शुरुआत की गई, जिसका प्रथम सम्मान प्रोफेसर लवकुश मिश्रा को प्रदान किया जाना
इस सम्मान की गरिमा को और भी बढ़ाता है।

गरिमामयी अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
दिल्ली सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं यमुनापार विकास बोर्ड के अध्यक्ष
श्री लवली सिंह रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति
प्रोफेसर बलदेव भाई शर्मा
ने की। मंच की गरिमा और विचारों की ऊंचाई ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

राष्ट्रहित में बौद्धिक वर्ग का आह्वान

अपने संबोधन में श्री लवली सिंह ने देश के सभी बुद्धिजीवियों से
राष्ट्रहित में निरंतर कार्य करने
का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज और देश की दिशा तय करने में
बौद्धिक वर्ग की भूमिका सर्वोपरि है।

शब्द, साहित्य और संस्कृति का दर्शन

प्रोफेसर बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि
“शब्द ही ब्रह्म है”
और साहित्य व संस्कृति मनुष्यत्व के निर्माण की आधारशिला हैं।
उनका कहना था कि बिना सांस्कृतिक चेतना के कोई भी राष्ट्र दीर्घकालिक प्रगति नहीं कर सकता।

प्रो. लवकुश मिश्रा का विचारोत्तेजक वक्तव्य

सम्मान ग्रहण करते हुए प्रोफेसर लवकुश मिश्रा ने कहा कि जिन देशों ने
अपनी संस्कृति और विरासत की उपेक्षा
की, उन्होंने अपने पूर्वजों की मूर्तियों को बारूद से उड़ा दिया और आज
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कटोरा लेकर खड़े हैं।
उन्होंने अफगानिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वहां भगवान बुद्ध की मूर्तियों का संरक्षण किया गया होता,
तो पर्यटन के माध्यम से देश समृद्ध बन सकता था।

भारत की सांस्कृतिक शक्ति और आर्थिक योगदान

प्रो. मिश्रा ने कहा कि भारत में
अयोध्या, काशी, केदारनाथ
सहित अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल हैं, जो आज
देश की आर्थिक प्रगति में बहुमूल्य योगदान
दे रहे हैं। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति का जीवंत उदाहरण है।

देशभर के बुद्धिजीवियों की उल्लेखनीय मौजूदगी

कार्यक्रम का संचालन डॉ. विवेक गौतम
ने किया। इस अवसर पर रेनू हुसैन, मधु चतुर्वेदी, अशोक पांडे, इंद्रजीत सिंह,
अशोक ढौंडियाल, प्रोफेसर उमापति दीक्षित, राकेश गौतम सहित
देशभर के अनेक प्रतिष्ठित बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।

संपादकीय

प्रोफेसर लवकुश मिश्रा आज केवल एक शिक्षाविद नहीं, बल्कि आगरा विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान के सशक्त प्रतिनिधि बन चुके हैं।
शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन को एक सूत्र में पिरोकर जिस तरह वह भारत की सांस्कृतिक शक्ति को विश्व मंच पर स्थापित कर रहे हैं,
वह निस्संदेह प्रशंसनीय है।

उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि आगरा विश्वविद्यालय का नाम पूरे संसार में रोशन किया जा सकता है—बस दृष्टि बड़ी और संकल्प अडिग होना चाहिए।

डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक

Dr. Bhanu Pratap Singh