आगरा। तीन दिन से जहां उत्सव और उत्साह का माहौल था, वहां आज उदासी छा गई। प्रभु श्रीराम संग आज सीता जी की विदाई हो गई। जनकमहल में हल्दी के थापे और जौ उछालकर जनकदुलारी मिथिलानगरी में हमेशा सम्पन्नता और वैभवता को बरकरार रखने की कामना के साथ अयोध्या विदा हो गईं और पीछे रह गए रोते बिलखते मिथिलावासी।
सीता जी की विदाई ने आज जनकपुरी के हर व्यक्ति की आंखों को नम कर दिया। वहीं राजा जनक (प्रमोद वर्मा) व रानी सुनयना (मंजु वर्मा) का हृदय बेटी की विदाई की घड़ी नजदीक आने के कारण मुख्य मंच पर बारातियों की मिलनी के समय से ही उदास हो गया।
तीन दिन से जिस मिथिलानगरी में खुशियां छायी थीं, आज व्याकुलता थी। रोशनी की चकाचौंध तो थी, लेकिन न तो चेहरों पर हंसी थी और न ही हृदय में प्रसन्नता।
इस अवसर पर मुख्य रूप से जनकपुरी महोत्सव समिति के अध्यक्ष गौरव अग्रवाल, गौरव राजावत, राहुल चतुर्वेदी, हेमन्त भोजवानी, राजीव शर्मा, अनुराग उपाध्याय, मुनेन्द्र जादौन, राहुल सागर, निशान्त चतुर्वेदी आदि उपस्थित थे।
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