आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा के टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष एवं देश के प्रख्यात श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह को पोस्ट-टीबी लंग डिज़ीज़ पर किए गए उनके महत्वपूर्ण शोध कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। इंडियन चेस्ट सोसाइटी (आईसीएस) द्वारा पटना स्थित सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन पल्मोनरी डिज़ीज़ेज़ (NAPCON 2025) के दौरान उन्हें डॉ. सी. वी. रामकृष्णन ओरेशन अवार्ड–2025 प्रदान किया गया।
यह प्रतिष्ठित सम्मान बिहार के माननीय राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा देश-विदेश से आए वरिष्ठ चिकित्सकों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति में प्रदान किया गया। इस अवसर पर डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने “पोस्ट-टीबी लंग डिज़ीज़: भारत के एंड टीबी मिशन के लिए एक छुपी हुई महामारी” विषय पर अपना ओरेशन प्रस्तुत किया। उनके व्याख्यान को चिकित्सा जगत ने वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत सशक्त और जनस्वास्थ्य के लिए अत्यधिक प्रासंगिक बताया।
डॉ. सिंह लंबे समय से पोस्ट-टीबी लंग डिज़ीज़ से पीड़ित मरीजों के निदान, उपचार और दीर्घकालिक देखभाल से जुड़े शोध कार्यों में सक्रिय हैं। इस क्षेत्र में उन्हें देश के अग्रणी विशेषज्ञों में गिना जाता है। उनके शोध कार्यों ने पोस्ट-टीबी फेफड़ों की जटिलताओं को समझने और उनके प्रभावी प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह को इससे पूर्व भी कई प्रतिष्ठित ओरेशन अवार्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2019 में नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिज़िशियन्स, इंडिया (NCCP-I) द्वारा कोच्चि में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में तथा वर्ष 2024 में ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (TAI) द्वारा जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में भी उन्हें उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए ओरेशन अवार्ड प्रदान किया गया था।
एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा के प्रिंसिपल डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस उपलब्धि पर डॉ. सिंह को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान आगरा शहर, राज्य और मेडिकल कॉलेज के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह की उपलब्धि संस्थान की शैक्षणिक और शोध परंपरा को और मजबूत करती है।
यह सम्मान न केवल डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि देश में पोस्ट-टीबी लंग डिज़ीज़ के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भारत के एंड टीबी मिशन को सशक्त करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डॉ. सिंह ने इस सम्मान के लिए इंडियन चेस्ट सोसाइटी, चयन समिति, अपने गुरुओं, सहयोगियों और संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया।
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