आगरा। ‘परोपकार’ की भावना से ओत-प्रोत रोशनलाल पंजवानी (83) ने न केवल अपना जीवन गरिमा के साथ जिया, बल्कि जाते-जाते भी मानवता की सेवा का एक अनुकरणीय उदाहरण छोड़ गए। कमलानगर निवासी स्वर्गीय पंजवानी ने अपनी अंतिम इच्छा के अनुरूप नेत्रदान और देहदान कर समाज के लिए एक प्रेरणादायक विरासत छोड़ी है। उनकी यह पहल मृत्यु के बाद भी दो जिंदगियों में रोशनी भरने और चिकित्सा शिक्षा को समृद्ध बनाने का माध्यम बनी है।
दृष्टिहीनों के जीवन में आएगा उजाला
बुधवार शाम उनके निधन के उपरांत, परिजनों ने त्वरित निर्णय लेते हुए उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करने का बीड़ा उठाया। परिवार की सदस्य डॉ. सुनीता पंजवानी ने एस.एन. मेडिकल कॉलेज की नेत्र बैंक प्रभारी डॉ. शेफाली मजूमदार से संपर्क किया। ‘हेल्प आगरा’ के सहयोग से टीम ने सफलतापूर्वक उनके नेत्रों से कॉर्निया प्राप्त की। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कॉर्निया अब दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों की आंखों में प्रत्यारोपित की जाएगी, जिससे उनके जीवन में नई रोशनी का संचार होगा।
चिकित्सा विज्ञान को समर्पित पार्थिव शरीर
गुरुवार दोपहर को रोशनलाल पंजवानी की अंतिम यात्रा एक शवयात्रा के बजाय ‘मानव सेवा’ के संदेश के रूप में निकली। उनके पार्थिव शरीर को एस.एन. मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ. अंजली शर्मा को विधिवत सुपुर्द किया गया। देहदान का यह पुनीत कार्य भावी चिकित्सकों के प्रशिक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे छात्रों को मानव शरीर रचना का सूक्ष्म अध्ययन करने और बेहतर चिकित्सक बनने में मदद मिलती है।
हेल्प आगरा की भावभीनी श्रद्धांजलि
इस संवेदनशील अवसर पर ‘हेल्प आगरा’ के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन, महासचिव गौतम सेठ और मीडिया प्रभारी नंदकिशोर गोयल ने दिवंगत आत्मा को नमन करते हुए पंजवानी परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
संस्था के पदाधिकारियों ने समाज के अन्य लोगों से भी इस नेक कार्य से जुड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देहदान और नेत्रदान मानवता की सेवा के उच्चतम सोपान हैं, जो व्यक्ति के शरीर के नष्ट होने के बाद भी उसके अस्तित्व को परोपकार के माध्यम से जीवित रखते हैं।
रोशनलाल पंजवानी का यह निर्णय निश्चित रूप से आगरा समाज के लिए एक मील का पत्थर है, जो आने वाली पीढ़ियों को निस्वार्थ सेवा का मार्ग दिखाएगा।
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