आगरा: जनपद में गुरुवार को राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत। विभिन्न स्थानों पर 513 छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) और यूएचएसएनडी सत्र का आयोजन किया गया। इनमें शून्य से पाँच साल तक के बच्चों का नियमित टीकाकरण किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण करने का प्रावधान है। यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए और उनके भविष्य के लिए टीकाकरण बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे उन्हें 11 जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सकता है। सीएमओ ने जनपद के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग अपने शून्य से पांच साल तक के बच्चों का टीकाकरण अवश्य कराएं और अपने पड़ोसियों व रिश्तेदारों को भी इसके लिए प्रेरित करें। सीएमओ ने कहा कि सभी एएनएम सत्र के दौरान अपने साथ टीकाकरण चक्र को रखें । इसकी सहायता से लोगो को टीकाकरण के लाभ बताएं और उन्हें अपने शून्य से पाँच साल के बच्चों का टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित करें।
तहसील किरावली के व्यापार मोहल्ले में आयोजित 4 सत्रों का जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव वर्मन और विश्व स्वास्थ्य संगठन की एसएमओ डॉ. महिमा चतुर्वेदी द्वारा सहयोगात्मक पर्यवेक्षण किया गया। इस दौरान टीकाकरण कराने से इनकार करने वाले (वैक्सीन अवॉइडेंस बिहैवियर) के परिवारों को टीकाकरण के लाभ बताए गए और उन्हें समझाया गया कि। टीकाकरण कराने से कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होता है। यह स्वास्थ्य के लिए अति आवश्यक है। इसके बाद इन परिवारों ने अपने बच्चों का टीकाकरण कराया। आयोजित सत्रों पर शून्य से पांच वर्ष तक के 105 बच्चों का टीकाकरण किया गया ।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि हमारे जनपद में नियमित टीकाकरण, माइग्रेशन परिवारों और टीकाकरण से वंचित वैब (वैक्सीन अवॉइडेंस बिहैवियर) झिझक,उदासीन, प्रतिरोधी परिवारों को मोबिलाइज कर टीकाकरण कराने के लिए राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार और शनिवार को छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) और यूएचएसएनडी सत्र का आयोजन किया जाता है। आयोजित सत्र स्थल पर प्रशिक्षित एएनएम और आशा कार्यकर्ता के द्वारा शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को 11 जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण किया जाता हैं।
यह प्रमुख टीके हैं जो बच्चों को दिए जाते हैं-
o जन्म पर बीसीजी (टीबी के खिलाफ), ओपीवी (पोलियो के खिलाफ),हेपेटाइटिस-बी (हेपेटाइटिस-बी के खिलाफ)
o 6 सप्ताह पर ओपीवी (पोलियो के खिलाफ), पेंटावैलेंट (डिप्थीरिया, टेटनस, पर्टुसिस, हीमोफिलस इन्फ्लूएंजा टाइप बी, और हेपेटाइटिस-बी के खिलाफ), रोटावायरस वैक्सीन (रोटावायरस के खिलाफ), पीसीवी (न्यूमोकोकल के खिलाफ)
o 10 सप्ताह पर ओपीवी (पोलियो के खिलाफ), पेंटावैलेंट (डिप्थीरिया, टेटनस, पर्टुसिस, हीमोफिलस इन्फ्लूएंजा टाइप बी, और हेपेटाइटिस-बी के खिलाफ), रोटावायरस वैक्सीन (रोटावायरस के खिलाफ), पीसीवी (न्यूमोकोकल के खिलाफ)
o 14 सप्ताह पर ओपीवी (पोलियो के खिलाफ), पेंटावैलेंट (डिप्थीरिया, टेटनस, पर्टुसिस, हीमोफिलस इन्फ्लूएंजा टाइप बी, और हेपेटाइटिस-बी के खिलाफ), रोटावायरस वैक्सीन (रोटावायरस के खिलाफ), पीसीवी (न्यूमोकोकल के खिलाफ)
o 9-12 महीने पर खसरा और रूबेला (एमएमआर) वैक्सीन, न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन
o 16-24 महीने पर एमएमआर वैक्सीन की दूसरी खुराक, वार्षिक इन्फ्लूएंजा वैक्सीन यह टीके बच्चों को खतरनाक बीमारियों से बचाने में मदद करते है।
o 9 महीने और 16-24 महीने पर विटामिन ए प्रोफिलैक्सिस दिया जाता है
टीकाकरण के लाभ-
– बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाव
– गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए तैयारी
– समाज में बीमारियों को फैलने से रोकथाम
– टीकाकरण के लिए हमारी जिम्मेदारी:
– गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करें
– टीकाकरण केंद्रों पर जाने में मदद करें
– समाज में टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाएं
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