राजा मानसिंह को गद्दार सिद्ध करने पर एक करोड़ का इनाम, ताजमहल वास्तव में ‘मानमहल’, राजा मानसिंह ने अकबर के शासनकाल में 7000 मंदिर बनवाए, 123 युद्ध लड़े और जीते

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आगरा में इतिहास का पुनर्पाठ: राजा मानसिंह आमेर पर उठे सवालों को खुली चुनौती

गद्दार’ नहीं गौरव: आगरा में राजा मानसिंह आमेर के पक्ष में ऐतिहासिक हुंकार

राजा मानसिंह ने होते तो हम सब इमामुद्दीन, शाहरुख, फारुख होतेः नरेंद्र सिंह निबोड़ा

अफ़गानों से तोपें लेकर आए और आमेर के किले पर आज भी देख सकते हैं- प्रो. बीडी शुक्ला

अफगानिस्तान में उन्हें हिंदू सरदार-ए-आज़म” और  मंसूर-ए-हिंद” की उपाधि से अलंकृतः डॉ. भानु प्रताप सिंह

गोवर्धन परिक्रमा में सात बार नो त्योहार का चलन और बृज में बंडी का चलन कियाः मधुकर चतुर्वेदी

राजा मानसिंह ने सनातन धर्म की रक्षा की, हिंदुओं को गोल टोपी लगाने से बचायाः प्रो. कमल किशोर

कोई मेरे बाप यानी राजा मानसिंह को गाली देगा तो बर्दाश्त नहीं करेंगेः गिर्राज सिंह कुशवाहा

आगरा में शिवाजी म्यूजियम भी राजा मानसिंह की जमीन पर बन रहाः रीना सिंह राष्ट्रीय प्रभारी

 

डॉ. भानु प्रताप सिंह

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Agra, Uttar Pradresh, India, Bharat. राजा मानसिंह आमेर फाउंडेशन द्वारा आगरा में पहली बार आयोजित भव्य समारोह ने इतिहास, राष्ट्र और सनातन चेतना से जुड़े अनेक प्रश्नों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इतिहास की प्रचलित धारणाओं को चुनौती देने वाला वैचारिक मंच बनकर उभरा। समारोह में वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में उन लोगों को खुली चुनौती दी, जो राजा मानसिंह आमेर को ‘गद्दार’ कहकर इतिहास को विकृत करने का प्रयास करते हैं। मंच से घोषणा की गई कि यदि कोई भी व्यक्ति प्रामाणिक ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर राजा मानसिंह को गद्दार सिद्ध कर दे, तो उसे एक करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। इसी क्रम में जगद्गुरु रामभद्राचार्य को भी सार्वजनिक बहस की चुनौती दी गई।

वक्ताओं ने कहा कि राजा मानसिंह का जीवन सनातन धर्म के प्रति गहन आस्था और समर्पण का प्रतीक था। उन्होंने धर्म-प्रचार के लिए अपना एक पुत्र गोस्वामी तुलसीदास को सौंप दिया—यह तथ्य भारतीय इतिहास में त्याग और विश्वास का दुर्लभ उदाहरण माना गया।

राजा मानसिंह की वीरता का उल्लेख करते हुए बताया गया कि उन्होंने 123 युद्ध लड़े और सभी में विजय प्राप्त की। वे तोपों के साथ युद्धभूमि में उतरे और सैन्य रणनीति में नए मानक स्थापित किए। उनकी ख्याति भारत की सीमाओं से बाहर तक फैली और अफगानिस्तान में उन्हें हिंदू सरदार-ए-आज़म” तथा मंसूर-ए-हिंद” जैसी उपाधियों से अलंकृत किया गया।

संगोष्ठी का शुभारंभ करते अतिथि।

यह भी कहा गया कि अकबर के शासनकाल में राजा मानसिंह के संरक्षण में लगभग 7000 मंदिरों का निर्माण हुआ। उन्होंने जगन्नाथ पुरी में मस्जिद बनने से रोककर सनातन आस्था की रक्षा की। वक्ताओं के अनुसार राजा मानसिंह का शासन न तो तुष्टिकरण पर आधारित था और न ही धार्मिक भेदभाव पर। उन्होंने न किसी हिंदू राजा का वध किया और न ही केवल धर्म के आधार पर मुस्लिम शासकों को छोड़ा।

इतिहास के एक महत्वपूर्ण प्रसंग का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हल्दीघाटी युद्ध के बाद भी राजा मानसिंह ने महाराणा प्रताप को जीवित जाने दिया, जो उनके चरित्र में निहित मानवता और मर्यादा का प्रमाण है।

वृंदावन में राजा मानसिंह द्वारा निर्मित गोविंददेव मंदिर को उनकी धार्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक बताया गया। मंच से यह मांग भी उठी कि मंदिर के वे तीन शिखर पुनः निर्मित किए जाएं, जिन्हें औरंगजेब द्वारा तोड़ दिया गया था। राजा मानसिंह न होते तो हम सब इमामुद्दीन, शाहरुख, फारुख होते।

समारोह में यह भी कहा गया कि जिन्हें राजा मानसिंह से आपत्ति है, वे अयोध्या, मथुरा, काशी और पुरी जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों में जाना छोड़ दें, क्योंकि इन पवित्र स्थलों के संरक्षण और विकास में राजा मानसिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने यह दावा दोहराया कि ताजमहल वास्तव में ‘मान महल’ है, जिसे इतिहास में जानबूझकर भिन्न रूप में प्रस्तुत किया गया। कुल मिलाकर यह आयोजन राजा मानसिंह आमेर के व्यक्तित्व और कृतित्व के पुनर्मूल्यांकन का सशक्त प्रयास बनकर सामने आया, जिसने इतिहास के कई विवादित अध्यायों पर नई बहस को जन्म दिया।

संबोधित करते प्रो. बीडी शुक्ला।

डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर बीडी शुक्ला ने कहा

राजा मानसिंह ने जो क्षेत्र विजित किया उतना बड़ा साम्राज्य भारत में किसी का नहीं रहा। एक समय था जब खैबरदर्रा से विदेशी आते थे और भारत को लूटते थे। राजा मानसिंह ने काबुल विजय के बाद ऐसे लुटेरे विदेशों पर नियंत्रण पाया। वे अफ़गानों से तोपें लेकर आए और आमेर के किले पर रखीं। आज भी इन तोपों को देखा जा सकता है।

राजा मानसिंह ने इस नीति को अपनाया कि दुश्मन को हराना है तो उसके साथ रहो। घड़े के समान उसकी बातों को भरते रहो और एक दिन घड़ा भर जाएगा तो वह फट जाएगा। इस तरह राजा मानसिंह वक्त के हिसाब से चले।

राजा मानसिंह ने 123 युद्ध लड़े और सभी में विजय हासिल की। लोग राजा मानसिंह के केवल 77 युद्धों के बारे में ही जानते हैं। मान मंदिर का मतलब है राजा मानसिंह द्वारा निर्मित मंदिर। राजा मानसिंह ने सोरों शूकर क्षेत्र पर भी बहुत काम किया। यहां के पंडों को हरिद्वार में ले जाकर बसाया, जो हमारी पीढियों का इतिहास सहेजे हुए हैं।

24 पुस्तकों के लेखक, वरिष्ठ पत्रकार और वेलनेस कोच डॉ. भानु प्रताप सिंह ने राजा मानसिंह के बारे में शोधपरक जानकारी दी

राजा मान सिंह, आमेर के महाराज, अकबर के सर्वशक्तिशाली सेनापति, और भारतीय भूभाग के एक ऐसे महावीर हैं, जिन्होंने धर्म, संस्कृति और मातृभूमि के सम्मान को कभी दीन नहीं होने दिया। 21 दिसंबर, 1550 ई. को आमेर के राजपरिवार में जन्मे मान सिंह बचपन से ही शौर्य, नीति और धर्मनिष्ठा के प्रतीक माने जाते थे। कछवाहा वंश की वह परंपरा के वाहक थे।

जिसने जीवनभर सनातन धर्म, हिन्दू संस्कृति, राजपूत मर्यादा और भारतीय अखंडता के लिए संघर्ष किया, उसे गद्दार कहना स्वयं इतिहास के प्रति गद्दारी है। फारसी स्रोत, राजपूत कालखंड के दस्तावेज़, स्थानीय अभिलेख और मंदिरों का भव्य वास्तु-साक्ष्य बताते हैं कि:

  1. वे आजीवन भगवान कृष्ण और शिव के भक्त,
  2. हिंदू कारीगरों, पुरोहितों और मंदिरों के संरक्षक,
  3. राजपूतीय मान-सम्मान रखने वाले,
  4. और कठिन परिस्थितियों में भी अपनी संस्कृति से समझौता न करने वाले सेनानायक थे।

एक फ़ारसी लेखक लिखता है—
मान सिंह के खजाने से सोना धर्म के दीपों में बदल जाता था।”

राजा मानसिंह ने आगरा किला के निर्माण में योगदान दिया। आगरा में रावली महादेव मंदिर बनवाया। ताजमहल भी उन्हीं की देन है। पुरालेख विशेषज्ञ ए. फ़ुहरर (A. Führer) ने अपनी पुस्तक “The Monumental Antiquities of Northern India” (1891) में राजा मानसिंह द्वारा आगरा में कई घाट एवं एक मंदिर निर्माण का उल्लेख किया है। वृंदावन में गोविंददेव जी का मंदिर बनवाया। जगन्नाथ पुरी मंदिर को मस्जिद बनने से बचाया। राजा मानसिंह ने जयपुर में 40 से अधिक मंदिरों का पुनरोद्धार किया। इनमें राजा जगतशिरोमणि मंदिर (आमेर), केशवराय (कृष्ण) मंदिर, शिलादेवी (काली) मंदिर, श्याम राई मंदिर प्रसिद्ध हैं। आमेर के ‘जगत शिरोमणि मंदिर’  में मीराबाई द्वारा सेव्य कृष्ण-मूर्ति ही स्थापित है। जयपुर शहर की नींव के समय, सूर्य महल में आराध्य गोविंद देवजी की स्थापना की गई। गोरखपुर में भगवान शिव को समर्पित, मानसरोवर मंदिर का निर्माण कराया। वाराणसी में  मानसरोवर घाट, मान मंदिर घाट बनवाया।

संबोधित करते डॉ. भानु प्रताप सिंह।

राजा मान सिंह ने राणा प्रताप से युद्ध तो किया, लेकिन—

  • उन्होंने प्रताप को बंदी नहीं बनाया।
  • उनके परिवार को कोई हानि नहीं पहुँचाई।
  • न उनकी भूमि छीनी।
  • न किसी जल–जंगल–जमीन को नष्ट किया।
  • अकबर की मंशा के अनुरूप मेवाड़ को नहीं लूटा।
  • हल्दीघाटी युद्ध का वास्तविक नेतृत्व ख़्वाजा कुतुबुद्दीन खां और आसफ़ खान के हाथ में था
  • राजा मानसिंह ने युद्ध को कम से कम रक्तपात के साथ रखने की कोशिश की
  • राजस्थानी लेखों में उल्लिखित है कि राजा मानसिंह ने महाराणा की जान बचाई, वरना चेतक पर भाग रहे राणा प्रताप को पकड़ना सबसे आसान काम था।
  • अफगानिस्तान में राजा मान सिंह को बहुत शक्तिशाली, अनुशासित और न्यायप्रिय सेनापति के रूप में वर्णित किया गया है। खैबर, बलोच और यूसुफ़ज़ई विद्रोह को शांत करने के बादहिंदू सरदार-ए-आज़म”, बलोच और पठान सरदारों के विरुद्ध विजय के बाद  मंसूर-ए-हिंद” की उपाधि से अलंकृत किया गया।

 

पत्रकार मधुकर चतुर्वेदी ने राजा मानसिंह के बारे में कई रहस्यों से पर्दा उठाया

राजा मानसिंह का बृज से संबंध था। अष्टछाप के कवि कुंभनदास ने काव्य लिखा है-

घर-घर आंगन होत बधाई

मानसिंह सिंहासन बैठे

 छत्र चँवर ढराई।

इस पद का उल्लेख अष्टछाप कवियों ने किया है। राजा मानसिंह की भेंट वल्लभाचार्य जी से भी हुई थी।

गोवर्धन परिक्रमा में सात बार नो त्योहार का चलन भी राजा मानसिंह के कारण है। उन्होंने हिंदुओं के लिए सुरक्षा का वातावरण बनाया था।

राजा मानसिंह ने वृंदावन में 7 मंजिला गोविंद देव जी का मंदिर बनवाया। इसके सातवें तल पर दीपक जलता था जो दिल्ली के लाल किला से दिखाई देता था। इसी से चिढ़कर औरंगजेब ने मंदिर के तीन तल नष्ट करा दिए। अष्टकोण मंदिर है जो नागर और द्रविड़ शैली में बनाया है। औरंगजेब द्वारा तोड़े गए मंदिर के तीन शिखर फिर से बनाए जाएं। आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया ने मंदिर के कई हिस्सों पर ताला लगा रखा है, उसे खुलवाया जाए।

स्ंबोधित करते मधुकर चतुर्वेदी।

बृज की मूल पहचान बंडी है जो राजा मानसिंह लेकर आए। यह बंडी भी अष्टकोणीय है। राजा मानसिंह का मूल चित्र बंडी में है। इस पर और शोध होने की आवश्यकता है।
अकबर का जो चित्र तिलक लगाकर माला जपते हुए दिखाई देता है वह शिला देवी मंदिर आमेर में पूजा के दौरान बनाया गया था।

राजा मानसिंह ने अकबर द्वारा चलाए गए धर्म दीन ए इलाही को नहीं अपनाया।

अकबर से हिंदू परोक्ष नीति बनवाई।

राजा मानसिंह के एक पुत्र तुलसीदास जी के शिष्य थे। उन्होंने वास्तव में अपना एक पुत्र हिंदुत्व के प्रचार के निमित्त तुलसीदास जी को सौंप दिया था। उस समय तुलसीदास जी राजा रामचंद्र की जय बुलवाते थे यानी राजा तो रामचंद्र ही हैं, भले ही गद्दी पर अकबर बैठा हो।

 

पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर प्रथम डीलिट करने वाले प्रोफेसर कमल कौशिक

475 साल बाद भी राजा मानसिंह प्रासंगिक हैं। उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा की।

7000 से अधिक मंदिरों का उद्धार किया। अटक से कटक तक के राज्य में भी मंदिरों का पुनरुद्धार किया। अकबर के शासन में भी सनातन धर्म की रक्षा की। इस तरह की राजनीति राजा मानसिंह करते थे।

हिंदुओं को गोल टोपी लगाने से बचाया। ताजमहल का निर्माण वास्तव में राजा मानसिंह ने कराया था। अगर भवन निर्माण शैली पर शोध हो तो इसका रहस्य खुल जाएगा।

समारोह में उपस्थित अतिथि और वक्ता।

मान महिमा पुस्तक के लेखक और राजा मानसिंह आमेर फाउंडेशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता नरेंद्र सिंह निबेड़ा ने कहा

राजस्थान में आमेर को ढूंढार कहते हैं। वहां माताएं प्रार्थना करती हैं कि पुत्र हो तो मानसिंह जैसा। राष्ट्र और धर्म को बचाने के लिए अकबर की सेना में 12 वर्ष की उम्र में शामिल हुए। अपने तीन पुत्रों को युद्ध में आहूत कर दिया।

राजा मानसिंह न होते तो मैं नरेंद्र सिंह ने होता, हम इमामुद्दीन, शाहरुख, फारुख होते। राजा मानसिंह ने इस्लमा कबूल कर लिया होता तो शिखा, जनेऊ, देवालय ना होते।

उन्होंने एक भी युद्ध नहीं हारा। एक भी हिंदू राजा का वध नहीं किया बल्कि उनसे समझौता किया। मुसलमान आक्रमणकारी को नहीं छोड़ा।

राजा मानसिंह की समाधि महाराष्ट्र के अमरावती में है। वहां जाओ और 2 मिनट सोच लो अपने बारे में अंतरात्मा से, तब तुम्हें दिखाई देगा कि राजा मानसिंह अद्भुत थे।

हम स्वतंत्र होने के बाद 75 वर्ष में राम मंदिर बना पाए और राजा मानसिंह ने दूसरे के शासन में हजारों मंदिर बनवा दिए, हजारों बीघा भूमि दान दी।

महापौैर के स्वागत के बाद फोटो।

खानवा के मैदान में राजपूत मिलकर लड़े लेकिन हार गए क्योंकि उनके पास तकनीक नहीं थी। राजा मानसिंह वह तकनीक लेकर आए। मिर्जा राजा जयसिंह के बेटे राम सिंह ने छत्रपति शिवाजी को आगरा से सकुशल वापस भेजा क्योंकि उन्होंने वचन दिया था।

अकबर जिस जहर से राजा मानसिंह को मरवाना चाहता था, वह स्वयं खाकर मर गया। अकबर देश का इस्लामीकरण करना चाहता था लेकिन मानसिंह ने रोक दिया।

राजा मानसिंह पहाड़ों, रेगिस्तान, बर्फीली और समुद्र में भी लड़ा और जीता। मुसलमान का कत्लेआम किया। तोपों का सामना तलवार से किया और युद्ध जीता। मानसिंह के बाद धार्मिक आक्रमण बंद हो गए थे केवल व्यापारिक आक्रमण हुए।

राजा मानसिंह ने जो घाट बनवाए वह वास्तव में वाटर मैनेजमेंट है। राजा मानसिंह ने घाटों को धर्म से जोड़ दिया।

गंगा नदी में राजा मानसिंह की छतरी है और सरयू में राम की भी छतरी नहीं है। राजा मानसिंह कहीं भी 3 माह से अधिक नहीं रुका लेकिन उनके नाम पर मान गांव, मानसरोवर, मान मंदिर हैं।

शानदार सा्स्कृतिक प्रस्तुति।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय जनता पार्टी आगरा के जिलाध्यक्ष गिर्राज सिंह कुशवाहा भावुक हो गए। उन्होंने कहा

अकबर के काल में मंदिरों का निर्माण करने वाला राजा मानसिंह बड़े जिगर वाला था। इस समारोह में विभिन्न जातियों के प्रमुखों के होने के बाद भी हम सब राजा मानसिंह के लिए आए हैं।

मानसिंह के बारे में इतिहास को विकृत किया गया। उन्होंने एक भी हिंदू राजा नहीं मारा और मुस्लिम को छोड़ नहीं।

123 युद्ध विश्व के किसी भी राजा ने लड़कर नहीं जीते होंगे।

कछवाहा, कुशवाहा जो स्वयं को राजा मानसिंह का वंशज कहते हैं वे सौगंध लें कि राजा मानसिंह का मान बढ़ाएंगे। अपने इतिहास को पहचानो। हमारा फर्ज है कि राजा मानसिंह आमेर फाउंडेशन को देश के चप्पे-चप्पे तक पहुंचाएं। वचनबद्ध होकर जाएं की राजा मानसिंह के कार्य को आगे बढ़ाएंगे।

कोई मेरे बाप यानी राजा मानसिंह को गाली देगा तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगला कार्यक्रम 24 घंटे का कराया जाएगा।

राष्ट्रीय प्रभारी रीना सिंह कार्यक्रम का केंद्रबिंदु रहीं।

राजा मानसिंह आमेर फाउंडेशन की राष्ट्रीय प्रभारी और जानी-मानी समाजसेवी श्रीमती रीना सिंह ने कहा

यह फाउंडेशन सर्वसमाज का है। इसकी स्थापना राजस्थान के दौसा में हुई थी। जो खुद को सनातनी मानते हैं, अपने क्षत्रप को मानते हैं, वह सब फाउंडेशन में हैं। आज के कार्यक्रम में पूरे बृज क्षेत्र की क्रीम आई हुई है।

जिन लोगों को राजा मानसिंह आमेर से परेशानी है वे मथुरा जाना छोड़ दें, वह अयोध्या जाना छोड़ दें, वे काशी विश्वनाथ जाना छोड़ दें, वे जगन्नाथ पुरी जाना छोड़ दें और रावली महादेव मंदिर आगरा में जाना छोड़ दें। ताजमहल वास्तव में मान महल था, जिसे मिर्जा राजा जयसिंह ने व्यापार का केंद्र बनाया। आगरा में शिवाजी म्यूजियम भी राजा मानसिंह की जमीन पर बन रहा है।

राजा मानसिंह ने भक्ति का माहौल पूरे भारत में बनाया था। लोगों के दिमाग में राजा मानसिंह के गद्दार होने की गंदगी जमा है, जिसे साफ करना है। श्री नरेंद्र निबेड़ा ने मान महिमा पुस्तक लिखी है, जिसे पढ़कर राजा मानसिंह के बारे में जानकारी की जा सकती है।

राजा मानसिंह आमेर

राजा मानसिंह आमेर फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष बलराम सिंह चौहान ने

सभी का आभार प्रकट किया। उन्होंने राजा मानसिंह को गद्दार कहने वालों को चेतावनी देते हुए कहा अगर कोई राजा मानसिंह गद्दार सिद्ध कर दें तो उसे एक करोड रुपए का इनाम देंगे। सही बात तो जो है कि आज हम राजा मानसिंह की वजह से ही जीवित हैं।
उन्होंने राजा मानसिंह के बारे में अभद्र टिप्पणी करने वाले रामभद्राचार्य को चुनौती दी। उनसे कहा कि मान महिमा पढ़ो और जवाब दो। खुली बहस करो। राजा मानसिंह सनातन धर्म के रक्षक हैं। कसम खाओ कि अपने घर में शाम को एक दीपक राजा मानसिंह के नाम का जलाएंगे और तय मानिए उसी दिन से आपकी उन्नति चार गुना बढ़ने लगेगी।

समारोह का संचालन करते हुए अजयपाल सिंह कुशवाहा ने कहा कि हर घर में मानसिंह होना चाहिए।

आगरा की महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा भी मंचासीन रहीं। वे कुछ देर बाद अन्य कार्यक्रम में चली गईं।

युवाओं के बीच रीना सिंह।

इनका हुआ सम्मान

वक्ताओं के साथ सनातन धर्म रक्षक आशीष आर्य, भाजपा के उपाध्यक्ष मेघराज सोलंकी, पार्षद प्रवीणा राजावत, अजय राजावत, देवेंद्र सिंह राजावत, नरेंद्र सिंह, सीमा चौहान, ज्योति जादौन, चेतन प्रताप सिंह जादौन (फिरोजाबाद), जयपाल, गोविंद, राजपाल सिंह कुशवाहा, लक्ष्मी नारायण मंदिर के अध्यक्ष अजीत, यशोदा मंदिर के अध्यक्ष प्रिंस, हरेंद्र सिंह चौहान, कुशवाहा युवा मंच के प्रदेश संगठन मंत्री अमित सूर्यवंशी, राकेश राजावत, राम पाठक, पारस ठाकुर मथुरा, देवकीनंदन राजावत आदि का सम्मान किया गया।

Dr. Bhanu Pratap Singh