मितव्ययिता आदमी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसी मितव्ययिता से बचत का जन्म होता है। आप सब ने अपने परिवार में भी कम खर्च करके अपने दादा-दादी को छोटी-छोटी बूंदों ( पैसे की बचत ) से घड़ा भरते हुए देखा होगा। मिट्टी की गुल्लक में पैसे डाल कर बच्चों को बचत करने की आदत डाली जाती है। छोटी-छोटी बचत से बड़े सपनों को आकार दिया जा जाता है।
परिवार में ही नहीं समस्त राष्ट्र में भी बचत की जाती है ताकि बुरे वक्त पर या कोई सकारात्मक कार्य करना हो तब वही बचत सभी के काम आती है। परिवार में बीमारी हो या परिवार में या व्यापार में घाटे का समय हो या अधिक लाभ कमाने के लिए पैसे की आवश्यकता हो, इसी प्रकार राष्ट्र को भी अनेक समय अपनी बचत से अपनी जनता के सुख-दुख में सहायक होती है। सभी राष्ट्रीय को बचत की आदत पड़े, इसी के मद्देनजर दुनिया भर में हर वर्ष 31 अक्टूबर को विश्व बचत दिवस मनाया जाता है। प्रथम अंतर्राष्ट्रीय बचत दिवस का आयोजन इटली के मिलान शहर में हुआ। वर्ष 1924 में 31 अक्टूबर को विश्व बचत दिवस की घोषणा की गई थी।
विश्व बचत दिवस मनाने का बहुत साफ उद्देश्य है हम अपने व्यवहार में बचत करने की इच्छा को उत्पन्न करें और इस बचत के महत्व को याद दिलाते रहें। बचत की आदत व्यक्ति के साथ-साथ देश को खुशहाल भविष्य की ओर ले जाती है। भारत में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के निधन के कारण इसे 31 अक्टूबर 1984 के बाद से भारत में हर वर्ष 30 अक्टूबर को मनाया जाता है|
भारतवर्ष में अक्सर लोग अपनी बचत को अपनी अंटी में दबाकर रखते थे। भारत में पुराने जमाने में यह आम कहावत थी लाला की अंटी में माल है। परंतु विश्व बचत की मंशा के अनुसार धीरे-धीरे हम लोग भी अब अपने पैसे को बैंक में, म्युचुअल फंड्स,पोस्ट ऑफिस, एलआईसी, ज़मीन या अन्य प्रकार से रखने लगे हैं। भारत में शादी के बाद युगल दंपत्ति भविष्य में अपने बच्चों को अच्छी परवरिश शिक्षा व स्वास्थ्य देने के लिए देने के साथ अपने बुढ़ापे के लिए भी बचत शुरू कर देते हैं, जो बुरे समय पर और अच्छा समय बनाने के लिए हमेशा ही काम आती है| इसी तरीके से व्यापार को और राष्ट्र को सशक्त बनाए रखने हेतु अनेक प्रकार की व्यर्थ व्यय को रोककर बचत करके सशक्त राष्ट्र की उत्पत्ति की जाती है।
किसी ने सच कहा है कि अच्छे कर्मों से जीवन सफल होता है और बचत से स्वस्थ और खुशहाल परिवार व राष्ट्र बनता है। आज विश्व बचत दिवस पर हम सब लोगों को बचपन से ही अपने बच्चों को मितव्यता के साथ बचत के लिए प्रेरित करना चाहिए ताकि वो भी दादा-दादी की तरह छोटी-छोटी बूंदों से घड़ा भर सकें। अपनी बचत को तिजोरी में न रख कर सरकार के उपक्रमों में रखना चाहिए, जिससे एक पंथ दो काम होते हैं| आपका भविष्य सुरक्षित होता है और आपका पैसा देश की उत्पादन बढ़ाने में भी काम आता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जन-धन योजना के माध्यम से ग़रीबों की बचत योजना शुरू की है मेरे क्या आपके दादा जी या पिताजी भी कहते थे – जितनी चादर लम्बी हो उतना ही पैर फैलाना चाहिए। आज उस बात का अर्थ समझ में आता है और हम भी बचत करते हैं और आप भी बचत करते हैं। आशा है अब बचत करके स्वयं को खुशहाल बनाएंगे।
-राजीव गुप्ता जनस्नेही
लोक स्वर आगरा
फोन नंबर 98370 97850
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