Agra/vrindavan (Uttar Pradesh, India) । अयोध्या में अगर भगवान श्रीराम के मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा तो इसके पीछे अनेक बलिदान और आंदोलन हैं। राम मंदिर आंदोलन को परवान चढ़ाया अशोक सिंघल ने। वे विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। अशोक सिंघल का जन्म आगरा में हुआ। उनके जन्मस्थल की रज राम मंदिर के शिलान्यास के लिए नहीं ली गई। अंततः दीदी मां ऋतंभरा को रज सौंपी गई है। वे इसे अयोध्या लेकर जाएंगी।
आगरा के माईथान में हुआ था जन्म
अशोक सिंघल का जन्म अपनी ननिहाल आगरा के माईथान में हुआ था। यहीं पर उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई। जिस भवन में वे रहे, वहां की रज ले जाने की निवेद राष्ट्रीय बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज कुमार ने राम मंदिर ट्रस्ट से किया। ट्रस्ट ने साफ इनकार करते हुए कहा कि केवल तीर्थस्थलों की रज और नदियों का जल लिया जा रहा है। इस पर मनोज कुमार ने कहा कि जहां अशोक सिंघल का बचपन बीता, वह किसी तीर्थ से कम नहीं है। जब बात नहीं बनी तो उन्होंने वृंदावन जाकर साध्वी ऋतम्भरा से संपर्क किया। दीदी मां का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आगरा के लिए सौभाग्य की बात है कि सिंघल का जन्म आगरा में हुआ था और उससे सौभाग्य की बात यह है कि वहां की रज स्वयं दीदी मां अयोध्या लेकर जा रही हैं।
भावुक हो गईं साध्वी ऋतम्भरा
इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल वृंदावन में वात्सल्य आश्रम पर राष्ट्रीय बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज कुमार के नेतृत्व में दीदी मां ऋतंभरा से मिला। स्वर्गीय अशोक सिंघल के भतीजे सौरभ ने मां ऋतंभरा को दीदी मां ऋतंभरा को सिंघल जी की जन्म स्थली की रज प्रदान की। दीदी मां ऋतंभरा जी ने रज प्राप्त करते हुए काफी भावुक हो गई। उन्होंने अशोक सिंघल के साथ अपने संस्मरणों को प्रतिनिधिमंडल के साथ साझा किया। दीदी मां ने बताया कि किस तरीके से आंदोलन को अशोक सिंघल के बौद्धिक कौशल से सक्रियता दी गई। संतों के सहयोग के लिए अपनी समर्पित भावना के साथ अशोक सिंघल ने उनके सम्मुख श्री राम मंदिर निर्माण हेतु हिंदुत्व की प्रति अपना पक्ष रखा। स्वर्गीय अशोक सिंघल जी के योगदान को हिन्दू समाज कभी भूल नहीं पाएगा।

अशोक सिंघल ने संतों को एक मंच पर लाने का अद्भुत कार्य किया
दीदी मां ने अपने विचारों को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस राज के मिलने से उनकी शक्ति 1000 गुना बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं अत्यंत गर्व के साथ इस रज को अयोध्या ले जाएंगी। उन्होंने कहा की आज 491 वर्ष बाद राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ होने जा रहा है। अशोक सिंघल ने संतों को एक मंच पर लाकर जो अद्भुत कार्य किया वह इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। गुलामी के बाद संत एक मंच पर आने को तैयार नहीं थे। महाराजा हर्षवर्धन के बाद संतों को एक मंच पर लाने का कार्य अशोक सिंहल ने किया। मेरे जैसे अनेक संत इस कार्य में जुटे। यह कार्य केवल अशोक सिंघल द्वारा संभव था। आज पूरा भारत और विश्व के हिन्दू हर्षित हैं।
तोरण द्वार पर शिलापट में इनका नाम हो
मनोज कुमार ने कहा अशोक सिंघल के हिंदुत्व के प्रति किए गई सेवाओं को हमेशा याद रखा जाएगा। दीदी मां ऋतंभरा साक्षी हैं कि राम मंदिर का 1989 में भूमि पूजन हो गया था। हमारी मांग है कि आप उचित स्थान पर यह अवश्य कहें जब भगवान राम का तोरण द्वार बनेगा वहां अशोक सिंघल, महंत रामचंद्र परमहंस, महंत अवैद्यनाथ महाराज व कामेश्वर चौपाल का शिलापट हो। यह गौरव की बात है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का शुभारंभ होने जा रहा है। इस अवसर पर दीदी मां के शिष्य सत्याशील, संजय भैया, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुभाष ढल एवं रमन आदि भी थे।
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