मैरिटल रेप को अपराध घोषित किए जाने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच के बंटे हुए फ़ैसले के ख़िलाफ़ अब याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
ये याचिका खुशबू सैफ़ी ने दायर की है. सैफ़ी पहली याचिकाकर्ता हैं जिन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है.
सैफ़ी ने जस्टिस राजीव शकधर के फ़ैसले का समर्थन किया है और जस्टिस सी हरि शंकर के निर्णय को शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी है.
जस्टिस राजीव शकधर की अगुवाई वाली दिल्ली हाई कोर्ट के दो जजों वाली बेंच ने मैरिटल रेप के मामले में अलग-अलग फैसला सुनाया था.
इस मामले में जस्टिस राजीव शकधर का कहना था कि पत्नी की सहमति से ज़बरदस्ती संबंध बनाना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है और इसलिए इसे रद्द किया जाता है.
वहीं जस्टिस सी हरिशंकर ने कहा कि वो इस मामले में जस्टिस शकधर के फ़ैसले से सहमत नहीं है. उन्होंने कहा कि आईपीसी की धारा 375 का अपवाद 2 संविधान का उल्लंघन नहीं करता.
-एजेंसियां
- बदलाव की पहल: समाज सेवा के जरिए लोगों तक पहुंचा रहे मदद का हाथ -श्री धनंजय कुमार - September 14, 2026
- Tanya Mittal पहुंचीं Shatam Jeeva, Jhansi के 100 एकड़ के आयुर्वेद चिकित्सा केंद्र में, क्या है खास? - September 12, 2026
- दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सम्मान 2026: केंद्रीय हिंदी संस्थान के वरिष्ठ आचार्य प्रो. उमापति दीक्षित सम्मानित - September 11, 2026