पाकिस्तान में इमरान ख़ान सरकार में मानवाधिकार मामलों की मंत्री रहीं शिरीन मज़ारी ने अविश्वास प्रस्ताव को ख़ारिज किए जाने के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने ट्विटर पर इसे एक न्यायिक तख़्तापलट कहा है. शिरीन मज़ारी ने सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें नेशनल असेंबली को बहाल करने और सत्र बुलाने की तारीख़ तय की गई थी. उन्होंने इसे संसदीय प्रभुत्व का अंत कहा है.
उन्होंने ये भी लिखा है कि डिप्टी स्पीकर ने क्यों अविश्वास प्रस्ताव को ख़ारिज किया था. शिरीन मज़ारी ने इमरान ख़ान की सरकार गिराने की अमेरिकी कोशिश का भी ज़िक्र किया है और लिखा है कि ये अंत नहीं है. शिरीन मज़ारी ने लिखा है- ऐसा लगता है कि अदालत के फ़ैसले के बाद गेम जीत ली गई है, लेकिन सच मानिए तो गेम अभी शुरू हुआ है. लोग ये जानते हैं कि किन लोगों ने पैसो की ख़ातिर अपनी जमीर अमेरिका को बेच दी. आख़िरकार ये मामला जनता की अदालत में जाएगा.
गुरुवार को पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव ख़ारिज किए जाने के डिप्टी स्पीकर के फ़ैसले को ग़लत बताते हुए नेशनल असेंबली को बहाल कर दिया था. अदालत ने नौ अप्रैल को अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराने का निर्देश दिया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने आज कैबिनेट और पार्टी की संसदीय दल की बैठक बुलाई है और आज शाम वो राष्ट्र को भी संबोधित करेंगे.
-एजेंसियां
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