[ad_1]
रविवार देर रात को श्रीलंका के सभी 26 कैबिनेट मंत्रियों ने देश में जारी अब तक के सबसे बुरे आर्थिक संकट के बीच तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया. हालांकि, प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और उनके भाई और राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने इस्तीफ़ा नहीं दिया है. इसके साथ ही आज (सोमवार को) 4 नए मंत्रियों को पद की शपथ दिलाई गई है.
इस नए मंत्रिमंडल में राष्ट्रपति ने अपने भाई और पिछली कैबिनेट में वित्त मंत्री रहे बासिल गोटाबाया को जगह नहीं दी है.
पत्रकारों से बात करते हुए देश के शिक्षा मंत्री और सदन के नेता दिनेश गुणावर्धना ने कहा कि कैबिनेट मंत्रियों ने प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है.
लेकिन उन्होंने इस सामूहिक इस्तीफ़े का कोई कारण नहीं बताया.
राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि देश में पैदा हुए आर्थिक संकट से सरकार के निबटने के ‘तरीके’ को लेकर मंत्रियों पर जनता की ओर से भारी दबाव था.
रविवार शाम को श्रीलंका की सड़कों पर आम लोगों का व्यापक विरोध प्रदर्शन देखा गया.
देश के मौजूदा हालात से नाराज़ जनता राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफ़ की मांग कर रही है.
31 मार्च को गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने गोटाबाया राजपक्षे के निजी आवास का घेराव कर बस और सरकारी वाहनों में आग लगा दी थी. इसके बाद सरकार ने देश में आपातकाल घोषित कर दिया था.
इसके बावजूद आम लोगों ने सोशल मीडिया के ज़रिए रविवार को विरोध प्रदर्शनों के लिए सड़कों पर उतरने का एलान किया. जिसके जवाब में सरकार ने 36 घंटे का कर्फ्यू लगा दिया.
रविवार शाम से ही राजनीतिक हलकों में बातें चल रही थीं कि आर्थिक संकट से निपटने के लिए राजपक्षे अंतरिम सरकार का विकल्प चुन सकते हैं.
-एजेंसियां
[ad_2]
- बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जे एन टंडन ने अपने पिता कामरेड महादेव नारायण टंडन के बारे में यह क्या कह दिया - April 28, 2026
- जनतंत्र में शिक्षा शास्त्र: लोकतंत्र के प्रहरी तैयार करने का ऐतिहासिक संकल्प, महादेव नारायण टंडन को श्रद्धांजलि - April 28, 2026
- गाय को राष्ट्र माता घोषित कराने के लिए एक ही दिन 5000 तहसीलदारों को ज्ञापन - April 28, 2026