सरदार पटेल जयंती पर सीएम योगी के बयान पर अखिलेश यादव का तीखा पलटवार: बोले- ‘सजातीय तुष्टीकरण’ करने वाले न करें जातिवाद की बात

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लखनऊ। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जातिवाद और क्षेत्रवाद को राष्ट्रीय एकता के लिए बड़ा खतरा बताए जाने पर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। उनके इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीधे निशाना साधा है। सपा प्रमुख ने कहा कि जिनकी सत्ता ‘सजातीय तुष्टीकरण’ के नाम पर बदनाम हो चुकी है वो ‘जातिवाद’ की बात कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषण के वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “जो होता भाजपाई, वो पैदा करता खाई! यह अत्यंत आश्चर्यजनक है कि जिनकी सत्ता ‘सजातीय तुष्टीकरण’ के नाम पर कुख्यात हो चुकी है, वे ‘जातिवाद’ पर बात कर रहे हैं! जिनकी पूरी राजनीति किसी एक जाति विशेष के विरोध पर ही टिकी हो, वे जब भी मुंह खोलेंगे, असत्य ही बोलेंगे।”

सपा प्रमुख ने अपने प्रहार को जारी रखते हुए कहा, “दरार डालने वाली सोच रखने वाले यदि राष्ट्रीय एकता की बातें न ही करें तो कम से कम उनके पद की गरिमा बची रहेगी। ‘हाता नहीं भाता’ ही इनकी नफरत भरी और विद्वेषपूर्ण राजनीति का सबसे कड़वा सच है। जो लोग इतने जिम्मेदार सार्वजनिक पद पर आसीन रहकर भी अपनी जाति के घमंड का प्रदर्शन करते हैं, वे भला समाज के अन्य वर्गों का क्या कल्याण करेंगे? जो स्वयं एकरंगी मानसिकता के शिकार हैं, वे भला बहुरंगी विविधता और एकता का महत्व कैसे समझ सकते हैं।”

अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने आगे तंज कसते हुए लिखा, “काला चश्मा पहनें और वापस लौट जाएं! राष्ट्रीय एकता और अखंडता को असली खतरा तब पैदा होता है, जब सामाजिक भेदभाव में यकीन रखने वाला कोई व्यक्ति सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठा होता है।”

​सीएम योगी का मूल बयान

​स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के जयंती समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज को विभाजित करने वाली ताकतों पर करारा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय एकता को चुनौती तब मिलती है, जब हम जाति, धर्म और क्षेत्र के नाम पर आपस में बंटते हैं और कमजोर पड़ जाते हैं। जिस प्रकार शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म होने पर बीमारियां हावी हो जाती हैं, ठीक उसी तरह जातिवाद, क्षेत्रवाद और भाषावाद वे सामाजिक बीमारियां हैं जो समाज की आंतरिक शक्ति को कमजोर करती हैं तथा विदेशी आक्रांताओं को आक्रमण का निमंत्रण देती हैं।

​मुख्यमंत्री योगी ने यह भी रेखांकित किया था कि लौह पुरुष का सच्चा अनुयायी वही कहला सकता है जो भारत की संप्रभुता, एकता और सुरक्षा को सर्वोपरि मानता है। जिन्ना को अपना आदर्श मानने वाले और समाज में विभेद पैदा करने वाले विभाजनकारी लोग कभी भी सरदार वल्लभभाई पटेल के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते।

Dr. Bhanu Pratap Singh