डीईआई में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान, खो-खो और रस्साकशी में उतरे 285 एनएसएस स्वयंसेवक

PRESS RELEASE





आगरा। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीईआई) की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाइयों ने ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान के अंतर्गत पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं और विशेष व्याख्यान का आयोजन किया। इसमें करीब 285 स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। खो-खो और रस्साकशी के जरिए युवाओं को नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।

विशेष व्याख्यान से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत विशेष व्याख्यान सत्र से हुई। डीईआई के खेल शिक्षक और असिस्टेंट प्रोफेसर वासु गुप्ता ने ‘आधुनिक व्यस्त जीवनशैली में खेलों का महत्व’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज की डिजिटल और भागदौड़ भरी जिंदगी में पारंपरिक खेल मानसिक तनाव घटाने, एकाग्रता बढ़ाने और शरीर को चुस्त रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। नियमित खेलकूद को दिनचर्या में शामिल करने से युवा स्वस्थ रहते हैं और नकारात्मक आदतों से दूर रहने की प्रेरणा भी पाते हैं।

खो-खो और रस्साकशी में दिखा दमखम

व्याख्यान के बाद खेल मैदान पर पारंपरिक खेल प्रतियोगिताएं हुईं। छात्राओं के बीच खो-खो का मुकाबला हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने तेजी, फुर्ती और रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन किया। दर्शकों ने तालियों से खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।
इसके बाद छात्र और छात्राओं, दोनों वर्गों में रस्साकशी प्रतियोगिता कराई गई। इसमें प्रतिभागियों ने टीमवर्क, आपसी तालमेल और सामूहिक शक्ति दिखाई। प्रतियोगिताओं के जरिए विद्यार्थियों को खेल भावना, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का महत्व समझाया गया।

नशामुक्त युवा रखेंगे विकसित भारत की नींव

एनएसएस समन्वयक डॉ. सानिल कुमार ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वस्थ और नशामुक्त युवा ही सशक्त और विकसित भारत की नींव रख सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से खुद नशे से दूर रहने के साथ समाज में भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का आयोजन वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रजनीश मीना तथा कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ललित मोहन और डॉ. राकेश कुमार की एनएसएस इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसमें लगभग 285 स्वयंसेवकों ने सक्रिय भागीदारी की। समापन पर विजेता टीमों और बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों की सराहना की गई।




Dr. Bhanu Pratap Singh