आगरा के किरावली में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान बड़ा हादसा टला: जहरीली गैस से बेहोश हुए मजदूर अजय की साथी राजकुमार ने बचाई जान

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आगरा: ताजनगरी के किरावली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चैंकोरा गांव में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। टैंक के भीतर फैली जहरीली गैस की चपेट में आने से 30 वर्षीय मजदूर अजय अचानक अचेत होकर बेहोश हो गया। ऐसे संकट के समय में उसके साथी मजदूर राजकुमार ने अपनी जान की परवाह न करते हुए गजब की सूझबूझ और तत्परता दिखाई और रस्सी के सहारे अजय को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते अस्पताल पहुँचाए जाने के कारण मजदूर की जान बच गई है।

टैंक के भीतर उतरते ही जहरीली गैस की चपेट में आया मजदूर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चैंकोरा गांव में एक स्थानीय किसान के घर पर सेप्टिक टैंक की सफाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान मजदूर अजय सफाई के लिए टैंक के अंदर उतरा था। टैंक के अंदर पहले से मौजूद जहरीली गैस (ऑक्सीजन की कमी व हानिकारक गैसों) के प्रभाव से वह कुछ ही पल में बेहोश होकर गिर पड़ा। अजय के टैंक के भीतर अचेत होने की खबर मिलते ही मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।

​स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उसके साथी मजदूर राजकुमार ने तुरंत हिम्मत जुटाई। उसने बिना एक पल गंवाए रस्सी के सहारे अजय को टैंक से बाहर खींचने में सफलता हासिल की। यदि थोड़ी भी और देर होती, तो यह हादसा किसी बड़ी अनहोनी में बदल सकता था।

एसएन मेडिकल कॉलेज में चल रहा है इलाज

​घटना के तुरंत बाद परिजनों और ग्रामीणों की मदद से अजय को फौरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), किरावली ले जाया गया। वहाँ प्राथमिक उपचार के दौरान उसकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए तुरंत एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा रेफर कर दिया। एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के मुताबिक, समय पर ऑक्सीजन मिलने और शुरुआती उपचार के चलते अब अजय की हालत पूरी तरह संतोषजनक है और वह खतरे से बाहर है।

​सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर खड़े हुए सवाल

इस पूरी घटना में साथी मजदूर राजकुमार की बहादुरी ने भले ही एक जिंदगी बचा ली हो, लेकिन यह वाकया सेप्टिक टैंक और सीवर की सफाई के दौरान बरती जाने वाली गंभीर लापरवाहियों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना किसी सुरक्षा उपकरण (प्रोटेक्टिव गियर) और जहरीली गैस की जांच किए बिना इस तरह के बंद टैंकों में उतरना सीधे तौर पर मौत को दावत देने जैसा है। स्थानीय स्तर पर इस घटना के बाद से सुरक्षा उपायों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।




Dr. Bhanu Pratap Singh