अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े तीन प्रमुख पदाधिकारियों के खिलाफ एक महिला के साथ कथित रूप से छेड़छाड़, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के बेहद गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस पूरे मामले में अदालत के कड़े रुख और दिए गए आदेश के बाद बन्नादेवी थाने में तीनों आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी (मुकदमा) दर्ज कर ली गई है। हालांकि, एफआईआर दर्ज होने के 10 दिन का लंबा समय बीत जाने के बावजूद भी जब आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो पीड़िता ने पुलिस की कार्यशैली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नामजद किए गए आरोपियों में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के जिला उपाध्यक्ष सौरभ चौधरी, भाजपा अनुसूचित जाति (एससी) मोर्चा के महामंत्री पंकज दिवाकर और कार्यकारिणी सदस्य लोकेश नागर शामिल हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी विस्तृत और निष्पक्ष जांच सीओ नगर द्वितीय को सौंपी गई है।
उत्तर प्रदेश के डिबाई क्षेत्र की निवासी पीड़िता ने न्यायालय में प्रस्तुत किए गए अपने प्रार्थना पत्र में पूरी आपबीती बयां करते हुए बताया कि उसके पति और ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ पहले से कुछ मुकदमे लंबित चल रहे हैं। इन्हीं अदालती मामलों की पैरवी और कानूनी प्रक्रियाओं के सिलसिले में उसे अक्सर डिबाई से अलीगढ़ आना-जाना पड़ता है।
महिला का सीधा आरोप है कि उसका पति अपने दो अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर उसे लंबे समय से परेशान कर रहा है। इसके साथ ही उसने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उसके खिलाफ अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणियां करके उसे सार्वजनिक रूप से बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।
शिकायत पत्र में दर्ज विवरण के मुताबिक, बीती 19 मार्च को दोपहर लगभग ढाई बजे न्यायालय से संबंधित अपना काम निपटाने के पश्चात महिला नोएडा जाने के लिए निकली थी। इसी दौरान रास्ते में सारसौल चौराहे के समीप स्थित एक होटल के बाहर तीनों आरोपियों ने कथित तौर पर उसका रास्ता रोक लिया। पीड़िता का आरोप है कि वहां उसके साथ सरेराह अश्लील टिप्पणियां की गईं, छेड़छाड़ की गई तथा गाली-गलौज करते हुए मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया। जब उसने इस पूरी हरकत का कड़ा विरोध जताया, तो आरोपियों ने उसे जान से खत्म करने की सीधी धमकी भी दी।
इस पूरे प्रकरण में नया मोड़ तब आया जब महिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर आरोपियों पर सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) जैसा अत्यंत संगीन आरोप भी लगाया और स्थानीय पुलिस पर मामले को दबाने व आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई न करने की बात कही। हालांकि, महिला द्वारा वीडियो में लगाए गए इन अतिरिक्त आरोपों की अभी तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस मामले में आरोपियों का कोई आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने आया है।
फिलहाल, बन्नादेवी थाना पुलिस और जांच अधिकारी सीओ नगर द्वितीय के नेतृत्व में पूरे मामले की गहनता से पड़ताल जारी है। अब यह देखना बेहद अहम होगा कि पुलिसिया तफ्तीश में क्या नए तथ्य निकलकर सामने आते हैं और साक्ष्यों के आधार पर कानून आगे क्या सख्त कदम उठाता है।
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