मिर्जापुर: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की प्रतिष्ठित नौकरी को छोड़कर राजनीति के क्षेत्र में कदम रखने वालीं पूर्व अधिकारी दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर एक नए राजनीतिक सफर का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘जननीति भारत’ के गठन की घोषणा की है। अपने इस कदम के पीछे की मूल सोच को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि आम तौर पर यह धारणा रहती है कि राजनीति आप पर राज करती है, लेकिन उनके द्वारा बनाई गई यह पार्टी किसी राज के लिए नहीं, बल्कि जनता के अपने राज और अधिकारों को स्थापित करने के लिए बनाई गई है।
अपनी नई राजनीतिक पहल के मुख्य सिद्धांतों और वचनों को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि देश की प्रशासनिक और शासकीय नीतियों के केंद्र बिंदु में केवल और केवल आम नागरिकों को रखने पर विशेष बल दिया जाएगा। पार्टी की मंशा है कि नीतियां कागजों या वातानुकूलित कमरों में तय होने के बजाय जनता की वास्तविक और जमीनी जरूरतों के आधार पर निर्धारित की जाएं। इसके अलावा, देश के अन्नदाताओं यानी किसानों और छोटे व्यापारियों की तमाम समस्याओं का व्यावहारिक समाधान उनके अपने निजी अनुभवों और सुझावों के आधार पर तैयार किया जाएगा।
प्रशासनिक प्राथमिकताओं और फैसलों के मोर्चे पर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भविष्य के सभी विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों में जाति, धर्म या किसी भी अन्य पहचान के बजाय केवल और केवल लोगों की तात्कालिक और वास्तविक आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को पार्टी के प्रमुख और सबसे जरूरी मुद्दों में शामिल किया गया है। स्थानीय स्तर पर क्रियान्वित होने वाले विकास कार्यों में आम जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, ताकि योजनाएं पूरी तरह से लोगों की स्थानीय अपेक्षाओं के अनुरूप बन सकें और उनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाए।
अपने इस वीडियो संदेश के दौरान दिव्या मित्तल ने एक रोचक वाकया भी साझा किया। उन्होंने बताया कि राजनीति में आने का इरादा जताने के बाद उन्होंने जनता से जुड़ने के लिए एक मोबाइल नंबर सार्वजनिक किया था, जिस पर इतने भारी संख्या में संदेश और सुझाव आए कि व्हाट्सएप का सर्वर ही कुछ समय के लिए रुक गया। इस तकनीकी बाधा के लिए उन्होंने जनता से खेद जताते हुए लोगों के इस अपार समर्थन के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि वह तो केवल उम्मीद का एक छोटा सा दीया लेकर इस राह पर निकली थीं, लेकिन जनता के संदेशों और स्नेह ने उन्हें सूरज के सामने खड़े होने जैसा विराट अनुभव करा दिया है। देश में राजनीतिक दलों की कोई कमी नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि आम आदमी की कहीं सुनवाई नहीं होती। गंगा नदी का एक सुंदर उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे वहां जल की हर बूंद एक समान होती है, ठीक इसी समानता की सोच को आधार बनाकर उन्होंने अपनी पार्टी का नाम ‘जननीति भारत’ रखा है।
आपको बता दें कि आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने लगभग 13 साल के लंबे प्रशासनिक सेवाकाल के बाद अपनी नौकरी से त्यागपत्र देकर राजनीति में आने का यह अहम फैसला लिया है। अपने कार्यकाल के दौरान वह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और देवरिया जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जिलाधिकारी (DM) के पद पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
प्रशासनिक गलियारों में उनकी पहचान एक बेहद सख्त, तेज-तर्रार और कड़े फैसले लेने वाली अधिकारी के रूप में रही है। हालांकि, अपने काम के प्रति अडिग रवैये और कड़क कार्यशैली के चलते उनके कार्यकाल के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं के साथ वैचारिक मतभेदों की चर्चाएं भी अक्सर सुर्खियों का हिस्सा बनती रही हैं।
मूल रूप से वर्ष 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर अपनी नौकरी छोड़ने की जानकारी दी थी। उन्होंने अपने संदेश में उल्लेख किया था कि उन्होंने अपनी 13 वर्षों की अविस्मरणीय और प्रेरणादायक सेवा यात्रा को अपनी स्वेच्छा से विराम दिया है।
एक साधारण पृष्ठभूमि में पली-बढ़ीं दिव्या ने देश के शीर्ष संस्थानों आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) और आईआईएम बेंगलुरु (IIM Bangalore) से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद लंदन में एक कॉरपोरेट नौकरी की थी, लेकिन देश और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की तीव्र इच्छा उन्हें वापस भारत खींच लाई।
उन्होंने आईएएस अधिकारी बनने को अपने जीवन का बड़ा सौभाग्य माना है। दिव्या ने अपने संस्मरण में लिखा कि वह इस व्यवस्था में देश को कुछ लौटाने के इरादे से आई थीं, लेकिन यहां की माटी और लोगों ने उन्हें इतना अधिक प्यार, मान-सम्मान और अपनापन दिया कि उनकी झोली खुशियों से भर गई। अपने इस विदाई संदेश में उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान हर कदम पर कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले सभी वरिष्ठ अधिकारियों, प्रशासनिक कर्मचारियों और सहयोगियों के प्रति भी गहरी कृतज्ञता ज्ञापित की थी।
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