सेवा, संवेदना और संस्कृति का संगम बना दिव्य सेवा ट्रस्ट आगरा का स्थापना दिवस

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सेवा, संवेदना और संस्कृति का संगम बना दिव्य सेवा ट्रस्ट का स्थापना दिवस

सम्मान समारोह में समाजसेवा, शिक्षा, साहित्य, कला और संस्कृति की विभूतियां सम्मानित

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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat 

आगरा। दिव्य सेवा ट्रस्ट, आगरा की संस्थापिका डॉ. अरुणा गुप्ता की जयंती एवं ट्रस्ट के स्थापना दिवस पर रविवार को होटल ओपल कोर्टयार्ड, सिकंदरा में भव्य सम्मान एवं सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया गया। समारोह में समाजसेवा, शिक्षा, साहित्य, चिकित्सा, संस्कृति एवं कला से जुड़े गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में सेवा और सामाजिक सरोकारों के साथ साहित्य एवं सांस्कृतिक चेतना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।

सेवा से ही आता है समाज में सकारात्मक परिवर्तन

मुख्य अतिथि श्रीमती मधु बघेल एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. रंजना बंसल ने डॉ. अरुणा गुप्ता के सामाजिक एवं सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सेवा, संवेदना और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। दिव्य सेवा ट्रस्ट द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे कार्य समाज के लिए प्रेरणादायी हैं।

साहित्य और संगीत को बताया सामाजिक चेतना का माध्यम

डॉ. मधु भारद्वाज ने साहित्य और काव्य के माध्यम से सामाजिक चेतना एवं मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। विदुषी प्रतिभा केशव तेलंगांवकर ने संगीत को भारतीय संस्कृति और समाज को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बताया।

डॉ. अरुणा गुप्ता के योगदान को किया याद

डॉ. हरेंद्र चौहान ने डॉ. अरुणा गुप्ता के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके सेवा-समर्पण और सामाजिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसी संस्था की पहचान उसके सेवा कार्यों और समाज के प्रति संवेदनशीलता से बनती है।

डॉ. अलका सेन ने प्रस्तुत की कार्यक्रम की आख्या

डॉ. अलका सेन ने अतिथियों का स्वागत किया और ट्रस्ट के कार्यों की आख्या प्रस्तुत की। समारोह में नृत्य एवं संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियों ने वातावरण को सांस्कृतिक रंग दिया। डॉ. संजय सेन ने गिटार वादन तथा डॉ. शिवांकर सेन ने गायन की प्रस्तुति दी। नृत्य प्रस्तुतियों में डॉ. अलका सेन, अर्चना सिंह एवं देवांशी खरे ने सहभागिता की।

साहित्य और संगीत की प्रतिभाओं का सम्मान

समारोह में साहित्य एवं काव्य के क्षेत्र में डॉ. मधु भारद्वाज तथा संगीत के क्षेत्र में श्रीमती प्रतिभा केशव तेलंगांवकर को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने दोनों प्रतिभाओं के योगदान की सराहना की।

नए सदस्यों ने लिया सेवा अभियान से जुड़ने का संकल्प

समारोह के दौरान डॉ. पंकज नगाइच, डॉ. हरि नारायण चतुर्वेदी, संतोष गौतम, राजेश चतुर्वेदी, दया शंकर वर्मा और राघव शर्मा सहित अनेक लोग ट्रस्ट के नए सदस्य बने। इससे सेवा गतिविधियों को और व्यापक बनाने की उम्मीद व्यक्त की गई।

गणमान्य नागरिकों की रही सहभागिता

कार्यक्रम में डॉ. अलका सेन, डॉ. डी.वी. शर्मा, संतोष कुमार कुलश्रेष्ठ, डॉ. राकेश शुक्ला, सौरभ कुलश्रेष्ठ, डॉ. शिवांकर सेन, आचार्य सुशील कुमार, सोनिका अग्रवाल, सुरेश कुशवाह, डॉ. संजय सेन, के.पी. बंसल, चन्द्र शेखर शर्मा एवं जगमोहन गुप्ता सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

संचालन और आभार

कार्यक्रम का संचालन संतोष कुमार कुलश्रेष्ठ ने किया। अंत में डॉ. राकेश शुक्ला ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, सम्मानित प्रतिभाओं, कलाकारों और उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा दिव्य सेवा ट्रस्ट के सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

संपादकीय | चिकित्सा से आगे समाजसेवा की रोशनी

जब चिकित्सा सेवा समाजसेवा से जुड़ती है

समाज में चिकित्सक की भूमिका केवल बीमारी का उपचार करने तक सीमित नहीं होती। एक चिकित्सक जब अपने पेशे के साथ समाज के कमजोर, जरूरतमंद और वंचित वर्गों के लिए समय, संवेदना और ऊर्जा लगाता है, तो चिकित्सा सेवा का दायरा कहीं व्यापक हो जाता है। डॉ. अलका सेन इसी सोच को अपने कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ाती दिखाई देती हैं।

सेवा को अभियान का रूप देना महत्वपूर्ण

डॉ. अलका सेन की विशेषता यह है कि वे चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े होने के साथ-साथ समाजसेवा को भी एक निरंतर अभियान के रूप में आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह दृष्टिकोण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि समाज की अनेक समस्याओं का समाधान केवल उपचार से नहीं, बल्कि जागरूकता, सहयोग, संवेदना और सामूहिक भागीदारी से भी संभव होता है।

समाज को चाहिए ऐसे ही सेतु

आज जब व्यस्त जीवनशैली में लोग सामाजिक सरोकारों से दूर होते जा रहे हैं, तब चिकित्सा, साहित्य, संस्कृति और सेवा को एक मंच पर जोड़ने वाले प्रयास विशेष महत्व रखते हैं। दिव्य सेवा ट्रस्ट का स्थापना दिवस समारोह इसी समन्वय का उदाहरण बना, जहां चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ साहित्यकारों, कलाकारों और समाजसेवियों की सहभागिता दिखाई दी।

सेवा की संस्कृति को आगे बढ़ाने का आह्वान

डॉ. अरुणा गुप्ता की स्मृति और उनके सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित यह समारोह केवल एक आयोजन न रहकर समाज में सेवा की भावना को मजबूत करने का माध्यम बने, यही इसकी सार्थकता होगी। डॉ. अलका सेन जैसे लोग जब चिकित्सा के साथ समाजसेवा का अभियान छेड़ते हैं, तो वे समाज को यह संदेश देते हैं कि सेवा किसी एक पेशे या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर संवेदनशील नागरिक का दायित्व है।

संपादकीय निष्कर्ष

दिव्य सेवा ट्रस्ट की गतिविधियों में चिकित्सा, साहित्य, कला, संस्कृति और समाजसेवा का समन्वय दिखाई देता है। इस प्रयास को निरंतर विस्तार देने की आवश्यकता है। डॉ. अलका सेन की चिकित्सा सेवा के साथ समाजसेवा के प्रति सक्रिय प्रतिबद्धता निश्चित रूप से सराहनीय है। ऐसे प्रयास समाज में संवेदना को जीवित रखते हैं और नई पीढ़ी को सेवा, सहयोग तथा मानवीय मूल्यों से जोड़ने का काम करते हैं।

डॉक्टर भानु प्रताप सिंह, संपादक

Dr. Bhanu Pratap Singh