उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और चिकित्सा क्षेत्र में आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) में शनिवार को एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। कॉलेज के इतिहास में पहली बार एक सफल किडनी ट्रांसप्लांट (गुर्दा प्रत्यारोपण) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है। क्रॉनिक किडनी डिजीज (गुर्दे की गंभीर बीमारी) से जूझ रहे 32 वर्षीय एक मरीज को उसकी अपनी पत्नी ने अपनी एक किडनी दान कर नया जीवन प्रदान किया है। लंबे समय से डायलिसिस के सहारे जीवन बिता रहे इस मरीज का यह अत्यंत जटिल और महत्वपूर्ण प्रत्यारोपण उत्तर प्रदेश शासन की महत्वपूर्ण ‘मुख्यमंत्री असाध्य रोग उपचार योजना’ के तहत मिली वित्तीय सहायता के कारण ही संभव हो सका है।
इस बड़ी उपलब्धि के जुड़ने के साथ ही एसएनएमसी अब आगरा और इसके आसपास के दर्जनों जिलों के गंभीर किडनी रोगियों के लिए उम्मीद का एक नया और बड़ा केंद्र बन गया है। अब गुर्दे की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को ट्रांसप्लांट जैसी हाई-एंड चिकित्सा प्रक्रिया के लिए हर बार दिल्ली, लखनऊ या जयपुर जैसे महानगरों के बड़े अस्पतालों का रुख करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
पांच घंटे से अधिक समय तक चली जटिल सर्जरी
यह ऐतिहासिक किडनी ट्रांसप्लांट प्रक्रिया शनिवार की सुबह लगभग 9:30 बजे शुरू हुई और दोपहर करीब 3 बजे तक यानी पांच घंटे से अधिक समय तक लगातार चली। यह अत्यंत जटिल सर्जरी संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), लखनऊ की विशेषज्ञ चिकित्सा टीम के कुशल मार्गदर्शन और एसएनएमसी आगरा के विभिन्न विभागों के अनुभवी डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टाफ के संयुक्त एवं सराहनीय प्रयासों से पूरी की गई।
प्रत्यारोपण प्रक्रिया पूरी होने के बाद मरीज के शरीर में रोपण की गई नई किडनी ने सामान्य रूप से काम करना शुरू कर दिया है। चिकित्सकों के अनुसार, मरीज और अपनी किडनी दान करने वाली उसकी साहसी पत्नी—दोनों की शारीरिक स्थिति पूरी तरह स्थिर है और वे तेजी से रिकवर कर रहे हैं।
लंबे समय से डायलिसिस पर निर्भर था मरीज
पीड़ित 32 वर्षीय मरीज गंभीर क्रॉनिक किडनी डिजीज से ग्रस्त था और काफी लंबे समय से नियमित रूप से डायलिसिस पर ही निर्भर था। बीमारी के लगातार बढ़ने की वजह से डॉक्टर ने किडनी ट्रांसप्लांट को ही उसके जीवन बचाने का एकमात्र और सबसे बेहतर उपचार विकल्प बताया था। हालांकि, इस इलाज के मार्ग में परिवार के सामने सबसे बड़ी बाधा आर्थिक तंगी की थी, लेकिन राज्य सरकार की ‘मुख्यमंत्री असाध्य रोग उपचार योजना’ के तहत प्राप्त हुई आर्थिक सहायता ने इस कठिन इलाज को संभव बना दिया। ऐसे में पत्नी ने आगे आकर खुद अपनी मर्जी से किडनी दान की और अपने पति के जीवन की रक्षा करने में एक मिसाल कायम की। इस सफल ऑपरेशन के बाद से मरीज के पूरे परिवार में राहत और खुशी का माहौल है।
एसएनएमसी के लिए मील का पत्थर साबित होगी यह उपलब्धि
एसएनएमसी के प्रधानाचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस अभूतपूर्व सफलता को कॉलेज और पूरे आगरा मंडल के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि अब स्थानीय स्तर पर ही उच्चस्तरीय किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध हो जाने से आर्थिक रूप से कमजोर और बेसहारा जरूरतमंद मरीजों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने इस बड़ी सफलता के लिए एसएनएमसी की पूरी मेडिकल टीम को हार्दिक बधाई दी और एसजीपीजीआई लखनऊ की विशेषज्ञ टीम के निरंतर सहयोग तथा मार्गदर्शन के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
एसएनएमसी के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. अपूर्व जैन ने जानकारी दी कि सफल प्रत्यारोपण के बाद मरीज और उसकी पत्नी दोनों की हालत पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट की गई नई किडनी ने बहुत अच्छी तरह काम करना शुरू कर दिया है और उसकी सेहत में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार दोनों की सेहत पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
दो प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञ टीमों ने संभाली कमान
इस जटिल और ऐतिहासिक किडनी ट्रांसप्लांट को सफल बनाने में एसजीपीजीआई लखनऊ और एसएनएमसी आगरा की तमाम विशेषज्ञ टीमों ने अपनी अहम भूमिका निभाई। एसजीपीजीआई लखनऊ की टीम में यूरोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. एमएस अंसारी, डॉ. संजय कुमार सुरेका और डॉ. आशीष रंजन, नेफ्रोलॉजी विभाग से डॉ. मानस रंजन बेहरा, तथा एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. तपस कुमार सिंह और डॉ. बोनचनपल्ली मोहन कुमार शामिल रहे। इसके अलावा नर्सिंग टीम में सोसाकुट्टी विल्सन, विजय कुमार और आकांक्षा गौतम ने पूरा सहयोग प्रदान किया।
दूसरी ओर, एसएनएमसी आगरा की टीम में नेफ्रोलॉजी विभाग से डॉ. अपूर्व जैन, डॉ. मुदित खुराना और डॉ. कैरवी भारद्वाज ने कमान संभाली। यूरोलॉजी विभाग से डॉ. प्रशांत लवानिया, डॉ. अंकुश गुप्ता, डॉ. विजय त्यागी, डॉ. प्रदीप देब और डॉ. अभिषेक पाठक इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा रहे। वहीं, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. योगिता द्विवेदी, डॉ. अर्चना अग्रवाल, डॉ. राजीव पुरी, डॉ. अतिहर्ष मोहन और डॉ. प्रवीण पांडेय ने ऑपरेशन के दौरान अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आगरा और आसपास के जिलों के मरीजों को मिलेगी भारी राहत
एसएनएमसी में किडनी ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर और आधुनिक सुविधा का शुरू होना न केवल आगरा के लिए, बल्कि मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, कासगंज, हाथरस और आसपास के अन्य कई पड़ोसी जिलों के मरीजों के लिए बहुत बड़ी राहत की खबर है। अब किडनी फेल्योर के गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अन्य शहरों में भटकने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी। इससे एक ओर जहां मरीजों और उनके तीमारदारों का यात्रा, इलाज और ठहरने का भारी आर्थिक बोझ कम होगा, वहीं समय पर सही उपचार मिलने से मरीजों की जान बचाने की संभावना भी कई गुना बढ़ जाएगी।
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