आगरा। श्री महाकालेश्वर मंदिर, बूढ़ी का नगला, दयालबाग में चल रहे नौ दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ, महारुद्राभिषेक एवं श्रीराम कथा महोत्सव के नवम दिवस भक्तिभाव और रोमांच से परिपूर्ण रहा। प्रातःकाल भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से महारुद्राभिषेक एवं श्री रुद्र महायज्ञ संपन्न हुआ। इसके बाद संध्या में चित्रकूट धाम से पधारे कथावाचक पंडित विमलेश त्रिवेदी महाराज ने केवट संवाद, चित्रकूट दर्शन, हनुमान जी से भेंट तथा बाली-सुग्रीव युद्ध के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा व्यास ने केवट संवाद का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम और केवट का संबंध भक्त और भगवान के बीच के निष्कपट प्रेम का अनुपम उदाहरण है। केवट ने भगवान से धन-दौलत अथवा किसी सांसारिक वस्तु की मांग नहीं की, बल्कि केवल उनकी सेवा का अवसर मांगा। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम भक्त के भाव को देखते हैं, उसकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति को नहीं। सच्ची भक्ति में दिखावा नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और विश्वास आवश्यक है।
चित्रकूट दर्शन का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि वनवास के दौरान चित्रकूट भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की तप, त्याग और मर्यादा की भूमि बना। चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि प्रभु के वनवासी जीवन, भरत मिलाप और भाई-भाई के अनुपम प्रेम की स्मृतियों से जुड़ा पावन धाम है। भगवान श्रीराम के चित्रकूट प्रवास का प्रसंग सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
इसके बाद कथा व्यास ने हनुमान जी से श्रीराम की भेंट का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त और सेवा, समर्पण एवं निष्ठा के सर्वोच्च प्रतीक हैं। श्रीराम और हनुमान का मिलन भक्त और भगवान के मिलन का दिव्य प्रसंग है। हनुमान जी ने अपने जीवन को प्रभु श्रीराम की सेवा के लिए समर्पित कर दिया और यही समर्पण उन्हें अमर बना देता है।
कथा में बाली और सुग्रीव युद्ध का प्रसंग भी सुनाया गया। कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में अधर्म, अहंकार और अन्याय का त्याग करना चाहिए। भगवान श्रीराम ने धर्म की स्थापना और न्याय की रक्षा के लिए सुग्रीव का साथ दिया। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
कथा के दौरान केवट संवाद, चित्रकूट दर्शन और हनुमान जी से भेंट के प्रसंगों पर श्रद्धालु भावविभोर हुए, वहीं बाली-सुग्रीव युद्ध के प्रसंग ने कथा पांडाल में उत्साह का वातावरण बना दिया। जय श्रीराम और बजरंगबली के जयघोष से पूरा महाकालेश्वर दरबार गूंज उठा।
श्री महाकालेश्वर दरबार के यज्ञाचार्य आचार्य पंडित सुनील कुमार वशिष्ठ ने बताया कि सोमवार को भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी एवं भव्य राजतिलक के साथ श्रीराम कथा का विश्राम होगा।
उन्होंने कहा कि नौ दिनों तक चले इस आयोजन में महारुद्राभिषेक, श्री रुद्र महायज्ञ और श्रीराम कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान शिव की भक्ति के साथ प्रभु श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, त्याग, सेवा और धर्म का संदेश प्राप्त हुआ।
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