आगरा: शुक्रवार दोपहर को हुई मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर नगर निगम और जिला प्रशासन के मॉनसून से निपटने के तमाम दावों की कलई खोलकर रख दी है। शहर के कई प्रमुख इलाके जलभराव के चलते पानी-पानी हो गए, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया।
इस जल प्रलय का सबसे वीभत्स रूप ऐतिहासिक दीवानी कचहरी परिसर में देखने को मिला, जहां पूरा न्यायिक परिसर एक तैरते हुए तालाब या दरिया में तब्दील हो गया। वकीलों के चैंबर पानी से लबालब भर गए, वाहन आधे से ज्यादा डूब गए और न्याय की आस में आने वाले वादकारियों व अधिवक्ताओं को मजबूरन पानी को चीरकर अदालत तक पहुंचना पड़ा।
दूसरी तरफ, वार्ड-12 के नगला हरमुख क्षेत्र में भी पानी ने भारी तबाही मचाई, जबकि थाना मदन मोहन गेट के अंतर्गत आने वाली पुलिस चौकी खिड़की काले खां के ठीक सामने जमीन धंसने से लगभग एक सदी यानी 100 साल पुराना विशाल पेड़ धराशायी हो गया। गनीमत यह रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और जनहानि टल गई।
दीवानी कचहरी बनी तालाब, वकीलों के चैंबरों में घुसा पानी
हर साल बारिश के मौसम में दीवानी कचहरी का जलमग्न होना एक पुरानी और लाइलाज बीमारी बन चुका है, लेकिन इस बार भी स्थिति जस की तस बनी रही। परिसर के भीतर पानी भर जाने के कारण अधिवक्ताओं के बैठने के चैंबरों में पानी घुस गया। इसके अलावा, पार्किंग एरिया में खड़े कई दोपहिया और चारपहिया वाहन आधे से अधिक पानी में डूब गए। कई वाहन चालकों को अपने वाहनों को स्टार्ट करने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
अदालत परिसर के अधिकांश रास्ते पानी में डूब जाने के कारण वकीलों और वादकारियों को कमर तक पानी के बीच से गुजरना पड़ा। इस दौरान कई लोग फिसलन के कारण कीचड़ और पानी में गिर पड़े, जिससे उन्हें गंभीर चोटें भी आईं।
अधिवक्ताओं का कहना है कि आसमान से जरा सी बारिश क्या होती है, दीवानी कचहरी का हाल बद से बदतर हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद वर्षों बीत जाने के बाद भी इस गंभीर समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। उनका सीधा आरोप है कि न्यायिक प्रशासन और संबंधित जिम्मेदार विभाग इस बदहाली के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन और उदासीन बने हुए हैं।
वकीलों का फूटा गुस्सा, दी आंदोलन की चेतावनी
दीवानी परिसर में लगातार हो रही इस जलभराव की समस्या को लेकर राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा, बी.एस. फौजदार, गोपाल सक्सेना, दिनेश चंद्र शर्मा, पवन कुमार गौतम, नरेंद्र शर्मा राठौर तथा डॉ. अंबेडकर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र कुमार कर्दम, सिद्धार्थ जी कर्दम, राजा बाबू शर्मा, अजय कुमार शर्मा, ओ.पी. वर्मा सहित तमाम वकीलों ने तीव्र आक्रोश व्यक्त किया है।
अधिवक्ताओं का दो टूक कहना है कि परिसर की मौजूदा तस्वीर को देखकर यह यकीन करना नामुमकिन है कि यह कोई सम्मानित न्यायालय परिसर है, जहां हर रोज हजारों लोग न्याय पाने की उम्मीद लेकर दूर-दूर से आते हैं। उन्होंने कचहरी के शौचालय की दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए बताया कि वहां भारी गंदगी और सड़न भरी बदबू का साम्राज्य रहता है, और नियमित सफाई कभी नहीं कराई जाती। इस संबंध में कई बार लिखित शिकायतें और मांगें उठाई जा चुकी हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
वकीलों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जल्द से जल्द इस जलभराव और साफ-सफाई की व्यवस्था को नहीं सुधारा गया, तो संपूर्ण अधिवक्ता समाज सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।
नगला हरमुख और महावीर नगर में भी हाहाकार
सिर्फ कचहरी ही नहीं, बल्कि वार्ड-12 स्थित नगला हरमुख में भी झमाझम बारिश के चलते सड़कें और गलियां पूरी तरह पानी में डूब गईं। क्षेत्र के भाजपा पार्षद किशन नायक का कहना है कि नालों की समय पर डी-सिल्टिंग (सफाई) न होने और जल निकासी का कोई पुख्ता इंतजाम न होने के कारण हर वर्ष यही नारकीय स्थिति पैदा हो जाती है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मॉनसून आने से पहले ही तमाम तैयारियां पूरी कर ली जानी चाहिए थीं, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आज आम जनता भुगतने को विवश है। ठीक इसी तरह, लंगड़े की चौकी इलाके के अंतर्गत आने वाले महावीर नगर में नाले उफनकर सीधे लोगों के घरों के अंदर तक जा घुसे।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हाल ही में हुई भारी बारिश के दौरान भी शहर का बड़ा हिस्सा पानी में डूब चुका था, लेकिन उसके बाद भी किसी भी संबंधित विभाग ने कोई सबक नहीं लिया और न ही कोई ठोस सुधारात्मक कदम उठाया। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और अधिक बारिश होने की संभावना जताई है, जिससे शहरवासियों की धड़कनें और चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।
जमीन धंसने से गिरा 100 साल पुराना पेड़, टला बड़ा हादसा
उधर, थाना मदन मोहन गेट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पुलिस चौकी खिड़की काले खां के ठीक सामने लगातार हो रही बारिश से जमीन अंदर ही अंदर धंस गई। जमीन कमजोर होने के कारण वहां खड़ा लगभग 100 वर्ष पुराना एक विशालकाय पेड़ अचानक भरभराकर गिर पड़ा। पेड़ के गिरने से उस व्यस्त मार्ग पर कुछ पलों के लिए भारी अफरा-तफरी और डर का माहौल बन गया। हालांकि, यह गनीमत रही कि जिस वक्त यह पुराना पेड़ गिरा, उसके नीचे कोई भी व्यक्ति या वाहन मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और संबंधित महकमे की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और मार्ग को साफ करने के लिए पेड़ को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर शहर के बुनियादी ढांचे पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है कि आखिर विकास के नाम पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपये कहां जा रहे हैं और शहर की जल निकासी व्यवस्था कब पटरी पर लौटेगी। हर साल बरसात के मौसम में सामने आने वाली ऐसी तस्वीरें प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही हैं।
शहर के लोगों का साफ कहना है कि यदि वक्त रहते नालों की मुकम्मल सफाई, पानी की निकासी के नए मार्ग और सड़कों की मरम्मत के कार्य पूरे कर लिए जाते, तो आज जनता को इस कदर आफत और परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।
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