अयोध्या राम मंदिर चंदे को लेकर योगी सरकार का बड़ा बयान: वित्तीय गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के सभी दावे खारिज, 3,300 करोड़ रुपये के चंदे का हिसाब पूरी तरह पारदर्शी

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अयोध्या: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए मिले चंदे और उसकी वित्तीय स्थिति को लेकर चल रही तमाम अटकलों और दावों के बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का एक बहुत बड़ा और स्पष्ट बयान सामने आया है। सरकारी सूत्रों का हवाला देते हुए यह साफ किया गया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज या उसके फंड में बड़े पैमाने पर किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी या भ्रष्टाचार के दावे पूरी तरह निराधार और सही नहीं हैं।

​राम मंदिर के निर्माण के लिए देश-विदेश से जनता द्वारा दिए गए कुल 3,300 करोड़ रुपये के चंदे का एक-एक पाई का हिसाब-किताब बेहद करीने से रखा गया है। इस पूरे वित्तीय रिकॉर्ड का स्वतंत्र रूप से बाहरी ऑडिटर फर्म ‘एम/एस वी शंकर अय्यर एंड कंपनी’ द्वारा विधिवत ऑडिट कराया गया है।

खर्च का पूरा विवरण और पारदर्शिता

​वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अब तक प्राप्त राशि में से लगभग 1,800 करोड़ रुपये सीधे मंदिर के भव्य निर्माण कार्य पर और करीब 400 करोड़ रुपये मंदिर परिसर के विस्तार के लिए जमीन खरीद पर खर्च किए हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रस्ट द्वारा किए गए सभी भुगतान पूरी तरह से पारदर्शी बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से ही किए गए हैं, और इस पूरी प्रक्रिया में कोई भी नकद (कैश) लेनदेन नहीं किया गया है। सरकार का यह भी कहना है कि ट्रस्ट की पूरी वित्तीय प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी है और सभी प्रकार के खर्चे पूरी तरह से तय नियमों और बैंकिंग प्रोटोकॉल के दायरे में रहकर किए गए हैं।

यही वजह है कि ट्रस्ट पर लगाए जा रहे बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटालों या गड़बड़ियों के आरोपों का कोई भी ठोस या वास्तविक आधार नहीं है। हालांकि, सरकारी सूत्रों ने यह जरूर स्पष्ट किया है कि दान में मिले नोटों और कैश की छंटाई के दौरान केवल कुछ मात्रा में चोरी की घटनाएं सामने आई थीं।

Dr. Bhanu Pratap Singh