सूर्यसुता फाउंडेशन के महायज्ञ में गूंजे दुर्गा सप्तशती के मंत्र, संतों ने दी धर्म की सीख

RELIGION/ CULTURE

विश्व शांति और जनकल्याण की कामना के साथ नौ दिवसीय सप्तचंडी पाठ महायज्ञ का पूर्णाहुति हवन संपन्न

महाहवन, पूर्णाहुति एवं प्रसादी के साथ हुआ समापन, संतों और श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ

आगरा। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर सूर्यसुता फाउंडेशन द्वारा खंदारी हनुमान चौराहा स्थित नालंदा प्राइड में आयोजित नौ दिवसीय सप्तचंडी पाठ महायज्ञ का समापन गुरुवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दुर्गा सप्तशती के दशांश महाहवन, पूर्णाहुति एवं प्रसादी वितरण के साथ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। महायज्ञ के दौरान विद्वान आचार्यों द्वारा नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का 100 बार संपुटित पाठ कर विश्व शांति, राष्ट्र की उन्नति तथा समस्त मानव समाज के सुख-समृद्धि की कामना की गई।

योगी आलोक नाथ (बागेश्वर धाम) ने कहा कि दुर्गा सप्तशती केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आदिशक्ति का साक्षात स्वरूप है। गुप्त नवरात्रि में संपुटित सप्तचंडी पाठ और यज्ञ से व्यक्ति के भीतर आत्मबल, सकारात्मक ऊर्जा और धर्म के प्रति आस्था का जागरण होता है। उन्होंने कहा कि जब सामूहिक रूप से मां भगवती का स्मरण किया जाता है, तो उसका शुभ प्रभाव पूरे समाज और राष्ट्र पर पड़ता है। विश्व में शांति, सद्भाव और मानव कल्याण की कामना से यह महायज्ञ संपन्न कराया गया है।

सूर्यसुता फाउंडेशन के सचिव पुष्कल गुप्ता ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना भी है। गुप्त नवरात्रि के इस नौ दिवसीय सप्तचंडी पाठ महायज्ञ में श्रद्धालुओं की अपार आस्था और सहयोग ने आयोजन को सफल बनाया।

उन्होंने कहा कि मां भगवती की कृपा से यह महायज्ञ निर्विघ्न संपन्न हुआ और सभी श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति एवं प्रसादी में सहभागी होकर धर्मलाभ प्राप्त किया। संस्था भविष्य में भी जनकल्याण और राष्ट्रहित के ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों का क्रम निरंतर जारी रखेगी।

श्री मनःकामेश्वर मठ मंदिर के श्रीमहंत योगेश पुरी ने कहा कि गुप्त नवरात्रि में मां भगवती की आराधना और चंडी यज्ञ से धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा मिलती है। ऐसे आयोजन समाज को सनातन परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।

हनुमंत धाम मंदिर, लंगड़े की चौकी के महंत गोपी गुरु और भरत उपाध्याय ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की महान परंपरा है। सामूहिक रूप से किए गए मंत्रोच्चार और हवन से वातावरण पवित्र होता है तथा जनकल्याण की भावना मजबूत होती है।

लायंस क्लब इंटरनेशनल के पूर्व डायरेक्टर जितेंद्र चौहान ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक समरसता को बढ़ाने वाले ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक सोच और सेवा भावना का संदेश देते हैं। विश्व शांति के लिए किया गया यह महायज्ञ अत्यंत प्रेरणादायी है।

इस अवसर पर कैलाश महादेव मंदिर के महंत निर्मल गिरी, गुरु का ताल गुरुद्वारा के बाबा अमरीक सिंह, योगी निर्भय नाथ, अनुज उपाध्याय, अजय राजोरिया, राजदीप ग्रोवर, डॉ दीपेश उपाध्याय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कीर्ति जी आदि उपस्थित रहे।

 

Dr. Bhanu Pratap Singh