आगरा: कालिंदी विहार स्थित बुद्धा पार्क में हाल ही में नवनिर्मित दीवार के ढह जाने की घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस मामले को लेकर भारतीय जाटव समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
निर्माण मानकों पर खड़े हुए सवाल
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में उपेन्द्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि एक नवनिर्मित दीवार का अचानक ढह जाना महज एक सामान्य हादसा नहीं है, बल्कि यह निर्माण कार्य में बरती गई भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, प्रयुक्त सामग्री और तय किए गए तकनीकी मानकों की विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह व्यक्त किया है।
’जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत कार्रवाई की मांग
उपेन्द्र सिंह ने सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हवाला देते हुए मांग की है कि इस घटना की समयबद्ध और स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में भ्रष्टाचार या मानक के विपरीत काम पाया जाता है, तो यह जनता के पैसे की बर्बादी के साथ-साथ जनहित से खिलवाड़ भी है। उन्होंने इस पूरे निर्माण कार्य की प्रक्रिया—नींव रखने से लेकर भुगतान तक—की गहन छानबीन की आवश्यकता पर बल दिया है।
दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जांच के दौरान यदि कोई भी अधिकारी, कार्यदायी संस्था, ठेकेदार या अन्य कोई भी व्यक्ति लापरवाही या अनियमितता का दोषी पाया जाता है, तो उनके खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
भारतीय जाटव समाज ने इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को टाला जा सके और सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जा सके।
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