अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी: कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी बोले- ‘घटना से मैं लज्जित और दुखी’, ट्रस्ट के कामकाज पर दी सफाई

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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी के मामले ने न केवल देश की आस्था को आहत किया है, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस प्रकरण के बीच ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

​’घटना बेहद शर्मनाक’

कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने पत्र में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि रामलला के दरबार में हुई चोरी की घटना से वे व्यक्तिगत रूप से अत्यंत आहत और लज्जित हैं। उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। साथ ही, उन्होंने अपनी भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि कोषाध्यक्ष होने के बावजूद उनका दैनिक नकदी प्रबंधन या दान की गिनती में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं रहता था।

पारदर्शिता का दावा और पुणे प्रवास का तर्क

वित्तीय व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के सभी खर्च बैंकिंग प्रणाली के जरिए किए जाते हैं। उन्होंने सफाई दी कि उनका स्थायी निवास पुणे में है और वे अक्सर कथा-प्रवचन के कार्यक्रमों के सिलसिले में देशभर में व्यस्त रहते हैं, जिसके कारण उनका अयोध्या आना कम हो पाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने किसी भी प्रवास या यात्रा के लिए उन्होंने आज तक ट्रस्ट के खजाने से एक रुपया भी नहीं लिया है।

​पुलिस जांच में खुला संपत्तियों का राज

इधर, मामले की जांच कर रही अयोध्या पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। रविवार को पुलिस ने पांच आरोपियों—अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रामशंकर यादव (टिन्नू), करुणेश पांडे और मनीष यादव—से करीब पांच घंटे लंबी पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान पुलिस को चोरी की रकम से बनाई गई अवैध संपत्तियों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। अब पुलिस इन संपत्तियों की विस्तृत जांच कर रही है।

इससे पूर्व, पुलिस ने मुख्य आरोपी अविनाश को जेल में रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। जांच अधिकारी सीओ आशुतोष तिवारी के अनुसार, जरूरत पड़ने पर अन्य आरोपियों को भी दोबारा रिमांड पर लिया जा सकता है।

​6 जुलाई की बैठक है अहम

पूरे प्रकरण के बीच, 6 जुलाई को होने वाली राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की चर्चाओं के बीच, यह बैठक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और वित्तीय पारदर्शिता के लिए नए सख्त नियम बनाने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।

Dr. Bhanu Pratap Singh