आगरा। संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी मिसाल पेश करते हुए ‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ ने पिछले 5 वर्षों में 5 लाख से अधिक देशी पौधे रोपित कर पारिस्थितिक तंत्र के पुनर्जीवन की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। ‘वन महोत्सव’ के अवसर पर साझा की गई यह जानकारी न केवल संस्था के समर्पण को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे सही दिशा में किए गए प्रयास पर्यावरण को पुनर्जीवित कर सकते हैं।
बंजर से समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र तक का सफर
वाइल्डलाइफ एसओएस के प्रयासों का सबसे जीवंत उदाहरण कर्नाटक की रामदुर्गा घाटी है। कभी खनन और वनों की कटाई से जूझ रहे इस बंजर क्षेत्र को आज एक समृद्ध जंगल में बदला जा चुका है। संस्था का यह प्रयास सिर्फ हरियाली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। नतीजा यह है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में खेती करना आसान हुआ है और पलायन जैसी समस्याओं में कमी आई है।
मथुरा में लौटी जैव विविधता
मथुरा स्थित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र के आसपास भी संस्था ने ‘देशी ग्रीन कवर’ का विस्तार किया है। हाल ही में यहाँ 2,000 से अधिक फलदार वृक्ष जैसे जामुन, शहतूत, नीम, अनार, अमरूद, इमली, गूलर और कटहल लगाए गए हैं। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। यहाँ जकोबियन कुक्कू, काला तीतर, येलो फुट ग्रीन पिजन, इंडियन ग्रे हॉर्नबिल और किंगफिशर जैसे पक्षियों की वापसी हुई है। साथ ही, बंगाल मॉनिटर लिज़र्ड (गोयरा) की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र अब एक स्वस्थ और संतुलित पारिस्थितिक तंत्र बन चुका है।
संरक्षण का एक व्यापक विजन
संस्था की यह मुहिम केवल मथुरा या कर्नाटक तक सीमित नहीं है। इसके तहत महाराष्ट्र का लेपर्ड प्रोजेक्ट, जम्मू-कश्मीर की विभिन्न परियोजनाएं और बनेरघट्टा भालू बचाव केंद्र जैसे प्रमुख स्थल भी शामिल हैं। संस्था का उद्देश्य देशी वनस्पतियों के जरिए मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना, मृदा अपरदन रोकना और कार्बन अवशोषण को बढ़ावा देना है ताकि वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास विकसित किए जा सकें।
संस्था के प्रमुखों के विचार:
वाइल्डलाइफ के सह-संस्थापक एवं सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि “5 लाख पौधे लगाना केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि वन्यजीवों और मानव समुदायों के भविष्य के प्रति हमारी वर्षों की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। लगाया गया प्रत्येक पौधा पृथ्वी के बेहतर और सुरक्षित भविष्य में निवेश है।”
वाइल्डलाइफ की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा”सफल संरक्षण वही है, जहाँ वन्यजीवों के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को भी लाभ मिले। हमने सामुदायिक सहभागिता से वनों पर बढ़ते दबाव को कम किया है।”
संस्था के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजू राज एम.वी ने कहा “देशी वृक्ष मिट्टी की उर्वरता और भूजल स्तर को सुधारने में रीढ़ की हड्डी का काम करते हैं। हमारे संरक्षण प्रयास अब जमीन पर स्पष्ट परिणाम दे रहे हैं।”
- अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामला: मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की कार जब्त, पुलिस की जांच में बड़े खुलासे - July 4, 2026
- वाराणसी: काशी विश्वनाथ मंदिर में ड्यूटी के दौरान पीएसी जवान की कार्बाइन से चली गोली, 3 लोग घायल - July 4, 2026
- मेरठ में दिल दहला देने वाली वारदात: प्लॉट के विवाद में पति ने चाकू से गोदकर की सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर पत्नी की हत्या, आरोपी ने खुद को भी किया लहूलुहान - July 4, 2026