आगरा। बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा ऑनलाइन कंटेंट (CSAM) रखने, उसे डाउनलोड करने या साझा करने वालों पर अब कानून का शिकंजा और कस गया है। आगरा साइबर क्राइम पुलिस ने हाल ही में ऐसे दो मामलों का खुलासा करते हुए दो लोगों के खिलाफ आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि डिजिटल डिवाइस में ऐसी सामग्री रखना न केवल अनैतिक है, बल्कि एक अत्यंत गंभीर दंडनीय अपराध है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से मिलती है सूचना
साइबर अपराधों की निगरानी के लिए वैश्विक स्तर पर एक मजबूत नेटवर्क काम कर रहा है। अमेरिका की ‘नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रन’ (NCMEC) की ‘साइबर टिपलाइन’ दुनिया भर में संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों पर पैनी नजर रखती है। जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या अन्य माध्यमों से ऐसी सामग्री की रिपोर्ट होती है, तो इसकी सूचना भारत के ‘नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो’ (NCRB) को दी जाती है। एनसीआरबी फिर संबंधित राज्य की पुलिस को रिपोर्ट भेजता है, जिसके बाद कानूनी कार्यवाही शुरू होती है।
आगरा में दो लोगों पर कार्रवाई
आगरा साइबर क्राइम थाने में इसी प्रक्रिया के तहत दो केस दर्ज किए गए हैं:
रिचर्ड केल्विन डॉयल (निवासी लालकुर्ती, आगरा): इंस्टाग्राम के माध्यम से बच्चों से संबंधित अश्लील कंटेंट प्रसारित करने के आरोप में आईटी एक्ट की धारा 67B के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
अरुण कुमार (निवासी रामबाग बस्ती, कुबेरपुर, आगरा): इसी तरह के मामले में इंस्टाग्राम का उपयोग कर आपत्तिजनक सामग्री फैलाने के आरोप में इनके खिलाफ भी धारा 67B के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस फिलहाल दोनों मामलों में डिजिटल साक्ष्य जुटाने में लगी है।
डाउनलोड करना भी कानूनन अपराध
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि केवल ‘शेयर’ करना ही अपराध नहीं है। अपने मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या क्लाउड स्टोरेज में ऐसी फाइलें सुरक्षित रखना या उन्हें डाउनलोड करना भी कानूनन जुर्म है। डिजिटल फोरेंसिक तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी है कि डिलीट की गई फाइलों को भी आसानी से रिकवर किया जा सकता है। इसलिए किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री को डिवाइस में न रखेंगे तो कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
पुलिस की अपील
आगरा साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि इंटरनेट का उपयोग जिम्मेदारी से करें। यदि किसी प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री दिखाई दे, तो उसे न तो डाउनलोड करें और न ही आगे भेजें। इसके बजाय, तुरंत उस कंटेंट की रिपोर्ट संबंधित प्लेटफॉर्म को करें या साइबर पुलिस को इसकी सूचना दें। पुलिस की यह सख्त कार्रवाई संदेश देती है कि ऑनलाइन सुरक्षा के मामले में कोई भी लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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