अखिलेश यादव का योगी सरकार पर तंज: कहा- भाजपाइयों के महापाप की परतें खुल रही हैं, अब ढंकने की तैयारी शुरू

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लखनऊ। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान की गई राशि के कथित गबन का मामला दिन-प्रतिदिन और गंभीर होता जा रहा है। विशेष जांच दल (SIT) द्वारा अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद अब इस मामले में नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में सिंधी समाज द्वारा किए गए एक बड़े दावे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

200 किलो चांदी और रसीद का अभाव

रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंधी समाज ने दावा किया है कि उन्होंने राम मंदिर के लिए 200 किलो चांदी दान में दी थी, लेकिन उन्हें इसके बदले कोई आधिकारिक रसीद प्रदान नहीं की गई। बिना रसीद के इतने बड़े पैमाने पर की गई दान की इस राशि को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर यह दान कहां गया और इसका लेखा-जोखा क्यों नहीं रखा गया?

​अखिलेश यादव का कटाक्ष: ‘जांच’ या ‘ढांक’?

इस खुलासे के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा, “एक परत और खुली… अगर भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों के महापाप की परतें यूँ ही खुलती रहीं तो ‘जाँच’ की जगह ‘ढाँक’ का काम और भी तेज़ी से शुरू हो जाएगा।” अखिलेश यादव का यह बयान साफ तौर पर सरकार पर मामले को दबाने या लीपापोती करने के आरोपों की ओर इशारा करता है।

​SIT की रिपोर्ट में क्या है खास?

एसआईटी की टीम—जिसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल थे—ने मंगलवार सुबह करीब 11 बजे गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को अपनी गोपनीय रिपोर्ट सौंपी।

सूत्रों के मुताबिक यह 150 पन्नों की शुरुआती रिपोर्ट है, जिसमें चढ़ावा चोरी और कमीशनखोरी के पुख्ता सुबूत होने की बात कही गई है। जांच में मंदिर के कर्मचारियों की नियुक्ति और दान राशि की गणना प्रक्रिया में भी भारी अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। टीम ने इस रिपोर्ट में गवाहों के बयानों और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों का पूरा विवरण दिया है।

अब यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष रखी जाएगी, जिसके बाद इस पूरे कथित ‘चढ़ावा गबन’ मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई और जवाबदेही तय होने की उम्मीद है। मंदिर परिसर में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर खड़े हुए ये सवाल देश भर की आस्था और प्रबंधन के बीच एक बड़ी खाई पैदा कर रहे हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh